मैकेंजी रिपोर्ट: 2030 तक हर साल 45 फीसदी की दर से बढ़ेगा क्विक कॉमर्स, पांच साल में 40 अरब डॉलर का उद्योग
मैकेंजी रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्विक कॉमर्स क्षेत्र 2030 तक 35-40 अरब डॉलर का हो सकता है। वर्तमान में 5-6 अरब डॉलर का यह उद्योग 45% CAGR से बढ़ रहा है। जानें शहरी उपभोक्ताओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका...
विस्तार
कम समय में डिलीवरी और बेहतर सेवाओं के दम पर देश में क्विक कॉमर्स क्षेत्र तेज रफ्तार से विस्तार कर रहा है। खासकर शहरी इलाकों में। मैकेंजी एंड कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, विस्तार की रफ्तार इतनी तेज है कि क्विक कॉमर्स क्षेत्र पांच वर्षों में सालाना 45 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़कर 2030 तक 35-40 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में यह क्षेत्र 5-6 अरब डॉलर का है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि क्विक कॉमर्स भारत के डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन रहा है। इसकी वृद्धि को उन शहरी उपभोक्ताओं से बढ़ावा मिल रहा है, जो तेजी से डिलीवरी और बेहतर सुविधाओं को महत्व दे रहे हैं।
दरअसल, क्विक कॉमर्स क्षेत्र की वृद्धि को ज्यादा उत्पाद रेंज, तेज रफ्तार डिलीवरी सेवा एग्रीमेंट और जस्ट-इन-टाइम फुलफिलमेंट यानी मांग आधारित उत्पाद मॉडल अपनाने से भी समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, मेट्रो और अन्य बड़े शहरों में इंटरनेट की मजबूत पहुंच और उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव भी क्विक कॉमर्स क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
शुरुआती उपभोक्ताओं को मिलते हैं कई लाभ
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्विक कॉमर्स में शुरुआती उपभोक्ताओं को ऑप्टिमाइज्ड स्टोर नेटवर्क, उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों से जुड़े डाटा तक आसान पहुंच और अनुशासित परिचालन मॉडल से लाभ मिलता है। इसके अलावा, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ग्रोसरी डिलीवरी से आगे बढ़कर उत्पाद श्रेणी की एक बड़ी रेंज में फैल रहे हैं, जिससे डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में उनकी भूमिका और मजबूत हो रही है।
तीन चैनलों से चलता है डिजिटल कॉमर्स तंत्र
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का डिजिटल कॉमर्स तंत्र अभी तीन मुख्य चैनल से चलता है...पारंपरिक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डायरेक्ट-टु-कंज्यूमर (डी2सी)। ये तीनों प्लेटफॉर्म मिलकर देश के ऑनलाइन कॉमर्स क्षेत्र की नींव बनाते हैं, जो अपनी सेवाओं के जरिये विक्रेताओं को उपभोक्ताओं तक पहुंचने के कई तरीके मुहैया कराते हैं।
- पारंपरिक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस स्केल और प्रोडक्ट डिस्कवरी देते हैं। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म तेज डिलीवरी एवं सुविधा पर फोकस करते हैं। डायरेक्ट-टु-कंज्यूमर चैनल ब्रांड्स को विजिबिलिटी, कीमत और वितरण पर ज्यादा नियंत्रण रखने में मदद करते हैं, जिससे वे अपने ग्रोथ स्टेज के आधार पर टूल्स और सेवाएं अपना सकते हैं।
- मैकेंजी ने कहा, क्विक कॉमर्स क्षेत्र जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, भारत की ओवरऑल ई-कॉमर्स ग्रोथ स्टोरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह तकनीकी आधुनिकीकरण, उपभोक्ता मांग और बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे से आगे बढ़ेगा।
अन्य वीडियो:-