फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   nirmala sitharaman rejects jairam ramesh upi charges claims taxation bill

UPI चार्ज पर घमासान: जयराम रमेश पर भड़कीं वित्त मंत्री सीतारमण, बोलीं- संसद छोड़ बाहर क्यों फैला रहे अफवाह?

Thu, 06 Aug 2026 10:59 PM IST
राकेश कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 06 Aug 2026 10:59 PM IST
सार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीआई पर नए चार्ज की आशंकाओं को खारिज करते हुए इसे अफवाह करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित एमडीआर सिर्फ मर्चेंट्स के लिए है और आम जनता के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहेगा। वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कानून में बदलाव से भविष्य में उपभोक्ताओं पर ही डिजिटल ट्रांजैक्शन का वित्तीय बोझ पड़ेगा।
 

विज्ञापन
nirmala sitharaman rejects jairam ramesh upi charges claims taxation bill
निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जयराम रमेश 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' को लेकर कोरी अफवाह फैला रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीआई से जुड़े प्रस्तावित बदलावों पर झूठी बातें न फैलाई जाएं।
विज्ञापन


क्या उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा असर?
वित्त मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) सिर्फ व्यापारियों (मर्चेंट्स) पर लागू होता है। इसका आम ग्राहकों या उपभोक्ताओं से कोई लेना-देना नहीं है। ग्राहकों के लिए यूपीआई सेवा पूरी तरह पहले जैसी ही रहेगी। सीतारमण ने बताया कि इस कदम से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा। वे यूपीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीक और सुरक्षा को मजबूत करने में अधिक निवेश कर सकेंगी। अंततः इसका सीधा लाभ हर यूपीआई यूजर को ही मिलेगा।
विज्ञापन


संसद छोड़ बाहर हंगामा क्यों कर रही कांग्रेस?
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता संसद के भीतर सकारात्मक चर्चा करने के बजाय बाहर बयानबाजी कर रहे हैं। जब यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया गया, तब कांग्रेस ने सदन में रचनात्मक बहस नहीं की। अगर पार्टी वाकई गंभीर होती, तो संसद के पटल पर अपनी बात रख सकती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: RBI का बड़ा फैसला: अपर-लेयर NBFC सूची में बरकरार टाटा संस, क्या अब भी अटकी रहेगी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी?

जयराम रमेश के आरोपों का क्या है पूरा गणित?
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि नए संशोधन विधेयक के जरिए यूपीआई पर मुफ्त सेवा की वैधानिक गारंटी खत्म की जा रही है। इससे भविष्य में डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा। जयराम रमेश का तर्क था कि व्यापारी इस चार्ज की भरपाई आम जनता से ही करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास पर्याप्त फंड है। वर्ष 2025-26 में आरबीआई ने केंद्र सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ का सरप्लस (लाभांश) ट्रांसफर किया है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए मर्चेंट्स या ग्राहकों पर नया बोझ डालने की कोई जरूरत नहीं है।

इस पूरे विवाद की पांच बड़ी बातें
  • एमडीआर केवल व्यापारियों पर: वित्त मंत्री ने साफ किया कि एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।
  • सुरक्षा और तकनीक में सुधार: इस व्यवस्था से बैंक और फिनटेक कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करेंगी।
  • संसद में चर्चा से दूरी: सरकार ने कांग्रेस पर संसद के अंदर बहस न करने का आरोप लगाया।
  • फ्री यूपीआई खत्म होने की आशंका: कांग्रेस का दावा है कि संशोधन से मुफ्त सेवा की गारंटी समाप्त हो जाएगी।
  • आरबीआई के लाभांश का तर्क: जयराम रमेश ने ₹2.86 लाख करोड़ के आरबीआई सरप्लस का हवाला देकर चार्ज का विरोध किया।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed