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West Bengal: जनता पर बढ़ेगा टैक्स का बोझ या सरकार लाएगी कोई विकल्प, शुभेंदु सरकार आज पेश करेगी अपना पहला बजट

आईएएनएस, कोलकाता Published by: Asmita Tripathi Updated Mon, 22 Jun 2026 11:51 AM IST
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सार

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार सोमवार को अपना पहला बजट पेश करेंगी। इस दौरान बजट में टैक्स दरें बढ़ाए बिना राज्य का राजस्व बढ़ाने, कर्ज प्रबंधन सुधारने और बड़े निवेश आकर्षित करने पर जोर रहने की उम्मीद है। 

West Bengal Will the tax burden on the public increase Suvendu Adhikari to present his first budget today.
स्वपन दासगुप्ता, पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के सोमवार को अपना पहला  बजट सोमवार दोपहर को पेश किया। यह बजट पत्रकार से राजनेता बने स्वपन दासगुप्ता पेश किए।  वहीं, बजट पेश होने से पहले पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल कहा कि हम जनता के भारी जनादेश का सम्मान करते हैं। वे निराश नहीं होंगे।




महंगाई भत्ता 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 38 प्रतिशत

 

 

 

 

बजट के दौरान राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) को मौजूदा 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 38 प्रतिशत करने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  पश्चिम बंगाल सरकार कोलकाता हवाई अड्डे पर यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए कल्याणी में 1,000 एकड़ भूमि को ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए चिन्हित करेगी। 

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वहीं, बंगाल के वित्त मंत्री ने चिंगरीघाटा-न्यू टाउन एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए 900 करोड़ रुपये और भागीरथी नदी पर नए पुल के लिए 1,200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके साथ ही केंद्र की उड़ान योजना के तहत पुरुलिया, बालुरघाट और मालदा में नए हवाई अड्डे बनेंगे, कूच बिहार हवाई अड्डे का विस्तार किया जाएगा।  राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधायकों के स्थानीय क्षेत्र विकास कोष को सालाना 70 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने की घोषणा की।
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बजट से पहले लोगों में क्या आशंकाएं होती है?
किसी भी बजट से पहले आम लोगों में टैक्स का बोझ बढ़ने की आशंकाएं सामने आती हैं। वहीं, वित्त मंत्री दासगुप्ता ने इस महीने की शुरुआत में राज्य के वित्त विभाग का प्रभार मिलने के तुरंत बाद इस संबंध में नागरिकों के डर को दूर करने की कोशिश की थी। उन्होंने साफ रूप से कहा कि उनका लक्ष्य मौजूदा कर संरचना में संशोधन करना है। इसके साथ ही लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य के अपने कर राजस्व को बढ़ाना है।


आर्थिक सलाहकारों का क्या मानना है?
आर्थिक सलाहकारों को इस संबंध में दासगुप्ता के तर्क में तर्कसंगतता नजर आती है कि आम लोगों पर अतिरिक्त कर का बोझ डाले बिना राज्य के अपने कर राजस्व को बढ़ाया जा सकता है। बशर्ते संबंधित राज्य के वित्त मंत्री कर राजस्व सृजन के लिए केवल कुछ ही चैनलों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक चैनल खोल सकें। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली पश्चिम बंगाल सरकार के दौरान, अर्थशास्त्रियों की मुख्य शिकायत राज्य के अपने कर संग्रह के सीमित साधनों के खिलाफ थी, जो मुख्य रूप से दो मदों पर निर्भर थे।  राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) और राज्य उत्पाद शुल्क। नए वित्त मंत्री पश्चिम बंगाल के राजकोषीय स्वास्थ्य को लेकर अर्थशास्त्रियों की उस चिंता को सीधे तौर पर संबोधित करते दिख रहे हैं, जो नकदी की कमी से जूझ रहे राज्य के खजाने, बढ़ते संचित कर्ज और भारी गैर-योजनागत खर्च की पृष्ठभूमि में है।

भ्रष्टाचार को बंद करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाया?
राज्य उत्पाद शुल्क की वसूली में भ्रष्टाचार के रास्तों को बंद करने और बेहतर राजस्व संग्रह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई प्रणाली शुरू की गई थी। कर्ज प्रबंधन के संबंध में, दासगुप्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य पर संचित भारी कर्ज भार के बीच कुशल कर्ज प्रबंधन को लागू करना है, जिसके 31 मार्च, 2027 तक बढ़कर 8.15 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। वहीं, 31 मार्च, 2011 को यह मात्र 1.99 लाख करोड़ रुपये था, जो पश्चिम बंगाल में 34 साल के वाम मोर्चा शासन का अंतिम वर्ष था।

वहीं, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस संचित कर्ज समस्या से निपटने का एकमात्र तरीका कर राजस्व में वृद्धि और गैर-योजनागत और राजस्व खर्ज में भारी कटौती का संयोजन है। यह देखना बाकी है कि दासगुप्ता आज इस मोर्चे पर किस तरह के सुधारों की घोषणा करेंगे। राज्य में विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों के लिए बड़े निवेश को आकर्षित करने के मुद्दे पर है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य की भूमि और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नीतियों में सुधार के संबंध में कुछ प्रमुख नीतिगत परिवर्तनों की आवश्यकता है।

उद्योग जगत को क्या सुधार चाहिए?
उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, भूमि नीति के मामले में दो प्रमुख सुधारों की आवश्यकता है। पहला, शहरी भूमि (अधिकतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, 1976 को निरस्त करना और दूसरा, उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण या भूमि खरीद में राज्य की किसी भी भूमिका को रोकने वाली मौजूदा नीति को समाप्त करना। उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण या भूमि खरीद में राज्य की किसी भी भूमिका को रोकने वाली यह मौजूदा नीति, अत्यधिक खंडित भूमि स्वामित्व संरचना वाले पश्चिम बंगाल में निवेशकों के लिए उद्यम करने के लिए एक प्रमुख बाधा रही है।

शहर के एक उद्योग विशेषज्ञ ने बताया, 'इस नीति के चलते, निवेशक राज्य में बड़े निवेश के लिए आगे आने को तैयार नहीं थे, जिसके लिए एक ही बार में जमीन का एक बड़ा टुकड़ा खरीदना और प्रस्तावित औद्योगिक इकाई के लिए उस जमीन को खरीदने के लिए अलग-अलग जमीन मालिकों के साथ बातचीत करने की परेशानी उठाना आवश्यक था।'

दूसरी ओर, राज्य सरकार की विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति नहीं, सेवा क्षेत्रों, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवा (आईटीईएस) क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए एक बाधक है। अब यह देखना बाकी है कि दासगुप्ता का आज का पहला बजट इन महत्वपूर्ण नीतियों को संबोधित करता है या नहीं।

गौरतलब है कि इसी साल 5 फरवरी को वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में अंतरिम (वोट-ऑन-अकाउंट) बजट पेश किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने वाले थे, जिसके चलते पूरा बजट पेश नहीं किया जा सका। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए गए, जिसके बाद नई सरकार ने शपथ ली।

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