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Repo Rate: वैश्विक अनिश्चितता घटी, आरबीआई रेपो रेट में नहीं कर सकता बदलाव

आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Sun, 21 Jun 2026 04:17 PM IST
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सार

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता में कमी और महंगाई पर नियंत्रण के संकेतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रख सकता है। एक रिपोर्ट में ब्याज दरों में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की संभावना कम जताई गई है।

RBI likely to keep repo rate steady at 5.25 percent amid easing global volatility
आरबीआई - फोटो : एआई ग्राफिक्स
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विस्तार

वैश्विक अस्थिर में कमी आने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रेपो रेट को लेकर अपनी वेट-एंड-वॉच नीति को जारी रख सकता है और आने वाली मौद्रिक नीति में ब्याज दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा जा सकता है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।  बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौते से ग्लोबल अनिश्चितता में बड़ी कमी आई है। इससे केंद्रीय बैंकों को एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय डेटा पर आधारित फैसले लेने की ज्यादा जगह मिली है।



आरबीआई का न्यूट्रल पॉलिसी का रुख बरकरार 
रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई पॉलिसी की दिशा में कोई भी बदलाव करने से पहले मानसून की प्रगति, खाने-पीने की चीजों की महंगाई के ट्रेंड और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना जारी रखेगा। आरबीआई ने जून में हुई एमपीसी की बैठक में वैश्विक आर्थिक माहौल और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर चिंताओं के बीच रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा और अपनी न्यूट्रल पॉलिसी का रुख भी बरकरार रखा।
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 महंगाई का अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत किया
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अपने मैक्रो-इकोनॉमिक अनुमानों में बदलाव किया। मौसम से जुड़े जोखिमों और खाने-पीने की चीजो की कीमतों को लेकर अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए, बैंक ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 30 आधार अंक घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया, जबकि महंगाई का अनुमान 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया।
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एमपीसी की बैठक के मिनट्स से पता चला कि सभी सदस्य महंगाई के बढ़ते जोखिमों और अस्थिर आर्थिक माहौल को लेकर एकमत थे। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, नीति निर्मताओं ने यह भी माना कि महंगाई नियंत्रण में है और व्यापक स्तर पर महंगाई का असर आगे भी बने रहने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं। मिनट्स में अस्थिर आर्थिक माहौल और महंगाई के बढ़ते जोखिमों पर आम सहमति दिखी। हालांकि, सदस्यों ने कहा कि महंगाई का दबाव नियंत्रण में रहा है, इसलिए डेटा पर आधारित अप्रोच अपनाना सही कदम होगा।

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