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Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स में बड़ा बदलाव; प्रमित झवेरी छोड़ेंगे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, नोएल टाटा को लिखा खत

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 31 Jan 2026 01:59 PM IST
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सार

Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी बड़ी खबर। प्रमित झवेरी 11 फरवरी 2026 को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से हट जाएंगे। उन्होंने इस बारे में चेयरमैन नोएल टाटा को पत्र लिखा है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

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प्रमित झवेरी - फोटो : PJT Partners
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विस्तार
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देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉरपोरेट घरानों में से एक, टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी को नियंत्रित करने वाले 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' में शीर्ष स्तर एक और बड़ा बदलाव होने की खबर है। दिग्गज बैंकर और ट्रस्टी प्रमित झवेरी ने अपने पद से हटने का फैसला किया है। झवेरी का मौजूदा कार्यकाल 11 फरवरी, 2026 को समाप्त हो रहा है। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वे इस पद पर फिर से नियुक्त नहीं होना चाहते।

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नोएल टाटा को लिखा पत्र: 'अब आगे नहीं बढ़ाना चाहता कार्यकाल'
प्रमित झवेरी ने 31 जनवरी को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को एक पत्र लिखकर अपने फैसले की औपचारिक जानकारी दी।

  • फिर से शामिल होने से इनकार: झवेरी ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि 11 फरवरी, 2026 को उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद वे ट्रस्टी के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए विचार किए जाने के इच्छुक नहीं हैं।
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  • पूर्व चर्चा: रिपोर्ट के अनुसार, झवेरी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस निर्णय पर पहले ही नोएल टाटा के साथ चर्चा हो चुकी थी और अब इसे केवल औपचारिक रूप से सूचित किया जा रहा है।

यह पत्र सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टियों और टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा  को भी भेजा गया है।

रतन टाटा लेकर आए थे बोर्ड में
प्रमित झवेरी का टाटा ट्रस्ट्स के साथ जुड़ाव 2020 में शुरू हुआ था। उन्हें स्वर्गीय रतन एन. टाटा ने बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

  • कार्यकाल: झवेरी 12 फरवरी, 2020 से ट्रस्टी के रूप में सेवा दे रहे थे। उनकी नियुक्ति रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
  •  अनुभव: अपने पत्र में झवेरी ने ट्रस्ट के साथ बिताए समय को एक 'सम्मान' बताया और आने वाले वर्षों के लिए टाटा ट्रस्ट्स को अपनी शुभकामनाएं दीं।

क्यों अहम है यह खबर?
टाटा समूह के स्ट्रक्चर में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की भूमिका बेहद अहम है।

  • टाटा संस में हिस्सेदारी: सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में 51% से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं. टाटा संस, नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है।
  • निर्णय क्षमता: ट्रस्टी के रूप में, व्यक्ति के पास समूह की दिशा और परोपकारी कार्यों के आवंटन पर महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।

प्रमित झवेरी का जाना टाटा ट्रस्ट्स के बोर्ड में एक दौर का अंत है, जिसकी शुरुआत रतन टाटा के समय में हुई थी। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में रिक्त हो रहे इस महत्वपूर्ण पद पर अगला नाम किसका होगा, क्योंकि टाटा समूह में लीडरशिप ट्रांजिशन का दौर जारी है।

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