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उद्योग जगत को बजट से क्या उम्मीद: उत्पादन से निवेश तक के लिए क्या जरूरी, जलवायु परिवर्तन पर कितना ध्यान?
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: नविता स्वरूप
Updated Sat, 31 Jan 2026 08:30 PM IST
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सार
बजट 2026 में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देते हुए, इस बजट में सीमा शुल्क को आसान करने के साथ उपभोग बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में क्रेडिट बढ़ोतरी, फार्मा और हेल्थ केयर के लिए रिसर्च और इनोवेशन सहयोग के साथ एमएसएमई इकाइयों ने उत्पादन लागत को कम करने और ऋण की पहुंच को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।
बजट 2026।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय बजट 2026-27 में पेश होने जा रहा है। ऐसे में सभी उद्योग अपने-अपने क्षेत्र के लिए कुछ न कुछ घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। हाल में यूरोपीय संघ (ईयू), ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों के साथ व्यापार समझौते हुए हैं, जो इस बात के संकेत देते हैं कि सरकार निर्यात बाजार का विस्तार करने पर काम कर रही है। साथ ही किसी एक अर्थव्यवस्था पर निर्भरता को कम करने पर जोर दे रही है।
जेमएम फाइनेशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देते हुए, इस बजट में सीमा शुल्क के युक्तिकरण के साथ ही उपभोग बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। यह बजट खपत और पूंजीगत व्यय की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने वाला होगा। जानकारों का कहना है इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, हेल्थ केयर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेवाओं वाले तेजी से विकास करने वाले क्षेत्रों के लिए भी समर्थित घोषणा हो सकती हैं।
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जेमएम फाइनेशियल की रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देते हुए, इस बजट में सीमा शुल्क के युक्तिकरण के साथ ही उपभोग बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। यह बजट खपत और पूंजीगत व्यय की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने वाला होगा। जानकारों का कहना है इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, हेल्थ केयर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेवाओं वाले तेजी से विकास करने वाले क्षेत्रों के लिए भी समर्थित घोषणा हो सकती हैं।
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नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां: ग्रामीण-कम आय वाले लोगों को अधिक क्रेडिट सप्लाई हो
मुथुट फिनकॉर्प लिमिटेड के सीईओ शाजी वर्गीस कहते हैं, "हम भारत में ग्रामीण और कम आय वाले लोगों को क्रेडिट सप्लाई के लिए बजट में कुछ कदम उठाने की सलाह देते रहे हैं। केंद्रीय बजट 2026 में गोल्ड लोन एनबीएफसी के लिए शाखाएं खोलने के नियमों को सरकार आसान बना सकती है। विशेषकर ऐसे गोल्ड लेने के लिए जो सुरक्षित हों और जिनमें कम रिस्क होता है। साथ ही एनबीएफसी के जरिए गोल्ड लोन के लिए कैपिटल रिस्क वेट को सही करने की जरूरत है, जिसमें लोन देने की लागत कम हो और ग्रामीण और सेमी-अर्बन मार्केट में अधिक क्रेडिट फ्लो हो सके।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की तरह ही एनबीएफसी के लिए SARFAESI (वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा सुरक्षा हित के प्रवर्तन) को लागू करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे गांवों में हाउसिंग क्रेडिट बढ़ाने और छोटे टिकट साइज वाले मॉटर्गेज लोन के लिए रिकवरी सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिल सके। साथ ही पॉलिसी रिफॉर्म्स को बढ़ावा देकर सोने पर कर्ज को मुख्य धारा में लाने पर जोर देना चाहिए, ताकि सक्रिय गैर-औपचारिक चैनल्स विनियमित संस्थानों में बदल सकें और उपभोक्ता सुरक्षा मजबूत हो सके।
