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व्यापार समझौते पर कैसे माना अमेरिका: कभी टैरिफ का राजा कहा, कभी दी रूस से तेल न खरीदने की धमकी; कब क्या हुआ?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 03 Feb 2026 02:18 PM IST
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सार
भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते तक पहुंचने में कितना समय लगा? दोनों देशों के बीच डील को लेकर चर्चाएं कब से शुरू हुईं? इस बातचीत के बीच कब-कब ट्रंप के रवैये का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ा? दोनों के बीच किस मुद्दे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी? इसके अलावा अब कैसे दोनों के बीच सहमति हुई है? आइये जानते हैं...
भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की टाइमलाइन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच आखिरकार एक व्यापार समझौते पर सहमति बन गई है। बीते एक साल से दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर चर्चाएं जारी थीं। हालांकि, एक समग्र व्यापार समझौते को अंतिम स्वरूप नहीं दिया जा सका था। हालांकि, 2 फरवरी (सोमवार) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिका तत्काल प्रभाव से भारत पर लगाए गए कुल 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी पर ला रहा है। उनके इस पोस्ट के बाद यह तय हो गया कि दोनों देशों ने व्यापार समझौते पर सहमति जता दी है और जल्द ही इसकी शर्तों का खुलासा किया जा सकता है।
इस ट्रेड डील को लेकर अभी भी कई सवाल हैं। हालांकि, यह जानना अहम है कि आखिर भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते तक पहुंचने में कितना समय लगा? दोनों देशों के बीच डील को लेकर चर्चाएं कब से शुरू हुईं? इस बातचीत के बीच कब-कब ट्रंप के रवैये का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ा? दोनों के बीच किस मुद्दे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी? इसके अलावा अब कैसे दोनों के बीच सहमति हुई है? आइये जानते हैं...
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इस ट्रेड डील को लेकर अभी भी कई सवाल हैं। हालांकि, यह जानना अहम है कि आखिर भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते तक पहुंचने में कितना समय लगा? दोनों देशों के बीच डील को लेकर चर्चाएं कब से शुरू हुईं? इस बातचीत के बीच कब-कब ट्रंप के रवैये का असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ा? दोनों के बीच किस मुद्दे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी? इसके अलावा अब कैसे दोनों के बीच सहमति हुई है? आइये जानते हैं...
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कब शुरू हुई दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर चर्चा, समझौते में कितना समय लगा?
अमेरिका में नवंबर 2024 को राष्ट्रपति चुनाव नतीजों का एलान होने के बाद से ही यह तय हो गया कि 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे तो उनके एजेंडे के केंद्र में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन और अलग-अलग देशों से व्यापार समझौता रहेगा। इस संभावना को देखते हुए भारत ने सबसे पहले ट्रंप प्रशासन से बातचीत के लिए एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल का गठन कर दिया। खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13-14 फरवरी को अमेरिका जाकर ट्रंप से मिलने वाले पहले कुछ राष्ट्राध्यक्षों में शामिल हुए।
ये भी पढ़ें: टैरिफ क्या है और देश इसे एक दूसरे पर क्यों लगाते हैं? भारत अमेरिका डील के बाद हर किसी के लिए समझना जरूरी
इस दौरान भारत की तरफ से अमेरिकी ऊर्जा और हथियार खरीदने को लेकर सहमति जताई। मार्च आते-आते तो भारत ने द्विपक्षीय वार्ता की कोशिशें शुरू कर दीं और इसके तहत वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल के साथ वॉशिंगटन पहुंचे।
अमेरिका में नवंबर 2024 को राष्ट्रपति चुनाव नतीजों का एलान होने के बाद से ही यह तय हो गया कि 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप जब राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे तो उनके एजेंडे के केंद्र में मेक अमेरिका ग्रेट अगेन और अलग-अलग देशों से व्यापार समझौता रहेगा। इस संभावना को देखते हुए भारत ने सबसे पहले ट्रंप प्रशासन से बातचीत के लिए एक व्यापार प्रतिनिधिमंडल का गठन कर दिया। खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13-14 फरवरी को अमेरिका जाकर ट्रंप से मिलने वाले पहले कुछ राष्ट्राध्यक्षों में शामिल हुए।
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इस दौरान भारत की तरफ से अमेरिकी ऊर्जा और हथियार खरीदने को लेकर सहमति जताई। मार्च आते-आते तो भारत ने द्विपक्षीय वार्ता की कोशिशें शुरू कर दीं और इसके तहत वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल के साथ वॉशिंगटन पहुंचे।
हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद आगे जो हुआ, उससे दोनों देशों के बीच न सिर्फ व्यापार समझौते में रोड़े अटके, बल्कि भारत पर अमेरिका ने पहले व्यापार घाटे को देखते हुए 25 फीसदी आयात शुल्क और फिर रूस से तेल खरीदने के एवज में 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया। यानी भारत पर अमेरिका का कुल 50 फीसदी टैरिफ प्रभावी हुआ, जो कि 2 फरवरी 2026 को हटा है। यानी दोनों देशों के बीच करीब एक साल तक व्यापार समझौते पर चर्चा जारी रही है।
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क्या रहा व्यापार समझौते पर बातचीत का घटनाक्रम?
भारत को टैरिफ किंग बुलाने से लेकर 26 फीसदी टैरिफ लगाने तक
1. ट्रंप की शिकायतें, भारत ने उठाए दूर करने के कदमडोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद से ही भारत को टैरिफ किंग के तौर पर संबोधित करना शुरू किया। उनका आरोप था कि अमेरिका ने भारत के अधिकतर उत्पादों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाता, जबकि भारत उसके उत्पादों पर 100 से 150 फीसदी तक टैरिफ वसूलता है।
इस बीच भारत की तरफ से ट्रंप की इन शिकायतों को दूर करने की कोशिशें शुरू कर दी गई। इसका पहला संकेत भारत के 2025 में पेश हुए बजट में दिखा, जिसमें भारत ने करीब दो दर्जन उत्पादों पर आयात शुल्क को कम कर दिया। इनमें 1600 सीसी से ज्यादा की मोटरसाइकिलों पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करने का एलान शािल था। इसके अलावा सरकार ने बॉर्बन व्हिस्की पर भी टैक्स को 150 प्रतिशत से घटाकर 50 फीसदी तक ला दिया। इसका भारत के घरेलू उद्योग में काफी विरोध भी हुआ।
2. कृषि उत्पादों पर टैरिफ को लेकर मतभेद, 26% टैरिफ का एलान
भारत की तरफ से अमेरिका से सुलह की शुरुआती कोशिशों के बावजूद ट्रंप प्रशासन की कृषि उत्पादों पर भारत के उच्च टैरिफों को लेकर शिकायत जारी रही। अमेरिका का आरोप था कि भारत उसके खाद्य तेल, सेब, बाइक, गाड़ियों, फूलों, कॉफी, आदि पर भारी टैरिफ लगाता है। इतना ही नहीं भारत दूसरे देशों के दूध और मत्स्य उत्पादों के आयात को भी विनियमित करता है। आखिरकार 2 अप्रैल को ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 26 फीसदी का जवाबी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया। इतना ही नहीं अन्य देशों पर भी पारस्परिक टैरिफ लगाया गया। ट्रंप ने इसे 'लिबरेशन डे' कह कर प्रचारित किया।
हालांकि, इस दौरान भी भारत को व्यापार में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ काफी राहत मिली, क्योंकि इस दौरान अमेरिका ने चीन पर 54 फीसदी, वियतनाम पर 46 फीसदी, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत और थाईलैंड पर 36 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। दूसरी तरफ इंडोनेशिया पर 19 फीसदी जापान पर 24 फीसदी और दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ का एलान हुआ था। यानी भारत इन सभी निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले प्रतियोगिता में बना हुआ था।
भारत की तरफ से अमेरिका से सुलह की शुरुआती कोशिशों के बावजूद ट्रंप प्रशासन की कृषि उत्पादों पर भारत के उच्च टैरिफों को लेकर शिकायत जारी रही। अमेरिका का आरोप था कि भारत उसके खाद्य तेल, सेब, बाइक, गाड़ियों, फूलों, कॉफी, आदि पर भारी टैरिफ लगाता है। इतना ही नहीं भारत दूसरे देशों के दूध और मत्स्य उत्पादों के आयात को भी विनियमित करता है। आखिरकार 2 अप्रैल को ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 26 फीसदी का जवाबी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया। इतना ही नहीं अन्य देशों पर भी पारस्परिक टैरिफ लगाया गया। ट्रंप ने इसे 'लिबरेशन डे' कह कर प्रचारित किया।
हालांकि, इस दौरान भी भारत को व्यापार में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के खिलाफ काफी राहत मिली, क्योंकि इस दौरान अमेरिका ने चीन पर 54 फीसदी, वियतनाम पर 46 फीसदी, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत और थाईलैंड पर 36 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। दूसरी तरफ इंडोनेशिया पर 19 फीसदी जापान पर 24 फीसदी और दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ का एलान हुआ था। यानी भारत इन सभी निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले प्रतियोगिता में बना हुआ था।
3. टैरिफ पर 90 दिन की रोक, पर भारत-अमेरिका के रिश्ते खराब
अमेरिकी सरकार ने लिबरेशन डे टैरिफ में 90 दिन के लिए रोक लगाने का एलान किया, ताकि अन्य देश उसके साथ व्यापार समझौते पर मुहर लगा सकें। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच इस दौरान समझौते पर बात नहीं बन सकी।
दरअसल, यह वह समय था जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंचा। 26 अप्रैल को पहलगाम पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7-8 मई को आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। 10 मई को पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने अपनी कार्रवाई को विराम दिया। हालांकि, इससे पहले कि भारत इसका एलान कर पाता, ट्रंप ने घोषणा कर दी कि उन्होंने टैरिफ धमकियों के जरिए दोनों देशों को युद्ध रोकने पर मजबूर किया। ट्रंप ने कई और मौकों पर यही दावा दोहराया। हालांकि, भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे किसी भी दावे को नकारा और कहा कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई रोकने का फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर किया और इसमें किसी तीसरे देश का दबाव नहीं था।
अमेरिकी सरकार ने लिबरेशन डे टैरिफ में 90 दिन के लिए रोक लगाने का एलान किया, ताकि अन्य देश उसके साथ व्यापार समझौते पर मुहर लगा सकें। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच इस दौरान समझौते पर बात नहीं बन सकी।
दरअसल, यह वह समय था जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंचा। 26 अप्रैल को पहलगाम पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7-8 मई को आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। 10 मई को पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने अपनी कार्रवाई को विराम दिया। हालांकि, इससे पहले कि भारत इसका एलान कर पाता, ट्रंप ने घोषणा कर दी कि उन्होंने टैरिफ धमकियों के जरिए दोनों देशों को युद्ध रोकने पर मजबूर किया। ट्रंप ने कई और मौकों पर यही दावा दोहराया। हालांकि, भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे किसी भी दावे को नकारा और कहा कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई रोकने का फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर किया और इसमें किसी तीसरे देश का दबाव नहीं था।
माना जाता है कि उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप भारत की निष्पक्ष कूटनीति से खफा हो गए थे। जहां पाकिस्तान ने ट्रंप के इन दावों के बावजूद मौके को लपकते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया, वहीं भारत की तरफ से न तो संघर्ष रुकवाने के लिए अमेरिका को श्रेय दिया, न ही ट्रंप के नाम का जिक्र किया।
अमेरिका ने अप्रैल-मई में 90 दिन के टैरिफ रोक के दौर में कई देशों-संगठनों से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें यूरोपीय संघ, जापान, वियतनाम, आदि शामिल रहे। हालांकि, भारत की तरफ से कोई जल्दबाजी नहीं की गई। इसका असर यह हुआ कि समयसीमा खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 31 जुलाई को भारत पर 25 फीसदी टैरिफ का एलान कर दिया और भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी भी दे डाली।
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अमेरिका ने अप्रैल-मई में 90 दिन के टैरिफ रोक के दौर में कई देशों-संगठनों से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें यूरोपीय संघ, जापान, वियतनाम, आदि शामिल रहे। हालांकि, भारत की तरफ से कोई जल्दबाजी नहीं की गई। इसका असर यह हुआ कि समयसीमा खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 31 जुलाई को भारत पर 25 फीसदी टैरिफ का एलान कर दिया और भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी भी दे डाली।
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उस दौर में विश्लेषकों का साफ कहना था कि ट्रंप भारत से नाराज हैं, क्योंकि भारत सरकार की तरफ से न तो पाकिस्तान से संघर्ष रुकवाने और न ही नोबेल के लिए उनके नाम को आगे बढ़ाने के लिए भारत ने कोई बयान दिया। 7 अगस्त को ट्रंप ने भारत पर कुल टैरिफ को 50 फीसदी तक बढ़ा दिया। गौरतलब है कि रूस में यह किसी भी अमेरिकी व्यापार भागीदार पर लगाया गया सबसे अधिक टैरिफ था। इससे दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव पैदा हो गया। भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए जीएसटी समेत कई आर्थिक-वाणिज्यिक नीतियों में बदलाव किए। इसका असर भारत में बढ़ती खपत पर भी दिखा।
भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगने के बाद क्या रहा घटनाक्रम?
