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RBI Action: आरबीआई ने 135 एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए, सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल पर गिरी गाज
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 10 Jun 2026 09:02 PM IST
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सार
आरबीआई ने कड़ा एक्शन लेते हुए 135 एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए, जिनमें सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल की कंपनियां शामिल हैं। जानिए किन कंपनियों पर गिरी गाज और वित्तीय बाजार पर इसका क्या असर होगा। पूरी खबर जानने के लिए यहां क्लिक करें।
भारतीय रिजर्व बैंक का चला डंडा
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) सेक्टर में बड़ी सफाई करते हुए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देश भर की 135 एनबीएफसी कंपनियों के 'सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन' (सीओआर) यानी पंजीकरण प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। यह बड़ी कार्रवाई वित्तीय क्षेत्र में नियमों के पालन और नियामक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में आरबीआई के कड़े रुख को दर्शाती है। आइए, एक बिजनेस जर्नलिस्ट के नजरिए से समझते हैं कि आरबीआई ने यह फैसला क्यों लिया है और इसका बाजार पर क्या असर होगा।
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इस सूची में कोलकाता की कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम इस प्रकार हैं:
अन्य प्रभावित राज्यों और प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:
रिजर्व बैंक का यह फैसला वित्तीय बाजार में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट संदेश है। 135 कंपनियों के लाइसेंस एक साथ रद्द होना इस बात का प्रमाण है कि आरबीआई नियमों की अनदेखी करने वाली किसी भी संस्था को बख्शने के मूड में नहीं है। इस सख्ती से एनबीएफसी सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी, जो लंबी अवधि में आम निवेशकों और अर्थव्यवस्था के हित में है।
आरबीआई ने अचानक इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?
रिजर्व बैंक समय-समय पर वित्तीय संस्थानों के कामकाज की समीक्षा करता है। 10 जून 2026 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई 'भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934' की धारा 45-IA (6) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है। नियमों का पालन न करने और नियामक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने वाली संस्थाओं के खिलाफ यह कड़ा कदम उठाया गया है। यह केंद्रीय बैंक की गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (एनबीएफसी) पर निरंतर चलने वाली निगरानी प्रक्रिया का ही एक अहम हिस्सा है।
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इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर किस राज्य पर पड़ा है?
आंकड़ों पर गौर करें तो इस कार्रवाई का सबसे बड़ा प्रभाव पश्चिम बंगाल, विशेषकर कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में संचालित कंपनियों पर पड़ा है। रद्द किए गए 135 लाइसेंसों में से बहुतायत संख्या यहीं की कंपनियों की है।इस सूची में कोलकाता की कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम इस प्रकार हैं:
- अक्षय फिस्कल सर्विसेज लिमिटेड
- अल्फा टाई-अप प्राइवेट लिमिटेड
- अरिहंत एंटरप्राइजेज लिमिटेड
- डेस्टिनी इंटरनेशनल लिमिटेड
- ईटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड
क्या बंगाल के अलावा अन्य राज्यों की कंपनियां भी रडार पर आईं?
हां, आरबीआई की यह गाज केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। देश के कई अन्य राज्यों की एनबीएफसी भी इस नियामक कार्रवाई की चपेट में आई हैं।अन्य प्रभावित राज्यों और प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:
- महाराष्ट्र: मुंबई स्थित एस्सेल फाइनेंस बिजनेस लोन्स लिमिटेड
- तेलंगाना: हैदराबाद स्थित सिटीवाइड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड
- तमिलनाडु: चेन्नई स्थित किरणग्लोबल बिजनेस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड
जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द हुए, अब उनका क्या होगा?
आरबीआई की अधिसूचना के मुताबिक, जिन कंपनियों के पंजीकरण प्रमाण पत्र रद्द किए गए हैं, वे अब किसी भी प्रकार का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकेंगी। 'आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-I के खंड (a)' के तहत परिभाषित गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान के रूप में काम करने पर उन पर कानूनी रूप से पूरी तरह रोक लगा दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिन 135 कंपनियों पर यह कार्रवाई हुई है, उन्हें वर्ष 1998 से 2022 के बीच मूल रूप से पंजीकरण प्रमाण पत्र (सीओआर) मिले थे, यानी इनमें से कई कंपनियां दशकों से बाजार में काम कर रही थीं।रिजर्व बैंक का यह फैसला वित्तीय बाजार में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट संदेश है। 135 कंपनियों के लाइसेंस एक साथ रद्द होना इस बात का प्रमाण है कि आरबीआई नियमों की अनदेखी करने वाली किसी भी संस्था को बख्शने के मूड में नहीं है। इस सख्ती से एनबीएफसी सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी, जो लंबी अवधि में आम निवेशकों और अर्थव्यवस्था के हित में है।