फ्यूजन फाइनेंस के एमडी और सीईओ संजय गैरयाली कहते हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम उपभोक्ता तक ऋण सुविधाओं को पहुंचाना, महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे उद्योगों और नए उद्यमियों तक मजबूत क्रेडिट डिलीवरी को मजबूत बनाने के लिए उपायों की घोषणाओं की उम्मीद बजट से हैं।"
मुथुट फिनकॉर्प लिमिटेड के सीईओ शाजी वर्गीस कहते हैं, "हम भारत में ग्रामीण और कम आय वाले लोगों को क्रेडिट सप्लाई के लिए बजट में कुछ कदम उठाने की सलाह देते रहे हैं। केंद्रीय बजट 2026 में गोल्ड लोन एनबीएफसी के लिए शाखाएं खोलने के नियमों को सरकार आसान बना सकती है। विशेषकर ऐसे गोल्ड लेने के लिए जो सुरक्षित हों और जिनमें कम रिस्क होता है। साथ ही एनबीएफसी के जरिए गोल्ड लोन के लिए कैपिटल रिस्क वेट को सही करने की जरूरत है, जिसमें लोन देने की लागत कम हो और ग्रामीण और सेमी-अर्बन मार्केट में अधिक क्रेडिट फ्लो हो सके।
उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की तरह ही एनबीएफसी के लिए SARFAESI (वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण तथा सुरक्षा हित के प्रवर्तन) को लागू करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिससे गांवों में हाउसिंग क्रेडिट बढ़ाने और छोटे टिकट साइज वाले मॉटर्गेज लोन के लिए रिकवरी सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिल सके। साथ ही पॉलिसी रिफॉर्म्स को बढ़ावा देकर सोने पर कर्ज को मुख्य धारा में लाने पर जोर देना चाहिए, ताकि सक्रिय गैर-औपचारिक चैनल्स विनियमित संस्थानों में बदल सकें और उपभोक्ता सुरक्षा मजबूत हो सके।
फ्यूजन फाइनेंस के एमडी और सीईओ संजय गैरयाली कहते हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम उपभोक्ता तक ऋण सुविधाओं को पहुंचाना, महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे उद्योगों और नए उद्यमियों तक मजबूत क्रेडिट डिलीवरी को मजबूत बनाने के लिए उपायों की घोषणाओं की उम्मीद बजट से हैं।"
फार्मा और हेल्थ केयर सेक्टर: इनोवेशन के लिए पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट मिले
बायर फार्मास्यूटिकल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर इंडिया और कंट्री डिवीजन हेड साउथ एशिया- श्वेता राय कहती हैं, "हम केंद्रीय बजट 2026 से यह उम्मीद करते हैं कि फार्मास्युटिकल के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन के लिए पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट और मजबूत होगा और यह रफ्तार बनी रहेगी। बीमारियों के बढ़ने के साथ ही स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट के जरिए मदद दी जाएगीष जल्दी डायग्नोसिस और लंबे समय तक बीमारी के मैनेजमेंट के लिए यह सहायता आवश्यक होगी। लगातार पब्लिक हेल्थ में निवेश जैसे किफायती इलाज को बेहतर बनाने वाले उपाय और साइंटिफिक तरक्की से मरीजों के लिए इलाज को बेहतर करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार आने वाले साल में भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए इन कदमों को आगे बढ़ाएगी।
वे कहती हैं, पिछले साल के बजट में मरीजों की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में तरक्की के संकेत दिए थे, विशेषकर जीवन रक्षक वाली दवाओं पर ड्यूटी में छूट और मेडिकल एजुकेशन में बढ़ोतरी के जरिए यह दिखाई दिया था। यह बढ़ोतरी पब्लिक हेल्थकेयर खर्च में लगातार वृद्धि में भी दिखाई दी है। पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य खर्च में सरकारी स्वास्थ्य खर्च का हिस्सा बढ़ा है।
