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RBI: 'भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत पर पश्चिम एशिया में तनाव और कमजोर मानसून बड़ा जोखिम', बोले आरबीआई गवर्नर

Fri, 17 Jul 2026 05:11 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Fri, 17 Jul 2026 05:11 PM IST
सार

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया में तनाव और कमजोर मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम हैं। उन्होंने रुपए के प्रदर्शन का बचाव किया और महंगाई के अनुमानों पर भी बात की।

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Indian Economy Strong Amid West Asia Tensions, Monsoon a Major Risk: RBI Governor
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

विस्तार

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 17 जुलाई को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत है। उन्होंने दूरदर्शन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। मल्होत्रा ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और संभावित कमजोर मानसून को भारत के लिए प्रमुख जोखिम बताया। उन्होंने अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपए के प्रदर्शन का भी बचाव किया।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि लचीली मुद्रास्फीति और लक्ष्यीकरण नीति के तहत मुद्रास्फीति को नियंत्रण करना आरबीआई की पहली जिम्मेदारी बनी हुई है। आर्थिक विकास को समर्थन देते हुए मुद्रास्फीति को प्राथमिकता देना जारी रहेगा। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि कम और स्थिर मुद्रास्फीति कारोबार और परिवारों को लंबी अवधिक के निवेश निर्णय लेने में सक्षम बनाकर सतत विकास की नींव को मजबूती प्रदान करती है।
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गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक साक्षात्कार में बताया कि लचीली मुद्रास्फीति और लक्ष्यीकरण नीति के तहत मुद्रास्फीति को नियंत्रण करना आरबीआई की पहली जिम्मेदारी बनी हुई है। यह दोनो एक दूसरे के विरोधी नहीं है बल्कि एक दूसरे का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा वैश्विक अनिश्चतताओं के बाद भी भारत के व्यापक आर्थिक आधारभूत सिद्धांत मजबूत बने हुए हैं। केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि मजबूत मौद्रिक, राजकोषीय और औद्योगिक नीतियों के चलते चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि होगी। लेकिन भू-राजनीतिक तनावों जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मॉनसून से जुड़ी अनिश्चतताओं से उत्पन्न होने वाले चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में है।

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मुद्रास्फीति और कीमतों में उतार-चढ़ाव पर आरबीआई की नजर

उन्होंने मौद्रिक नीति पर बोलते हुए कहा कि आरबीआई उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति के मुख्य आंकड़ो से परे जाकर नीतिगत निर्णय लेने से पहले इसकी संरचना पर बारीकी से नजर रखता है। जिसमें मूल मुद्रास्फीति और मूल्य दबावों से उत्पन्न होने वाले कारक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा हमार लक्ष्य सीपीआई मुद्रास्फीति है, लेकिन हम इसकी संरचना, मूल मुद्रास्फीति और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारणों पर बारीकी की जांच करते हैं और नजर बनाए रखते हैं। 

सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि अच्छी बनी हुई है

गवर्नर ने ऋण वृद्धि पर बोलते हुए कहा, सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि व्यापक स्तर पर बनी रही है। जून में कुल बैंक ऋण सालाना आधार पर लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं क्षेत्रिय आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि क्षेत्र में ऋण वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत, उद्योग में 17 प्रतिशत, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में 24 से 25 प्रतिशत, अवसंरचना क्षेत्र में 11 से 12 प्रतिशत और आवास क्षेत्र में 11 प्रतिशत रही। गोल्ड लोन के बारे में बोलते हुए कहा कि इसमें तेजी से विस्तार देखा जा रहा है, लेकिन आरबीआई को किसी विशेष क्षेत्र में तत्काल कोई चिंता दिखाई नहीं दे रही है।

 हम सभी क्षेत्रों, बैकों और विनियमित संस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। इसलिए हमने फिलहाल किसी क्षेत्र में किसी भी तरह का कोई जोखिम नहीं दिखाई दे रहा है। गवर्नर ने कहा वित्तीय क्षेत्र पूरी तरह से स्थिर बने हुए हैं। भारतीय बैंक पर्याप्त पूंजी है। जिसमें पूंजी पर्याप्तता 17 प्रतिशत से अधिक है और तरलता कवरेज का अनुपात लगभग 120 प्रतिशत है।

रुपया वैश्विक मुद्राओं की तुलना स्थिर

गवर्नर मल्होत्रा ने रुपये की गिरावट पर कहा, कि भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलल के हाल की मजबूती की बाद भी भारतीय मुद्रा वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि हाल में सरकार द्वारा उठाय एक कदमों से जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर कर छूट, लंबी अवधिक के सॉवरेन बॉन्ड के लिए फुल एक्सेसिबल रूट का विस्तार और सेवा निर्यात सहित प्रेषण प्रवाह में लगातार मजबूती शामिल है। यह भारत के बाहरी क्षेत्र को समर्थन देंगे।

चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान एफडीआई 7 अरब डॉलर रहा

उन्होंने ने बताया कि पिछले साल लभग 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) रहा और चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों के दौरान शुद्ध एफीडीआई प्रवाह लगभग 7 अरब डॉलर रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से निर्यात को बढ़ावा मिलने और समय के साथ चालू खाता मजबूत होने की संभाचना है।  

डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर चिंताओं दूर कर रहे है

उन्होंने डिजिटल धोखाधड़ी को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बारे में कहा कि आरबीआई लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और सक्रिय और पूर्व निवारक हस्तक्षेप पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए अपने पर्यवेक्षी ढांचे को मजबूत किया है। उन्होंने जनवरी 2027 से लागू होने वाले सीमित देखता ढांचे के बारे में बताते हुए कहा, कि इस के तहत ग्राहकों को कम मूल्य की डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी ने निर्देशित मामलों में 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिलेगा।


 
आर्टिफिशियल इंटलिजेंस (एआई) के बारे में मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ने बैंको को ग्राहक सेवा में सुधार, परिचालन लागत को कम करने और फैसले लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एआई अपनाने को प्रोत्साहित किया है। साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित किया है। वहीं रिटेल निवेशकों के लिए उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड और अन्य बाजार से जुड़े उत्पादों में बढ़ती भागीदारी स्वस्थ विविधिकरण को दर्शाती है।

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