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Report: भारत के युवाओं में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने की क्षमता, जरूरी कौशल में कमी सबसे बड़ी चुनौती

Tue, 15 Jul 2025 01:19 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 15 Jul 2025 01:19 PM IST
सार

क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक श्रम बाजार विरोधाभास से गुजर रहा है। इस स्थिति में भारत के पास वैश्विक रोजगार का केन्द्र बनने का सुनहरा मौका है।भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है लेकिन देश अल्प योग्यता और व्यापक कौशल अंतराल की चुनौतियों का सामना कर रहै है। 

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India's youth to become the backbone of the global economy, lack of necessary skills is the biggest challenge
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

वैश्विक श्रम बाजार में बदलाव के बीच भारत रोजगार का केंद्र बन सकता है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कई देशों में वृद्ध होती आबादी के कारण अर्थव्यवस्थाओं में कुशल श्रमिकों की मांग बढ़ रही है और व्यवसाय डिजिटीलकरण को अपना रहे हैं।

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विरोधाभास से गुजर रहा वैश्विक श्रम बाजार
इसमें कहा गया कि वैश्विक श्रम बाजार विरोधाभासी स्थिति से गुजर रहा है। जहां कुछ देशों में बेरोजगारी बढ़ रही है, वहीं दुनिया भर में कई नियोक्ताओं को कुशल श्रमिकों को खोजने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस विरोधाभास का मुख्य कारण तेजी से बढ़ता जनसांख्यिकीय अंतर है। उच्च आय वाले देशों में जन्म दर में लगातार गिरावट और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण जनसंख्या तेजी से वृद्ध हो रही है। इसके परिणामस्वरूप कार्यशील जनसंख्या में वृद्ध लोगों का निर्भरता अनुपात बहुत अधिक हो गया है। इससे कौशल की कमी और भी अधिक बढ़ गई है। 
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उभरती अर्थव्यवस्थाओं के पास सुनहरा अवसर 
दूसरी तरफ, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जनसांख्यिकीय विस्तार हो रहा है। वहां कार्यबल में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय कोष मुद्रा के विश्व आर्थिक परिदृश्य के अनुसार, 2050 तक इन देशों से वैश्विक कार्यबल में लगभग दो-तिहाई योगदान मिलने की उम्मीद है।

भारत की 65 प्रतिशत आबादी की उम्र 35 वर्ष से कम 
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जिससे देश को वैश्विक कौशल संकट को दूर करने का एक विशेष अवसर मिला है। भारत न केवल अतिरिक्त श्रमबल उपलब्ध करा सकता है, बल्कि उच्च आय वाले देशों में प्रतिभा की कमी को भी पूरा कर सकता है।




भारतीय श्रम बाजार गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा
हालांकि, क्रिसिल की रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत का श्रम बाजार गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, विशेष रूप से अल्प योग्यता और व्यापक कौशल अंतराल के रूप में। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, भारत में स्नातक पास किए हुए लोगों में से आधे से भी कम को पूरी तरह से रोजगारयोग्य माना जाता है। इसके अलावा, देश की कार्यशील आबादी में केवल 4.4 प्रतिशत ने ही औपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस का सुझाव 
इससे यह संकेत मिलता है कि विशाल कार्यबल होने के बावजूद, अपर्याप्त कौशल विकास का मुद्दा देश में एक समस्या बन गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपने कौशल विकास तंत्र में संरचनात्मक कमियों को तत्काल दूर करना होगा। ऐसा करके, देश न केवल घरेलू रोजगार और उत्पादकता में सुधार कर सकता है, बल्कि वैश्विक कौशल की कमी को भी दूर करने में योगदान दे सकता है।

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