बायर फार्मास्यूटिकल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर इंडिया और कंट्री डिवीजन हेड साउथ एशिया- श्वेता राय कहती हैं, "हम केंद्रीय बजट 2026 से यह उम्मीद करते हैं कि फार्मास्युटिकल के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन के लिए पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट और मजबूत होगा और यह रफ्तार बनी रहेगी। बीमारियों के बढ़ने के साथ ही स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स और हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट के जरिए मदद दी जाएगीष जल्दी डायग्नोसिस और लंबे समय तक बीमारी के मैनेजमेंट के लिए यह सहायता आवश्यक होगी। लगातार पब्लिक हेल्थ में निवेश जैसे किफायती इलाज को बेहतर बनाने वाले उपाय और साइंटिफिक तरक्की से मरीजों के लिए इलाज को बेहतर करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार आने वाले साल में भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए इन कदमों को आगे बढ़ाएगी।
वे कहती हैं, पिछले साल के बजट में मरीजों की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में तरक्की के संकेत दिए थे, विशेषकर जीवन रक्षक वाली दवाओं पर ड्यूटी में छूट और मेडिकल एजुकेशन में बढ़ोतरी के जरिए यह दिखाई दिया था। यह बढ़ोतरी पब्लिक हेल्थकेयर खर्च में लगातार वृद्धि में भी दिखाई दी है। पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य खर्च में सरकारी स्वास्थ्य खर्च का हिस्सा बढ़ा है।
पॉलीगॉन फाउंडेशन के संस्थापक और ब्लॉकचेन फॉर इम्पैक्ट के सीईओ और सह-संस्थापक (बीएफआई) संदीप नेलवाल कहते हैं, "आम बजट 2025 में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च) को 3,900.69 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसने भारत के हेल्थ रिसर्च इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। हमारे सामने बजट 2026 में सरकारी फंड के इस्तेमाल से निजी पूंजी, जन कल्याण और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का शानदार अवसर है। भारत के विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के संदर्भ में शोध एवं विकास की भूमिका केंद्रीय है।
इसलिए हेल्थकेयर सेक्टर की मांग है कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग या नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत हेल्थकेयर के कुल खर्च का 2-5 प्रतिशत हिस्सा उद्योग-अकादमिक सहयोगी अनुसंधान, जन कल्याण समर्थित क्लिनिकल और अनुवादक अनुसंधान तथा स्टार्टअप की अगुवाई में स्वास्थ्य नवाचार कार्यक्रमों के लिए समर्पित किया जाए। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में हेल्थकेयर या इनोवेशन फंडिंग के 1-2 फीसदी के माध्यम से समर्थित एक मिशन-मोड हेल्थ डीप टेक इनोवेशन प्रोग्राम शुरू किया जा सकता है, जो विकास के लंबों चक्रों को छोटा करेगा और भारत में हेल्थकेयर स्टार्टअप को बढ़ाने की गति तेज करेगा।
इसलिए हेल्थकेयर सेक्टर की मांग है कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग या नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत हेल्थकेयर के कुल खर्च का 2-5 प्रतिशत हिस्सा उद्योग-अकादमिक सहयोगी अनुसंधान, जन कल्याण समर्थित क्लिनिकल और अनुवादक अनुसंधान तथा स्टार्टअप की अगुवाई में स्वास्थ्य नवाचार कार्यक्रमों के लिए समर्पित किया जाए। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में हेल्थकेयर या इनोवेशन फंडिंग के 1-2 फीसदी के माध्यम से समर्थित एक मिशन-मोड हेल्थ डीप टेक इनोवेशन प्रोग्राम शुरू किया जा सकता है, जो विकास के लंबों चक्रों को छोटा करेगा और भारत में हेल्थकेयर स्टार्टअप को बढ़ाने की गति तेज करेगा।
सूक्ष्म उद्यम और स्टार्टअप्स: प्रोडक्शन लागत कम करने और ऋण की पहुंच बढ़ाने की जरूरत
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के संस्थापक और प्रबंध न्यासी लक्ष्मी वेंकटरमन ने कहा, "साल 2025 के बजट में सूक्ष्म उद्यमों (एमएसएमई) के निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ाई गई थी, साथ ही क्रेडिट गांरटी को पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया। इसके अलावा स्टार्टअप्स और निर्यातकों के लिए अधिक टर्म के लोन की व्यवस्था की गई। महिला उद्यमियों, विशेषकर एससी/एसटी वर्ग की प्रथम पीढ़ी की महिला उद्यमियों को, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, को सरकार की उस योजना से राहत मिली है। ऋण तक बेहतर पहुंच, प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण के लिए लक्षित समर्थन, मशीनरी के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए सीजीएमएसई की शुरुआत और डिजिटल अवसंरचना को निरंतर बढ़ावा देना सूक्ष्म उद्यमों में उद्यमियों को सशक्त बनाने से जुड़े कुछ कदम हैं।
भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के संस्थापक और प्रबंध न्यासी लक्ष्मी वेंकटरमन ने कहा, "साल 2025 के बजट में सूक्ष्म उद्यमों (एमएसएमई) के निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ाई गई थी, साथ ही क्रेडिट गांरटी को पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया। इसके अलावा स्टार्टअप्स और निर्यातकों के लिए अधिक टर्म के लोन की व्यवस्था की गई। महिला उद्यमियों, विशेषकर एससी/एसटी वर्ग की प्रथम पीढ़ी की महिला उद्यमियों को, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, को सरकार की उस योजना से राहत मिली है। ऋण तक बेहतर पहुंच, प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण के लिए लक्षित समर्थन, मशीनरी के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए सीजीएमएसई की शुरुआत और डिजिटल अवसंरचना को निरंतर बढ़ावा देना सूक्ष्म उद्यमों में उद्यमियों को सशक्त बनाने से जुड़े कुछ कदम हैं।
इसके बावजूद कई सूक्ष्म उद्यम औपचारिकता अपनाने से इसलिए हिचकते हैं, क्योंकि उन्हें अनुपालन लागत अधिक लगती है। बढ़ती इनपुट लागत के कारण छोटे व्यवसायों को कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं और कुशल श्रम की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है। खासकर वर्तमान कम उपभोग मांग के दौर में। केंद्रीय बजट 2026 से अधिकांश एमएसएमई आगे विकास की उम्मीद कर रहे हैं, जो डिजिटल अपनाने, कौशल विकास, क्षमता विस्तार तथा कम जीएसटी और 12 लाख रुपये तक आयकर छूट जैसे प्रोत्साहनों से प्रेरित होगा। हालांकि सीजीटीएमएसई के विस्तार से प्रगति हुई है, फिर भी लगभग 30 लाख करोड़ रुपये का ऋण अंतर (क्रेडिट गैप) बना हुआ है। वर्तमान में केवल 16–19 प्रतिशत एमएसएमई की ही औपचारिक ऋण की पहुंच है, जिसे 2028 तक कम से कम 25 प्रतिशत तक बढ़ाना आवश्यक है ताकि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
चैंबर ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड के अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल के मुताबिक, "यह बात सही है कि बढ़ती इनपुट लागत के कारण छोटे व्यवसायों को कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं तथा कुशल श्रम की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है, विशेषकर वर्तमान कम उपभोग मांग के दौर में। इसलिए हम बजट 2026 से प्रोडक्शन लागत को कम करने, कस्टम ड्यूटी को कम करते हुए लॉजिस्टक्स क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर देने की जरूरत है, उम्मीद है कि बजट इस ओर फोकस करेगा।"
चैंबर ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड के अध्यक्ष दीपेन अग्रवाल के मुताबिक, "यह बात सही है कि बढ़ती इनपुट लागत के कारण छोटे व्यवसायों को कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं तथा कुशल श्रम की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन गई है, विशेषकर वर्तमान कम उपभोग मांग के दौर में। इसलिए हम बजट 2026 से प्रोडक्शन लागत को कम करने, कस्टम ड्यूटी को कम करते हुए लॉजिस्टक्स क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर देने की जरूरत है, उम्मीद है कि बजट इस ओर फोकस करेगा।"
घरेलू उत्पादन इकाइयों को आस: उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
एवीआरओ इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा, "घरेलू उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए बजट में सीमा शुल्क को आसान करने के साथ ही उपभोग बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले फैसले लिए जाने की जरुरत है।" सुशील बताते हैं कि प्लास्टिक जैसे उद्योग के लिए प्लास्टिक स्क्रैप पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इंडस्ट्री की मांग है कि इसे घटाकर 0 प्रतिशत या 5 प्रतिशत के स्लैब में लाया जाए। कचरे को प्रोसेस करने वाली मशीनों पर भी टैक्स कम करने की मांग है ताकि छोटे उद्यमी (एमएसएमी) इस क्षेत्र में निवेश कर सकें।
ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीईओ और संयुक्त कार्यकारी अधिकारी मनोज तुलसियान ने कहा, "बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ता व्यापार तनाव और टैरिफ की वजह से जिस तरह से सप्लाई चेन में तेजी से बदलावा आ रहा है, वह उद्योग जगत के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है। इन हालात को देखते हुए बजट में हम औद्योगिक इकोसिस्टम के और मजबूत होने की उम्मीद करते हैं। बड़ी घोषणाओं के बदले बजट में ऐसी नीतियों की घोषणाएं हों, जो लंबे समय तक उद्योग के लिए सहायक बने। उन्होंने कहा कि हम बजट में सस्ते घरों के लिए इंसेंटिव, होम लोन के ब्याज पेमेंट पर टैक्स छूट में वृद्धि और रियल एस्टेट के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने वाली पॉलिसी जारी रखने के पक्षधर हैं। इसके अलावा मेक इन इंडिया के तहत उत्पादों को बढ़ावा देने की उम्मीद करते हैं, जो घरेलू सोर्सिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देते हैं।
एवीआरओ इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा, "घरेलू उत्पादन इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए बजट में सीमा शुल्क को आसान करने के साथ ही उपभोग बढ़ाने और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले फैसले लिए जाने की जरुरत है।" सुशील बताते हैं कि प्लास्टिक जैसे उद्योग के लिए प्लास्टिक स्क्रैप पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इंडस्ट्री की मांग है कि इसे घटाकर 0 प्रतिशत या 5 प्रतिशत के स्लैब में लाया जाए। कचरे को प्रोसेस करने वाली मशीनों पर भी टैक्स कम करने की मांग है ताकि छोटे उद्यमी (एमएसएमी) इस क्षेत्र में निवेश कर सकें।
ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीईओ और संयुक्त कार्यकारी अधिकारी मनोज तुलसियान ने कहा, "बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ता व्यापार तनाव और टैरिफ की वजह से जिस तरह से सप्लाई चेन में तेजी से बदलावा आ रहा है, वह उद्योग जगत के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है। इन हालात को देखते हुए बजट में हम औद्योगिक इकोसिस्टम के और मजबूत होने की उम्मीद करते हैं। बड़ी घोषणाओं के बदले बजट में ऐसी नीतियों की घोषणाएं हों, जो लंबे समय तक उद्योग के लिए सहायक बने। उन्होंने कहा कि हम बजट में सस्ते घरों के लिए इंसेंटिव, होम लोन के ब्याज पेमेंट पर टैक्स छूट में वृद्धि और रियल एस्टेट के लिए लिक्विडिटी बढ़ाने वाली पॉलिसी जारी रखने के पक्षधर हैं। इसके अलावा मेक इन इंडिया के तहत उत्पादों को बढ़ावा देने की उम्मीद करते हैं, जो घरेलू सोर्सिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देते हैं।
पर्यावरण और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर: सस्टेनेबल ग्रोथ, क्लीन एनर्जी पर हो जोर
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के संस्थापक एमडी और सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा, "पर्यावरण जोखिम अब सामान्य रूप से दिखने लगे हैं और हमें ऐसे में एक स्थिर पॉलिसी सिग्रल चाहिए जो स्वच्छ ऊर्जा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु से जुड़े जीवनयापन में वित्तीय सहायता पहुंचाने में मदद कर सकें। हम भारत के नेशनल अडैप्टेशन प्लान पर भी अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि अडैप्टेशन उन समुदायों और सेक्टर्स के लिए जरूरी होगा, जो पहले से ही क्लाइमेट चेंज का असर महसूस कर रहे हैं। यह बजट जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रतिक्रिया, विकास को प्राथमिकता देने और गुड गवर्नेंस को साथ लाने वाला बन सकता है। यह बजट ज्यादा मजबूत और समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने में एक अहम भूमिका निभा सकता है।
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी स्किपर लिमिटेड के डायरेक्टर शरण बंसल कहते हैं, "बजट 2026 में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव आएगा, क्योंकि देश का आर्थिक विकास अपने अगले चरण की ओर है। हमारी राय है कि इस बजट में न केवल पिछले कुछ वर्षों की घोषणाओं को लागू करने की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, बल्कि और भी सुधार व वित्तीय प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इससे पावर वैल्यू चेन में लंबी अवधि के विकास को खोला जा सकता है।" वे कहते हैं, "सरकार को पावर वितरण के सुधारों पर जोर देना होगा, जैसे कि परफॉर्मेंस आधारित स्ट्रक्चर को बढ़ावा देना और स्मार्ट मीटरिंग को तेजी से लागू करना। यह प्रयास न केवल बिजली के बिलों में पारदर्शिता लाएंगे, बल्कि ऑपरेशन की कॉर्यक्षमता को लंबे समय के लिए बढ़ाएंगे।"
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के संस्थापक एमडी और सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा, "पर्यावरण जोखिम अब सामान्य रूप से दिखने लगे हैं और हमें ऐसे में एक स्थिर पॉलिसी सिग्रल चाहिए जो स्वच्छ ऊर्जा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु से जुड़े जीवनयापन में वित्तीय सहायता पहुंचाने में मदद कर सकें। हम भारत के नेशनल अडैप्टेशन प्लान पर भी अधिक स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि अडैप्टेशन उन समुदायों और सेक्टर्स के लिए जरूरी होगा, जो पहले से ही क्लाइमेट चेंज का असर महसूस कर रहे हैं। यह बजट जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रतिक्रिया, विकास को प्राथमिकता देने और गुड गवर्नेंस को साथ लाने वाला बन सकता है। यह बजट ज्यादा मजबूत और समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने में एक अहम भूमिका निभा सकता है।
ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी स्किपर लिमिटेड के डायरेक्टर शरण बंसल कहते हैं, "बजट 2026 में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव आएगा, क्योंकि देश का आर्थिक विकास अपने अगले चरण की ओर है। हमारी राय है कि इस बजट में न केवल पिछले कुछ वर्षों की घोषणाओं को लागू करने की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, बल्कि और भी सुधार व वित्तीय प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इससे पावर वैल्यू चेन में लंबी अवधि के विकास को खोला जा सकता है।" वे कहते हैं, "सरकार को पावर वितरण के सुधारों पर जोर देना होगा, जैसे कि परफॉर्मेंस आधारित स्ट्रक्चर को बढ़ावा देना और स्मार्ट मीटरिंग को तेजी से लागू करना। यह प्रयास न केवल बिजली के बिलों में पारदर्शिता लाएंगे, बल्कि ऑपरेशन की कॉर्यक्षमता को लंबे समय के लिए बढ़ाएंगे।"
शेयर बाजार को उम्मीद: ग्रोथ पर होगा फोकस
वेंचुरा के हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर के मुताबिक, शेयर बाजार को उम्मीद है कि बजट 2026 ग्रोथ पर फोकस करेगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूंजी खर्च को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करने, मध्यम वर्ग को कर में राहत देने और पब्लिक सेक्टर में लैंड मोनेटाइजेशन में तेजी लाने पर जोर होगा। बाजार अब उत्पादन, अक्षय ऊर्जा और ईवी जैसे सेक्टर में पीएलआई स्कीम को बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। वहीं, एफएमसीजी और बैंकिंग में जीएसटी को आसान बनाने और कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 22 प्रतिशत करने की मांग हो रही है। विनीत कहते हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि सुधारों से ग्रामीण भारत की आय और खपत दोनों को सुधार जा सकता है, जिससे वैश्विक चुनौतियों के बीच 8 से 9 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य पूरा हो सकता है।"
चॉइस इक्विटी ब्रोक्रिंग के उपाध्यक्ष (रिसर्च) सचिन गुप्ता कहते हैं, "भारत में, इक्विटी ने साल की शुरुआत में स्थिर तकनीकी आधार पर बेंचमार्क इंडेक्स को लंबी-अवधि के ट्रेंड स्तर से ऊपर समर्थन पर बनाए रखा, जो खरीदारों की लगातार दिलचस्पी का संकेत है। बजट पॉलिसी और ढाचांगत विकास पर आधारित हो सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, अक्षय ऊर्जा और खपत को बढ़ाने वाले सेक्टर के साथ सेक्टोरल परफॉर्मेंस (जैसे बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटो) जैसे सेक्टर अर्थव्यवस्था को आकार देंगे। बीच-बीच में होने वाले करेक्शन से निपटने के लिए अनुशासित जोखिम प्रबंधन, यानी व्यवसाय या निवेश में निवेश को बढ़ावा देना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें कम करते हुए मुख्य सपोर्ट जोन पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही कच्चे तेल और ब्याज दरों सहित ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स पर नजर रखने की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर, 2026 में नपी-तुली ग्रोथ के मौके मिलेंगे, जो उन निवेशकों को फायदा पहुंचाएगा, जो मार्केट में गुणवत्ता, मजबूती और रेजिलिएंस (लचीलेपन) पर केंद्रित रहते हैं।
वेंचुरा के हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर के मुताबिक, शेयर बाजार को उम्मीद है कि बजट 2026 ग्रोथ पर फोकस करेगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूंजी खर्च को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करने, मध्यम वर्ग को कर में राहत देने और पब्लिक सेक्टर में लैंड मोनेटाइजेशन में तेजी लाने पर जोर होगा। बाजार अब उत्पादन, अक्षय ऊर्जा और ईवी जैसे सेक्टर में पीएलआई स्कीम को बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। वहीं, एफएमसीजी और बैंकिंग में जीएसटी को आसान बनाने और कॉर्पोरेट टैक्स को घटाकर 22 प्रतिशत करने की मांग हो रही है। विनीत कहते हैं, "ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि सुधारों से ग्रामीण भारत की आय और खपत दोनों को सुधार जा सकता है, जिससे वैश्विक चुनौतियों के बीच 8 से 9 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य पूरा हो सकता है।"
चॉइस इक्विटी ब्रोक्रिंग के उपाध्यक्ष (रिसर्च) सचिन गुप्ता कहते हैं, "भारत में, इक्विटी ने साल की शुरुआत में स्थिर तकनीकी आधार पर बेंचमार्क इंडेक्स को लंबी-अवधि के ट्रेंड स्तर से ऊपर समर्थन पर बनाए रखा, जो खरीदारों की लगातार दिलचस्पी का संकेत है। बजट पॉलिसी और ढाचांगत विकास पर आधारित हो सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, अक्षय ऊर्जा और खपत को बढ़ाने वाले सेक्टर के साथ सेक्टोरल परफॉर्मेंस (जैसे बैंकिंग, आईटी, फार्मा, ऑटो) जैसे सेक्टर अर्थव्यवस्था को आकार देंगे। बीच-बीच में होने वाले करेक्शन से निपटने के लिए अनुशासित जोखिम प्रबंधन, यानी व्यवसाय या निवेश में निवेश को बढ़ावा देना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें कम करते हुए मुख्य सपोर्ट जोन पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही कच्चे तेल और ब्याज दरों सहित ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स पर नजर रखने की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर, 2026 में नपी-तुली ग्रोथ के मौके मिलेंगे, जो उन निवेशकों को फायदा पहुंचाएगा, जो मार्केट में गुणवत्ता, मजबूती और रेजिलिएंस (लचीलेपन) पर केंद्रित रहते हैं।
बाजार विशेषज्ञ रंजीत झा का कहना है कि पब्लिक सेक्टर में निवेश अक्सर पूरे साइकिल की दिशा तय करता है। उनका कहना है कि जब सरकार कैपेक्स बढ़ाती है, तो प्राइवेट इंवेस्टर्स का भी भरोसा बढ़ता है और तब मार्केट में भी जोश आता है। पब्लिक कैपेक्स का जीडीपी पर 1.5 से 2 गुना तक का मल्टीप्लायर प्रभाव माना जाता है, साथ ही इससे लॉजिस्टिक्स लागत भी कम होती है जोकि फिलहाल चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अब भी अधिक है। काम पूरा होने की अधिक उम्मीदों पर सीमेंट, स्टील, कैपिटल गुड्स और कंस्ट्रक्शन जैसे साइक्लिकल सेक्टर्स को फायदा मिलता है।
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