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ULIP: तस्वीर बदल चुकी है, दोबारा लौट रहे हैं यूलिप; एफडी पर घटते ब्याज के बीच बन रहा विकल्प

पंकज रस्तोगी, निदेशक, मिडास फिनसर्व Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 22 Jun 2026 03:43 AM IST
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सार

नए यूलिप में मुख्य खर्च केवल फंड मैनेजमेंट चार्ज है, जो IRDAI के अनुसार अधिकतम 1.35% प्रतिवर्ष तक सीमित है। यह म्यूचुअल फंड के खर्चों के करीब है। लंबी अवधि (10–15 वर्ष) में इक्विटी-आधारित यूलिप ने औसतन 10%–13% तक का रिटर्न दिया है, जो पारंपरिक बीमा योजनाओं के 4-5 फीसदी रिटर्न से कहीं बेहतर है।

ULIPs making comeback emerging as alternative amidst falling interest rates on FDs landscape has changed
यूलिप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

देश के प्रमुख बैंक अपने ग्राहकों को यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) बेचने में सक्रिय हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह है बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज का घटना। वहीं, यूलिप में बाजार से जुड़ा बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना है। बैंक इसे एक समग्र वित्तीय समाधान के रूप में पेश कर रहे हैं, जिसमें बीमा कवर भी है और निवेश का अवसर भी।


हाल के वर्षों में यूलिप की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बीमा उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, निजी जीवन बीमा कंपनियों के कुल प्रीमियम संग्रह में यूलिप की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक हो चुकी है, जो बाजार में इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
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पुराने से कितने अलग हैं नए यूलिप?
एक दशक पहले भारी-भरकम शुल्क, कम रिटर्न और जटिल संरचना के कारण यूलिप की छवि खराब हो गई थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आईआरडीएआई के सख्त नियमों के बाद नए यूलिप में बड़े सुधार हुए हैं:
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  • शून्य प्रीमियम एलोकेशन चार्ज: अब आपका पूरा प्रीमियम निवेश में लगता है।
  • शून्य पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज: प्रशासनिक खर्च की कोई कटौती नहीं।
  • लचीलापन: नए यूलिप में लचीलापन सबसे बड़ा नया फीचर है। निवेशक बाजार की स्थिति के अनुसार डेट और इक्विटी फंड के बीच असीमित स्विच कर सकते हैं, वो भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के।
  • इक्विटी फंड की विविधता: निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार लार्ज कैप, मिड कैप, फ्लेक्सी कैप, इंडेक्स फंड सहित कई प्रकार के इक्विटी फंड में निवेश का विकल्प चुन सकते हैं।
नए यूलिप में मुख्य खर्च केवल फंड मैनेजमेंट चार्ज है, जो IRDAI के अनुसार अधिकतम 1.35% प्रतिवर्ष तक सीमित है। यह म्यूचुअल फंड के खर्चों के करीब है। लंबी अवधि (10–15 वर्ष) में इक्विटी-आधारित यूलिप ने औसतन 10%–13% तक का रिटर्न दिया है, जो पारंपरिक बीमा योजनाओं के 4-5 फीसदी रिटर्न से कहीं बेहतर है।

क्या है यूलिप और किसके लिए बेहतर?
यूलिप एक ऐसा उत्पाद है जो बीमा और निवेश को एक साथ जोड़ता है। प्रीमियम का एक हिस्सा मृत्यु लाभ के लिए और शेष हिस्सा चुने गए फंड में निवेश के लिए उपयोग होता है। यह प्लान उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो:
  • दीर्घकालिक (10 वर्ष या अधिक) निवेश करना चाहते हैं
  • बीमा और निवेश एक ही छत के नीचे चाहते हैं
  • बाजार से जुड़े रिटर्न के साथ अनुशासित बचत करना चाहते हैं
कब और किसे लेना चाहिए?
यूलिप तब लेना उचित है जब आपके पास कम से कम 10 से 15 वर्ष का निवेश समय हो। कम अवधि में यूलिप का लाभ सीमित रहता है। यह बच्चों की शिक्षा, सेवानिवृत्ति योजना या दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के लिए एक प्रभावी साधन हो सकता है।

यदि आपके पास पहले से पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस है और आप अतिरिक्त बीमा कवर के साथ निवेश करना चाहते हैं, तो यूलिप एक सहायक विकल्प हो सकता है। हालांकि, प्राथमिक जीवन बीमा के लिए टर्म प्लान सर्वोत्तम रहता है। यूलिप को सेकेंडरी कवर के रूप में तभी लें जब आपकी दीर्घकालिक निवेश योजना इससे मेल खाती हो।

नई कर व्यवस्था में कितना कारगर है यूलिप?
यूलिप की परिपक्वता पर कर लाभ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(10D) के तहत मिलता है, लेकिन इसे समझना जरूरी है:
  • 1 फरवरी, 2021 के बाद जारी यूलिप (वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से कम): यदि सभी वर्षों में वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से कम रहता है, तो परिपक्वता राशि धारा 10(10D) के तहत पूर्णतः कर-मुक्त होगी।
  • 1 फरवरी, 2021 के बाद जारी यूलिप (वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से अधिक): यदि किसी भी वर्ष प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो परिपक्वता पर प्राप्त लाभ कर योग्य हो जाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हालिया केंद्रीय बजट में स्पष्ट किया है कि ऐसे यूलिप से होने वाले लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ माना जाएगा और उस पर 12.5% की दर से कर लागू होगा,  जो इक्विटी म्यूचुअल फंड के समान है।
  • नई कर व्यवस्था में धारा 80C का लाभ उपलब्ध नहीं है, अतः निवेशकों को यूलिप लेते समय अपनी कर व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए।

अस्वीकरण: म्यूचुअल फंड और बीमा निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश से पूर्व अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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