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कपड़े, आभूषण और...?: ट्रंप टैरिफ के 50% से 18% होने का क्या नतीजा, किस सेक्टर पर अब कितना असर; कौन बेअसर

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 03 Feb 2026 06:36 PM IST
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सार

ट्रंप के टैरिफ 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी पर आने का क्या असर होगा?
देश के किन-किन सेक्टर्स को इससे फायदा होने की उम्मीद है? कौन से क्षेत्र पहले ही ट्रंप के टैरिफ के असर से सुरक्षित थे? अमेरिका में भारतीय उत्पादों के आयात शुल्क कम होने से क्या होगा? आइये जानते हैं...

US President Donald Trump 50 percent Tariff India Exports Sector affected Electronics Gems Jewellery Textile
भारत-अमेरिका के बीच सबसे ज्यादा व्यापार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका और भारत के बीच एक साल लंबी वार्ता के बाद आखिरकार एक व्यापार समझौते पर मुहर लग गई है। फिलहाल इस ट्रेड डील की शर्तें सामने नहीं रखी गई है। यानी यह साफ नहीं है कि अमेरिका किस तरह से और किस सेक्टर को टैरिफ से कितनी राहत देने वाला है। हालांकि, यह साफ है कि भारत पर लगे कुल 50 फीसदी टैरिफ में से 25 फीसदी टैरिफ, जो कि भारत पर रूस से तेल खरीदने के एवज में लगाया गया था वह अब हट चुका है। दूसरी तरफ व्यापार घाटे को कम करने के लिए लगाया गया 25 फीसदी आयात शुल्क भी अब 18 फीसदी पर लाया गया है। यानी इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को व्यापार में अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले काफी मदद मिलेगी।  
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर ट्रंप के टैरिफ 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी पर आने का क्या असर होगा? देश के किन-किन सेक्टर्स को इससे फायदा होने की उम्मीद है? कौन से क्षेत्र पहले ही ट्रंप के टैरिफ के असर से सुरक्षित थे? अमेरिका में भारतीय उत्पादों के आयात शुल्क कम होने से क्या होगा? आइये जानते हैं...
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ट्रंप के टैरिफ 50% से घटकर 18% पर आने का क्या असर?
इस फैसले की बदौलत भारत से निर्यात किए गए जिन उत्पादों पर अमेरिकी उपभोक्ता/कंपनियां पहले 50 प्रतिशत तक टैरिफ चुकाती थीं, अब वे 18 फीसदी टैरिफ ही चुकाएंगी। इसका असर यह होगा कि भारतीय उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में कम होगी और इनका उपभोग, जो पहले कुछ कम हुआ था, वह वापस अपने पुराने स्तर पर लौटेगा। लंबी अवधि में भारत इन टैरिफ के जरिए अपने व्यापारिक प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले लाभ की स्थिति में रहेगा, क्योंकि दूसरे देशों के मुकाबले अमेरिकी नागरिक भारतीय उत्पादों को ज्यादा तरजीह दे सकते हैं।

ये भी पढ़ें: अमेरिका ने भारत पर लगा टैरिफ घटाया: PM मोदी और ट्रंप की बातचीत के बाद बड़ा फैसला, अब 25 की जगह 18% होगा शुल्क

भारत-अमेरिका के बीच व्यापार के आंकड़े क्या?

भारत के किन क्षेत्रों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका?
हमारे टेक्सटाइल, आभूषण और रत्न, कृषि और कुछ अन्य सेक्टर पर इस टैरिफ के कम होने का असर दिख सकता है। 


 

27 अगस्त को लगने वाले 25 फीसदी अतरिक्त टैरिफ (रूस से तेल खरीदने के लिए) के बाद यह बढ़कर 150 रुपये के हो गए। यही स्थिति अलग-अलग सेक्टर्स के उत्पादों की रही। हालांकि, अब रूस से तेल खरीदने के लिए लगने वाले टैरिफ को पूरी तरह हटा दिया गया है। वहीं, व्यापार घाटे को कम करने के लिए लगने वाला टैरिफ भी कम हुआ है। यानी भारतीय निर्यातकों को फायदा मिलना शुरू होगा।

ये भी पढ़ें: व्यापार समझौते पर कैसे माना अमेरिका: कभी टैरिफ का राजा कहा, कभी दी रूस से तेल न खरीदने की धमकी; कब क्या हुआ?

1. टेक्सटाइल
भारत के कपड़ा उद्योग के निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका पर निर्भर रहा है। दरअसल, टैरिफ लागू होने से पहले तक भारत से होने वाला कुल टेक्सटाइल निर्यात का 28 फीसदी अकेले अमेरिका को जाता था। इसकी कुल कीमत 10.3 अरब डॉलर से ज्यादा है। टैरिफ दरें बढ़कर 50 फीसदी होने से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत ही हुआ था, क्योंकि अमेरिका में आयातकों पर भारतीय कपड़े खरीदने के लिए ज्यादा कीमत देनी पड़ रही थी। वहीं वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देशों को कम टैरिफ का फायदा मिला। वियतनाम पर अमेरिका 19 फीसदी टैरिफ लगा रहा है, वहीं इंडोनेशिया पर ट्रंप ने 20 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसी तरह बांग्लादेश और कंबोडिया के ऊपर भी टैरिफ दर 20 फीसदी से कम है।

इस लिहाज से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को अमेरिकी टैरिफ के चलते प्रतियोगिता में नुकसान हुआ। अमेरिका के टैरिफ का असर यह हुआ था कि भले ही भारत का निर्यात लगभग उतना ही रहा, लेकिन कपड़ों के आयात में जो खर्च अमेरिकी आयातकों पर बढ़ा था, उसे भारतीय उद्योग को भी साझा करना पड़ रहा था। इतना ही नहीं कुछ मौकों पर तो भारतीय कपड़ा उद्योग को अपने उत्पादों की कीमत स्रोत पर ही घटानी पड़ रही थी। यानी पहले जो टीशर्ट 1000 रुपये में बनाकर भेजी जाती थी, उसे भारतीय निर्यातक कम कीमतों में अमेरिका भेज रहे थे, ताकि अपने अमेरिकी बाजार को बचाया जा सके।
 

2. रत्न-आभूषण
भारत के रत्न और आभूषण से जुड़े सेक्टर पर भी अमेरिकी टैरिफ का काफी ज्यादा प्रभाव पड़ा था। इस सेक्टर से अमेरिका को हर वर्ष 12 अरब डॉलर का निर्यात करता है। पहले भारत से निर्यात होने वाले पॉलिश्ड हीरों पर अमेरिका जीरो ड्यूटी लगाता था। वहीं, सोने और प्लैटिनम ज्वैलरी पर 5-7 प्रतिशत और चांदी की ज्वैलरी पर 5-13.5 फीसदी तक टैरिफ लगता था। हालांकि, टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंचने से भारतीय रत्न-आभूषण से जुड़े सेक्टर्स को बड़ा नुकसान हुआ। गुजरात में डायमंड हब के नाम से मशहूर सूरत में तो स्थिति यह थी कि यहां काम करने वाले कई लोगों की नौकरी जाने तक की खबरें आईं।

3. कृषि उत्पाद
भारत की ओर से अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर से ज्यादा के कृषि उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। बड़े निर्यातों में से मरीन उत्पाद, मसाले, डेयरी उत्पाद, चावल, आयुष और हर्बल उत्पाद, खाद्य तेल, शक्कर और ताजा सब्जियां और फल भी निर्यात इसमें शामिल है। ट्रंप के टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत की सीफूड इंडस्ट्री यानी मरीन उत्पादों पर पड़ा है। हालांकि, अब टैरिफ 18 फीसदी तक आने से भारत को फायदा हो सकता है। 

4. …और किन-किन सेक्टर्स पर असर पड़ने की आशंका
इन सेक्टर्स के अलावा चमड़ा और फुटवियर उद्योग से अमेरिका को हर वर्ष 1.18 अरब, केमिकल उद्योग 2.34 अरब और इलेक्ट्रिक और मशीनरी उद्योग 9 अरब डॉलर का निर्यात करता है।  

कौन से सेक्टर ट्रंप के टैरिफ का असर नहीं?

1. इलेक्ट्रॉनिक्स
भारत का इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर अमेरिका को सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला सेक्टर है। बीते कुछ वर्षों में भारत स्मार्टफोन्स से लेकर लैपटॉप, सर्वर और टैबलेट्स के मामले में अमेरिका का सबसे बड़ा निर्यातक बना है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने गुरुवार को सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका में इस सेक्टर पर आयात शुल्क लगाने के लिए उसे सेक्शन 232 की समीक्षा करनी पड़ेगी। यानी इस सेक्टर को अमेरिकी टैरिफ से राहत मिली थी। 

2. फार्मा
भारत के फार्मा सेक्टर के लिए अमेरिका सबसे बड़ा गंतव्य है। रिपोर्ट्स की मानें तो भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 10.5 अरब डॉलर का रहा है। यानी भारत के कुल फार्मा निर्यात का करीब 40 फीसदी हिस्सा अमेरिका को ही जाता है। भारत के इस सेक्टर को तब ट्रंप के टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। 


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