सब्सक्राइब करें

Union Budget 2026: विकसित भारत के लिए देश का सफर शुरू, वित्त मंत्री सीतारमण के इन 10 आंकड़ों पर रहेगी नजर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Jan 2026 02:58 PM IST
सार

भारत की अर्थव्यवस्था तेज विकास और कम महंगाई के संतुलित दौर में है, लेकिन इसके पीछे चुनौतियां भी छिपी हैं। कमजोर निजी निवेश, कर संग्रह पर दबाव, अधूरा  विनिवेश लक्ष्य और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च की सीमाएं सरकार के सामने बड़ी चुनौती हैं। साथ ही महंगाई और रोजगार भी चिंता का विषय बने हुए हैं, जिससे बजट 2026-27 से बड़े सुधारों की उम्मीद है।

विज्ञापन
The country's journey towards a developed India begins, these 10 decisions of Finance Minister will be monitor
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब अपना रिकॉर्ड नौवां लगातार केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं, तब भारतीय अर्थव्यवस्था ‘गोल्डीलॉक्स’ दौर (संतुलित विकास) में है, जहां तेज आर्थिक वृद्धि और कम महंगाई साथ-साथ दिखाई दे रही है। लेकिन इसी दौरान वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता भी बढ़ी हुई है। भू-राजनीतिक संकट और टैरिफ युद्धों ने वैश्विक व्यापार को अभूतपूर्व तरीके से प्रभावित किया है, जिससे वित्त मंत्री की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।



वित्त मंत्री यह भी जानती हैं कि भारत के मजबूत दिखने वाले आर्थिक आंकड़े कुछ अंतर्निहित चुनौतियों को छिपाते हैं। मौजूदा आर्थिक विस्तार मुख्य रूप से सरकारी खर्च पर आधारित है, जबकि निजी निवेश, उपभोग और निर्यात जैसे अन्य विकास के प्रमुख स्तंभ अपेक्षाकृत कमजोर बने हुए हैं। उच्च विकास दर को बनाए रखने के लिए इन सभी क्षेत्रों का मजबूत योगदान जरूरी होगा, और बजट से उम्मीद की जा रही है कि वह इसके लिए आवश्यक प्रोत्साहन देगा।

सुधारों की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इस बजट में ऐसे दस प्रमुख कारकों की पहचान की है, जिन पर खास नजर रहेगी और जो भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दिशा तय करेंगे।

Trending Videos
The country's journey towards a developed India begins, these 10 decisions of Finance Minister will be monitor
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

तेज विकास के बावजूद अर्थव्यवस्था के सामने नई चिंता

अच्छी खबर यह है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक बना हुआ है। सरकार के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है। आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भारत 2022-23 को नया आधार वर्ष अपनाने जा रहा है, जो 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह लेगा। नई शृंखला से अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक बदलावों की बेहतर तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि अगले महीने इसके लागू होने के बाद विकास दर के आंकड़े किस तरह सामने आते हैं। लेकिन नीति-निर्माताओं के लिए ज्यादा चिंता का विषय नाममात्र वृद्धि दर (नॉमिनल ग्रोथ) है, जो महंगाई को भी समायोजित नहीं कर पा रही है। 8% की नाममात्र वृद्धि दर, बजट में 2025-26 के लिए अनुमानित 10.1% से कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि राजस्व जुटाने में कमी आ सकती है। सवाल यह है कि यह कमी कितनी गंभीर होगी और क्या सरकार अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए खर्च में कटौती करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
The country's journey towards a developed India begins, these 10 decisions of Finance Minister will be monitor
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

