Crude Prices: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने क्रूड की कीमतों पर कैसे बढ़ाया दबाव? जानिए वैश्विक बाजार का हाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जबकि एशियाई बाजार मिश्रित रहे। टोक्यो और सियोल के बाजारों में शुरुआती नुकसान के बाद सुधार देखा गया। जानें वैश्विक बाजारों पर इसका असर।
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बीच वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें उछलने लगी हैं। मंगगलवार को शुरुआती कारोबार में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद क्रूड मजबूत हुआ। वहीं दूसरी ओर, एशियाई शेयरों में तनाव का मिलाजुला असर दिखा और टोक्यो और सियोल के बाजारों शुरुआती गिरावट के बाद बढ़त हासिल की।
दुनिया में क्रूड की कीमतों का अभी क्या हाल है?
मंगलवार को ब्रेंट क्रूड बेंचमार्क 2.3% की बढ़त के साथ 85.18 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था और इसकी कीमतों में 10 फीसदी की बढ़त दिखी। अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क भी 2.5 प्रतिशत की बढ़त हासिल कर 80.15 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जुलाई डिलीवरी के लिए कच्चे तेल का भाव 282 रुपये या 3.83 फीसदी बढ़कर 7,642 रुपये प्रति बैरल हो गया। इस दौरान 15,479 लॉट का कारोबार हुआ। इसी तरह, अगस्त अनुबंध भी 240 रुपये या 3.25 फीसदी बढ़कर 7,634 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसमें 7,739 लॉट का कारोबार हुआ।
हालिया तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा?
क्रूड की कीमतें अभी पश्चिम एशिया युद्ध के बीच के अपने सर्वोच्च स्तर 120 डॉलर प्रति बैरल से नीचे हैं, पर होर्मूज पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी बढ़ने से क्रूड की सप्लाई से जुड़ी भविष्य की अनिश्चिताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में होर्मूज पर नाकेबंदी फिर से लागू करने का आरोप लगाया, जिसके बाद ईरान पर अमेरिकी हमले भी तेज कर दिए। इस भूराजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी शेयर फ्यूचर्स में मिलाजुला रुख दिखा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ऑयल टैंकर अपने ग्राहकों तक फारस की खाड़ी का इस्तेमाल कर क्रूड नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का क्या हाल है?
मंगलवार को एशियाई बाजारों पर भी इसका असर दिखा और टोक्यो का निक्केय 225 अंक या 0.7 प्रतिशत बढ़त कर 67.743.50 पर पहुंच गया। सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में 2.3 फीसदी की वृद्धि हुई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 0.7 फीसदी बढ़कर 6,856.83 पर पहुंच गया। शंघाई कंपोजिट सूचकांक 1.1 फीसदी बढ़कर 3,958.54 पर बंद हुआ। चीन का निर्यात जून में 27 फीसदी बढ़ा, जिसका कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कंप्यूटर चिप्स की मजबूत मांग थी। हांगकांग का हैंग सेंग 0.3 फीसदी बढ़कर 24,301.71 पर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.1 फीसदी से कम गिरकर 8,804.70 पर बंद हुआ। सोमवार को वॉल स्ट्रीट पर एसएंडपी 500 में 0.8 फीसदी की गिरावट आई, डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.3 फीसदी गिरा और नैस्डैक कंपोजिट 1.6 फीसदी नीचे आया। माइक्रोन टेक्नोलॉजी जैसे चिप शेयरों में गिरावट आई, माइक्रोन 4.4 फीसदी गिरा। एनवीडिया 3.5 फीसदी गिरा, यह एसएंडपी 500 पर सबसे बड़ा भार था।
भविष्य में क्या उम्मीद है?
अधिक महंगा तेल मुद्रास्फीति को बढ़ा सकता है। इससे फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उच्च दरें मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकती हैं, लेकिन वे अर्थव्यवस्था को धीमा भी करती हैं। इससे सभी प्रकार के निवेशों के मूल्य प्रभावित होते हैं। मंगलवार को बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, जेपी मॉर्गन चेस, गोल्डमैन सैक्स और वेल्स फ़ार्गो अपने तिमाही परिणाम जारी कर रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि एसएंडपी 500 सूचकांक में कंपनियों की कुल वृद्धि 23.6 फीसदी रहेगी।