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Budget 2026: इक्विटी और बैंक जमा पर टैक्स में समान, बजट से पहले एसबीआई चेयरमैन ने दिया सुझाव

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Jan 2026 05:10 PM IST
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सार

बजट से पहले एसबीआई चेयरमैन ने इक्विटी निवेश और बैंक जमा पर टैक्स में समानता की मांग की। उन्होंने कहा कि इक्विटी को टैक्स में विशेष छूट देने की जरूरत अब नहीं रही है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Equity and bank deposits should be taxed equally, suggests SBI chairman ahead of the budget
SBI - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने शनिवार को इक्विटी निवेश और बैंक जमा से होने वाले रिटर्न पर टैक्स ट्रीटमेंट में समानता (पैरिटी) की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे बाजारों में ऐसी असमानता नहीं है और भारत को भी अब वैश्विक मानकों के अनुरूप चलना चाहिए।

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एसबीआई के एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में शेट्टी ने कहा कि वित्तीय बचत के साधनों के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें बजट के प्रावधानों की जानकारी नहीं है और इस तरह के बदलाव में राजकोषीय सीमाएं होंगी, लेकिन इक्विटी को विशेष टैक्स ट्रीटमेंट देने का औचित्य अब नहीं रह गया है।

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शेट्टी के मुताबिक, इक्विटी निवेश को कर राहत देने की व्यवस्था शायद एक दौर में सही थी, लेकिन आज जब जोखिम भरे शेयर बाजारों में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, तब इसकी जरूरत नहीं दिखती।

मौजूदा टैक्स ढांचा

फिलहाल बैंक जमा से मिलने वाला ब्याज आयकर स्लैब के अनुसार टैक्सेबल है, जो अधिकतम 30% तक जा सकता है। वहीं सूचीबद्ध इक्विटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (1.25 लाख रुपये से ऊपर) पर 12.5% और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 15-20% टैक्स लगता है।

बैंकिंग उद्योग लंबे समय से इन दोनों साधनों के बीच टैक्स समानता की मांग कर रहा है। बैंकरों का कहना है कि बेहतर रिटर्न की उम्मीद में बचतकर्ता न्यूनतम बैलेंस रखकर अतिरिक्त पैसा शेयर बाजार में लगा रहे हैं। इससे बैंकों के पास कर्ज देने के लिए संसाधन घटते हैं और कई बार उन्हें सरकारी बॉन्ड में अतिरिक्त निवेश या मनी मार्केट से उधारी करनी पड़ती है।

GIFT City के लिए टैक्स हॉलिडे बढ़ाने की मांग

इसी बीच एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी ने गुजरात के गिफ्ट सिटी स्थित इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में बुक होने वाली आय पर 10 साल की मौजूदा टैक्स हॉलिडे अवधि को बढ़ाने की मांग की। अधिकारी के अनुसार, GIFT City में अपेक्षित रफ्तार से गतिविधियां नहीं बढ़ पाई हैं और टैक्स छूट बढ़ाने से कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि दुबई के दुबई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र  में मौजूद संस्थाओं को 50 साल तक टैक्स हॉलिडे का लाभ मिलता है। ऐसे में भारत को भी अपने एकमात्र IFSC को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए टैक्स प्रोत्साहन पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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