Explainer: क्या आपके खाते में आ गई पीएफ पर मिलने वाली 8.25% की ब्याज राशि? जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब
अगर आपके मन में भी सवाल है कि 8.25% ब्याज आया या नहीं, तो इंतजार करने के बजाय अपना पीएफ बैलेंस चेक करें। नई ईपीएफ योजना 2026 के साथ कई नियम बदले हैं, जिन्हें जानना हर नौकरीपेशा के लिए जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं सबकुछ
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विस्तार
अगर आप भी अपने पीएफ खाते में हर साल ब्याज आने का इंतजार करते हैं, तो इस बार आपके लिए अच्छी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज 15 जुलाई तक करीब 34 करोड़ सदस्य खातों में जमा कर दिया है। यह पहली बार है जब ईपीएफओ ने जुलाई के मध्य तक लगभग सभी खातों में ब्याज जमा करने की प्रक्रिया पूरी की है। इससे पहले यह प्रक्रिया सितंबर, अक्तूबर और कई बार नवंबर तक चलती थी।
ऐसे में सवाल उठता है कि ईपीएफ के साथ कितने कर्मचारी जुड़े हैं? ईपीएफो में ब्याज दर क्या होता है? पीएफ बैलेंस चेक कैसे करें? अगर आपके खाते में ब्याज नहीं दिख रहा तो क्या करें? इस बार ब्याज जल्दी कैसे जमा हुआ? ब्याज की गणना में क्या बदलाव हुआ है? ब्याज दरों का ट्रेंड क्या रहता है? क्या है पीएफ कटौती का नया नियम? ईपीएफ स्कीम 2026 क्या है? आइए जानते हैं।
ईपीएफओ के साथ कितने कर्मचारी जुड़े हैं?
- ईपीएफओ के पास वर्तमान में 36.21 करोड़ सदस्य पंजीकृत हैं।
- देशभर की 30.64 लाख संस्थाएं ईपीएफओ के साथ पंजीकृत हैं।
- सरकार के अनुसार, 34 करोड़ खातों में ब्याज जमा होने का आंकड़ा पंजीकृत और निष्क्रिय दोनों तरह के रिकॉर्ड को मिलाकर है।
ईपीएफओ की ब्याज दर क्या होती है?
ईपीएफओ की ब्याज दर वह तय प्रतिशत है, जिसके हिसाब से कर्मचारी के पीएफ (EPF) खाते में जमा रकम पर हर साल ब्याज मिलता है। इस ब्याज दर का फैसला ईपीएफओ का केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) करता है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलती है। इसके बाद यह दर संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए लागू होती है।
यह कैसे काम करती है?
मान लीजिए आपके पीएफ खाते में हर महीने वेतन से पैसा जमा होता है। ईपीएफओ हर महीने आपके खाते में मौजूद राशि (रनिंग बैलेंस) के आधार पर ब्याज की गणना करता है। हालांकि, यह ब्याज हर महीने खाते में नहीं आता। पूरे वित्तीय वर्ष का ब्याज जोड़ने के बाद इसे एक बार में आपके पीएफ खाते में क्रेडिट किया जाता है। यानी आपका पैसा पूरे साल ब्याज कमाता रहता है, लेकिन उसकी एंट्री साल में एक बार दिखाई देती है।
पीएफ बैलेंस कैसे चेक करें?
1. पासबुक लाइट के जरिए
- सबसे पहले ईपीएफओ के आधिकारिक Member Passbook Portal https://passbook.epfindia.gov.in/MemberPassBook/login पर जाएं।
- अपने 12 अंकों के यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), पासवर्ड और कैप्चा की मदद से लॉगिन करें।
- आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP से सत्यापन करें।
- इसके बाद View पर क्लिक करें और Passbook Lite चुनें।
- यहां आप अपने पीएफ खाते में हाल की जमा राशि (Contribution), निकासी (Withdrawal) और उपलब्ध बैलेंस की जानकारी देख सकते हैं।
2. एसएमएस के जरिए
अगर आपका यूएएन सक्रिय है और वह आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर से जुड़ा है, तो आप एक एसएमएस भेजकर भी पीएफ बैलेंस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर एसएमएस भेजें।
- संदेश का प्रारूप होगा: EPFOHO UAN
- इसमें अपना यूएएन नंबर जरूर लिखें।
- यदि आप जानकारी किसी क्षेत्रीय भाषा में चाहते हैं, तो यूएएन के बाद उस भाषा का कोड जोड़ दें।
यह सुविधा 10 भाषाओं में उपलब्ध है
- अंग्रेजी (ENG/डिफॉल्ट)
- हिंदी (HIN)
- पंजाबी (PUN)
- गुजराती (GUJ)
- मराठी (MAR)
- कन्नड़ (KAN)
- तेलुगु (TEL)
- तमिल (TAM)
- मलयालम (MAL)
- बंगाली (BEN)
एसएमएस के माध्यम से आपको पीएफ की नवीनतम जमा राशि, मौजूदा बैलेंस और केवाईसी की जानकारी मिल जाएगी।
3. UMANG एप के जरिए
- अपने मोबाइल में गूगल प्ले स्टोर या एप स्टोर से UMANG एप डाउनलोड करें।
- एप में लॉगिन कर अपना यूएएन लिंक करें।
- UAN लिंक होने के बाद आप अपना पीएफ बैलेंस, मासिक योगदान (Contribution) और अन्य ईपीएफओ सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
- उमंग एप के जरिए पीएफ से जुड़े दावे (Claim) भी किए जा सकते हैं।
- इसके अलावा, पिछले तीन महीने के पेंशन खाते के लेनदेन का सार (Summary) ऐप में देखा जा सकता है, जबकि विस्तृत विवरण पीडीएफ के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है।
मिस्ड कॉल सेवा
पंजीकृत मोबाइल नंबर से इस 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर भी पीएफ बैलेंस की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
अगर खाते में ब्याज नहीं दिख रहा है तो क्या करें?
अगर आपके पीएफ खाते में अभी तक ब्याज दिखाई नहीं दे रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ईपीएफओ के अनुसार, ब्याज मासिक रनिंग बैलेंस के आधार पर गणना किया जाता है। इसलिए पासबुक में एंट्री देर से दिखाई देने पर भी सदस्य का कोई नुकसान नहीं होता। ब्याज की राशि पूरी तरह देय रहती है।
ईपीएफओ ने यह भी कहा है कि सदस्यों को अपना यूएएन सक्रिय रखना चाहिए और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सहित केवाईसी विवरण अपडेट होना चाहिए। अधूरी या गलत केवाईसी के कारण खाते के अपडेट और क्लेम प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
इस बार ब्याज जल्दी कैसे जमा हुआ?
ईपीएफओ ने अपनी नई केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES) लागू की है। इसके तहत 123 क्षेत्रीय डेटाबेस को एक राष्ट्रीय डेटाबेस में जोड़ा गया है। पहले हर क्षेत्रीय कार्यालय का अलग डेटाबेस होता था, जिससे ब्याज की गणना, सत्यापन और क्रेडिट की प्रक्रिया में काफी समय लगता था। नई व्यवस्था में 30 जून तक डेटा माइग्रेशन पूरा किया गया। 1 और 2 जुलाई को ब्याज की गणना की गई और उसके बाद बैलेंस का सत्यापन कर ब्याज खातों में जमा किया गया। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, नए सिस्टम के जरिए करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक ब्याज ऑटो-प्रोसेस किया गया, जिसके बाद फील्ड अधिकारियों ने उसका सत्यापन किया।
नए CITES प्लेटफॉर्म से क्या बदला?
नई व्यवस्था के तहत करीब 1,700 करोड़ रिकॉर्ड, नियोक्ताओं का डेटा और लगभग 1,400 करोड़ वित्तीय लेनदेन को एक राष्ट्रीय डेटाबेस में शामिल किया गया है। इससे कई सेवाएं पहले के मुकाबले तेज और स्वचालित हो गई हैं। इनमें शामिल हैं;
- पीएफ ब्याज की प्रक्रिया
- क्लेम का सत्यापन
- पीएफ निकासी की प्रक्रिया
नई प्रणाली शुरू होने के बाद करीब 11 लाख लंबित दावों का भी निपटारा किया गया, जिनकी कुल राशि लगभग 3,000 करोड़ रुपये रही।
अब ब्याज की गणना में भी हुआ बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था में सिर्फ ब्याज जल्दी जमा नहीं होगा, बल्कि अंतिम पीएफ भुगतान के समय ब्याज की गणना का तरीका भी बदल गया है।
पहले क्या होता था?
पहले ब्याज की गणना केवल पिछले महीने के आखिरी दिन तक की जाती थी। यदि पीएफ का भुगतान 10, 15 या 20 दिन बाद होता था, तो उस बीच के दिनों का ब्याज सदस्य को नहीं मिलता था।
अब क्या होगा?
नई व्यवस्था के तहत अंतिम पीएफ सेटलमेंट में ब्याज की गणना भुगतान की मंजूरी की तारीख तक की जाएगी। यानी यदि भुगतान में कुछ दिनों की देरी होती है, तो उन अतिरिक्त दिनों का ब्याज भी सदस्य को मिलेगा।
ब्याज दरों में बदलाव का कैसा रहा ट्रेंड?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी ईपीएफओ ने पीएफ पर ब्याज दर 8.25% ही रखी है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया।
मार्च 2022 में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.10% कर दी गई थी, जो चार दशक का सबसे निचला स्तर था। इससे पहले 2020-21 में यह 8.50% थी। बाद में 2022-23 में ब्याज दर 8.15% रही, जिसे 2023-24 में बढ़ाकर 8.25% किया गया। 2024-25 और 2025-26 में भी इसे इसी स्तर पर बरकरार रखा गया।
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 2021-22 की 8.10% ब्याज दर 1977-78 के बाद सबसे कम थी। वहीं पिछले एक दशक में सबसे अधिक 8.80% ब्याज 2015-16 में दिया गया था। 2013-14 और 2014-15 में 8.75%, 2016-17 में 8.65%, 2017-18 में 8.55% और 2011-12 में 8.25% ब्याज दिया गया था।
क्या है पीएफ कटौती का नया नियम?
केंद्र सरकार ने ईपीएफ स्कीम, 2026 लागू कर पीएफ योगदान को लेकर एक अहम स्पष्टता दी है। नए नियम के तहत 12% पीएफ योगदान की दर और ₹15,000 की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि कानूनी रूप से कर्मचारी और नियोक्ता के लिए अधिकतम अनिवार्य पीएफ योगदान ₹1,800 प्रति माह (₹15,000 का 12%) ही होगा। इससे अधिक पीएफ जमा करना अनिवार्य नहीं, बल्कि स्वैच्छिक होगा।
पहले क्या होता था?
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक थी और कंपनी पूरे बेसिक वेतन पर पीएफ काट रही थी, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों उसी आधार पर 12% योगदान देते थे। इससे कई कर्मचारियों के खाते में हर महीने ₹1,800 से कहीं अधिक पीएफ जमा होता था।
अब क्या बदलेगा?
अब अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक है, तो वह और उसका नियोक्ता सिर्फ ₹1,800-₹1,800 का अनिवार्य पीएफ योगदान करने का विकल्प चुन सकते हैं। यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो इससे अधिक योगदान जारी रखा जा सकता है, लेकिन वह स्वैच्छिक माना जाएगा। यह बदलाव अपने-आप लागू नहीं होगा, बल्कि कंपनी की वेतन नीति और कर्मचारी की सहमति पर निर्भर करेगा।
ईपीएफ योजना 2026 क्या है?
केंद्र सरकार ने 29 जून से ईपीएफ योजना, 1952 की जगह नई ईपीएफ योजना, 2026 लागू कर दी है। यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को लागू करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई योजना का उद्देश्य भविष्य निधि से जुड़े नियमों को अधिक सरल बनाना, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना और दावों के निपटारे की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाना है। इसके लिए तकनीक आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे ब्याज जमा करने, दावों के सत्यापन और अन्य सेवाओं में तेजी लाई जा सके।