RBI MPC: अमेरिका-ईरान जंग के बीच रिजर्व बैंक की अहम बैठक, क्या बदलेंगी ब्याज दरें? जानें हर सवाल का जवाब
आरबीआई एमपीसी की अप्रैल 2026 में होने वाली बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक में लिए गए फैसले का एलान बुधवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। आइए जानते हैं एमपीसी की इस बार हो रही बैठक से जुड़े हर सवाल का जवाब। जानें रेपो रेट, महंगाई और अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर क्या असर होगा।
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अप्रैल महीने की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-ईरान युद्ध, दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रहा है, तब भारतीय अर्थव्यवस्था की नजरें इस नीतिगत बैठक पर टिकी हैं। निवेशकों और आम जनता के मन में उठ रहे तमाम सवालों के जवाब हमने इस रिपोर्ट में दिए हैं:
सवाल: आरबीआई की एमपीसी बैठक कब तक चलेगी और इसका मुख्य एजेंडा क्या है?
जवाब: रिजर्व बैंक की एमपीसी बैठक 6 अप्रैल से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस तीन दिवसीय बैठक का मुख्य एजेंडा ब्याज दरों की समीक्षा करना और अर्थव्यवस्था में महंगाई के आउटलुक का आकलन करना है। इस बार समिति का सबसे ज्यादा ध्यान मौजूदा अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण महंगाई पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
सवाल: क्या इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव होने की संभावना है?
जवाब: आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि एमपीसी अपनी अप्रैल की इस समीक्षा में ब्याज दरों को 5.25% पर स्थिर रख सकती है। रॉयटर्स की जनवरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत तक केंद्रीय बैंक द्वारा 5.25% की प्रमुख ब्याज दर को बनाए रखने की उम्मीद है, ताकि पिछली कटौतियों के प्रभाव का आकलन किया जा सके। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक हालात में आए नाटकीय बदलावों के कारण आरबीआई भविष्य में भी सतर्क दृष्टिकोण अपनाएगा।
सवाल: अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर क्या असर पड़ रहा है?
जवाब: मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह बाधित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के अनिश्चित काल के लिए बंद होने से भारत का ऊर्जा आयात भी प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपये में 4% से अधिक की भारी गिरावट आई है, जो वित्तीय वर्ष 2026 को एक दशक से अधिक समय में रुपये के लिए सबसे खराब साल बनाता है।
सवाल: महंगाई और ब्याज दरों के मोर्चे पर आरबीआई का हालिया रुख कैसा रहा है?
जवाब: रिजर्व बैंक ने फरवरी 2025 से अब तक ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। दर में आखिरी कटौती दिसंबर में की गई थी, जिसके बाद से विशेषज्ञों ने काफी हद तक ठहराव का अनुमान लगाया था। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भविष्य में रुपये और ब्याज दरों की दिशा काफी हद तक वैश्विक मैक्रो कारकों द्वारा ही निर्धारित होगी।
सवाल: मौजूदा संकट के बीच दुनिया के अन्य देशों के केंद्रीय बैंक क्या कदम उठा रहे हैं?
जवाब: जहां भारत में दरें स्थिर रहने का अनुमान है, वहीं वैश्विक स्तर पर कई देश आक्रामक कदम उठा रहे हैं। हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया और जापान के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा कोलंबिया और ब्राजील ने भी महंगाई पर काबू पाने के लिए इसी तरह के कदम उठाए हैं।
सवाल: आरबीआई के फैसले और गवर्नर का संबोधन कब और कहां देखा जा सकता है?
जवाब: मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का आधिकारिक बयान तीन दिवसीय बैठक के समापन के बाद 8 अप्रैल को जारी किया जाएगा। आरबीआई की इस घोषणा को आरबीआई के सोशल मीडिया हैंडल्स पर लाइव देखा जा सकता है। दर्शक एनडीटीवी नेटवर्क के यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर भी लाइव अपडेट्स ट्रैक कर सकते हैं। घोषणा के बाद, दोपहर 12 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। युद्ध के कारण यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने अस्थायी राहत देने के लिए कुछ उपाय किए हैं, लेकिन अप्रैल एमपीसी की बैठक से मिलने वाले संकेत इस बात की दिशा तय करेंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था निकट भविष्य में इन बाहरी चुनौतियों का सामना किस प्रकार करेगी।