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Union Budget 2026: दिवाला समाधान मामलों में देरी चिंता का सबब, विशेषज्ञों ने बजट से पहले उठाई ये मांग

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Jan 2026 02:48 PM IST
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सार

आगामी बजट से पहले IBC को और प्रभावी बनाने की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाला मामलों में देरी कम करने के लिए NCLT में इंफ्रास्ट्रक्चर और बेंचों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। नए IBC संशोधनों से समाधान प्रक्रिया तेज होने और निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है।

Delays in insolvency resolution cases a cause for concern, experts raise this demand before the budget
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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आगामी केंद्रीय बजट में सरकार को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। इससे दिवाला मामलों का निपटारा तेज और प्रभावी हो पाएगा। यह बात अनूप रावत, नेशनल प्रैक्टिस हेड, ने कही। 

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रावत ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को तुरंत मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी कदम एनसीएलटी में इंफ्रास्ट्रक्चर और बेंचों की संख्या बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि हमें एनसीएलटी में ज्यादा से ज्यादा बेंचों की जरूरत है। इससे मामलों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी।

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आईबीसी से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

रावत ने कहा कि आईबीसी लागू होने के बाद निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार आर्थिक हालात के अनुसार कोड में समय-समय पर संशोधन करती रही है चाहे वह महामारी जैसी परिस्थितियां हों या फिर कर्जदाताओं और अन्य हितधारकों की अपेक्षाएं।


उन्होंने कहा कि अनुभव के आधार पर सरकार ने क्रेडिटर-लेड रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क और क्रॉस-बॉर्डर इन्सॉल्वेंसी जैसे अहम और दूरगामी संशोधन किए हैं, जो आगे चलकर निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करेंगे।

देरी और कम रिकवरी अब भी चुनौती

आईबीसी की मौजूदा चुनौतियों पर बात करते हुए रावत ने कहा कि मामलों में देरी और कम रिकवरी अब भी एक मुद्दा है, लेकिन यह किसी भी नए कानून के स्थिरीकरण चरण में सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो आईबीसी ने अब तक असाधारण रूप से अच्छा काम किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि संस्थागत मजबूती और बेंच स्ट्रेंथ बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में अभी और ध्यान देने की जरूरत है।

नए संशोधनों से तेज होगा समाधान

नए IBC संशोधनों पर रावत ने कहा कि ये निश्चित रूप से समाधान प्रक्रिया को तेज करेंगे। उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों का उद्देश्य विवादपूर्ण  प्रक्रिया की बजाय सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

इसके तहत पहले चरण में कर्जदाता और कर्जदार मिलकर समाधान की कोशिश करेंगे। अगर यह असफल रहता है, तो मामला दूसरे चरण में जाएगा, यानी सीआईआरपी प्रक्रिया, जहां प्रबंधन की जगह दिवाला पेशेवर जिम्मेदारी संभालेगा।

एनसीएलटी-एनसीएलएटी पर बढ़ेगा दबाव, लेकिन समय घटेगा

एनसीएलटी और एनसीएलएटी पर बढ़ते मामलों को लेकर रावत ने कहा कि यह अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है और मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ये संस्थान हमेशा व्यस्त रहेंगे, लेकिन नए संशोधनों के बाद मामलों को स्वीकार करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।



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