घाटा लक्ष्य के करीब सरकार, लेकिन कर्ज पर सवाल

कम कर राजस्व के बावजूद सरकार के इस वर्ष 4.4% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने की उम्मीद है। इसमें गैर-कर राजस्व में बढ़ोतरी खासकर भारतीय रिजर्व बैंक से मिलने वाले अधिक लाभांश और कुछ खर्चों में कटौती से मदद मिलने की संभावना है। हाल के वर्षों में सरकार ने राजकोषीय अनुशासन पर खास ध्यान दिया है और इस दिशा में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। महामारी के बाद 2020-21 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 9.2% के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यह लक्ष्य हासिल करने में देरी को देखते हुए खास माना जा सकता है, क्योंकि वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत मार्च 2008 तक राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3% तक लाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन 17 साल बाद भी यह लक्ष्य अब तक दूर बना हुआ है।

सरकार ने घोषणा की है कि अगले वित्त वर्ष से राजकोषीय अनुशासन को मापने के लिए राजकोषीय घाटे की बजाय जीडीपी के अनुपात में कर्ज को आधार बनाया जाएगा। साथ ही, सरकार ने यह भी कहा है कि 2030-31 तक जीडीपी के अनुपात में सरकारी कर्ज को 50% से नीचे लाया जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या सरकार बाजारों की उम्मीद के अनुसार कर्ज घटाने के लिए साल-दर-साल स्पष्ट रोडमैप पेश करेगी।

The country's journey towards a developed India begins, these 10 decisions of Finance Minister will be monitor
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

निजी क्षेत्र में जोखिम लेने की प्रवृत्ति अब भी कम

उच्च ब्याज दरों के अलावा कमजोर मांग और कम क्षमता उपयोग को निजी निवेश में कमी के प्रमुख कारण माना जा रहा है, जबकि सरकार ने इसे बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए हैं। सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की है और बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च किया है, ताकि निजी निवेश को गति मिल सके।

अर्थव्यवस्था में निवेश का संकेतक माने जाने वाले सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF) में हाल के वर्षों में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं देखा गया है। 2007-08 में, जब भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्यमी उत्साह का आखिरी बड़ा उछाल देखने को मिला था, तब GFCF जीडीपी के 35.8% के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हाल ही में सरकार ने मांग को बढ़ावा देने के लिए कर दरों में कटौती की है और कारोबार करने में आसानी सुधारने के लिए विनियमन में ढील देने की घोषणा की है। अब सवाल यह है कि निजी क्षेत्र को झिझक छोड़कर निवेश के लिए प्रेरित करने के लिए वित्त मंत्री और क्या कदम उठा सकती हैं।

विज्ञापन
The country's journey towards a developed India begins, these 10 decisions of Finance Minister will be monitor
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

गुणवत्तापूर्ण खर्च: केंद्र की रणनीति असरदार, राज्यों के सामने बड़ी चुनौती

केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खर्च के मामले में संतुलित और समझदारी भरा रुख अपनाया है। उसने अनावश्यक राजस्व खर्च में कटौती की है और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाया है। कुल राजस्व खर्च का जीडीपी में हिस्सा 2021-22 में 13.6% से घटकर 2025-26 में 11.1% रह गया है। वहीं, पूंजीगत व्यय पर खर्च 2021-22 में ₹5.9 ट्रिलियन से बढ़कर 2025-26 के लिए बजट में ₹11.2 ट्रिलियन तक पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कैपेक्स पर जोर देने से अर्थव्यवस्था में मल्टीप्लायर प्रभाव मजबूत हुआ है। अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें भी इसी तरह की रणनीति अपनाएं। हालांकि ब्याज-मुक्त 50 साल के ऋण के कारण राज्यों ने पूंजीगत खर्च बढ़ाया है, लेकिन अनावश्यक राजस्व खर्च घटाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

कुछ राज्यों पर वेतन, ब्याज और पेंशन जैसे प्रतिबद्ध खर्च का बोझ काफी अधिक है, जिसे कम करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी। ऐसा न कर पाने पर उन्हें ज्यादा कर्ज लेना पड़ता है। अब सवाल यह है कि क्या वित्त मंत्री राज्यों को अपने खर्च की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रोत्साहित करेंगी।

विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed