Crude Oil: मई से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाएगा ओपेक प्लस, सऊदी अरब और रूस की होगी 60% से अधिक हिस्सेदारी
ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने मई 2026 से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है, जिसमें सऊदी अरब और रूस की 60% से ज्यादा हिस्सेदारी होगी। ऊर्जा बाजार के इस अहम अपडेट को अभी पढ़ें।
विस्तार
वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आठ प्रमुख ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने मई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन में वृद्धि करने का रणनीतिक निर्णय लिया है। 5 अप्रैल 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक के बाद, इन देशों ने कुल 2,06,000 बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि को लागू करने की घोषणा की है। इस सामूहिक कदम का नेतृत्व सऊदी अरब और रूस करेंगे, जो इस अतिरिक्त उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बाजार में उतारेंगे। यह निर्णय मौजूदा वैश्विक बाजार स्थितियों और भविष्य की ऊर्जा मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
उत्पादन वृद्धि का संदर्भ और प्रमुख आंकड़े
पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह वृद्धि उन स्वैच्छिक कटौतियों में एक क्रमिक समायोजन है जो पूर्व में लागू की गई थीं। विशेष रूप से, अप्रैल 2023 में जो 1.65 मिलियन बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती घोषित की गई थी, उसी में से अब 2,06,000 बैरल प्रतिदिन को बाजार में वापस लाया जा रहा है। यह वापसी बाजार की बदलती परिस्थितियों के आधार पर क्रमिक रूप से की जाएगी।
इस नई नीति के तहत विभिन्न देशों का मई 2026 के लिए नया उत्पादन लक्ष्य इस प्रकार निर्धारित किया गया है:
- सऊदी अरब और रूस: ये दोनों प्रमुख देश 62-62 kbd की सर्वाधिक वृद्धि करेंगे। इसके बाद मई के लिए सऊदी अरब का आवश्यक उत्पादन लक्ष्य 10,228 kbd और रूस का 9,699 kbd हो जाएगा।
- इराक और यूएई: इराक अपने उत्पादन में 26 kbd का इजाफा करेगा, जिससे उसका लक्ष्य 4,326 kbd होगा। वहीं, यूएई 18 kbd की वृद्धि के साथ 3,447 kbd का उत्पादन करेगा।
- कुवैत और अन्य देश: कुवैत 16 kbd की वृद्धि करेगा, जिससे उसका नया लक्ष्य 2,612 kbd हो जाएगा। इसके अलावा कजाकिस्तान 10 kbd, अल्जीरिया 6 kbd और ओमान 5 kbd का अतिरिक्त तेल उत्पादन करेंगे, जिससे उनका नया लक्ष्य क्रमशः 1,589 kbd, 983 kbd और 821 kbd तय किया गया है।
ऊर्जा आपूर्ति शृंखला और भू-राजनीतिक चुनौतियां
उत्पादन के आंकड़ों से आगे बढ़ते हुए, ओपेक+ के इन आठ देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और समुद्री शिपिंग मार्गों की सुरक्षा पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल के समय में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के संदर्भ में समूह ने स्पष्ट किया कि क्षतिग्रस्त ऊर्जा संपत्तियों को पूरी क्षमता में बहाल करना अत्यंत खर्चीला और समय लेने वाला काम है। इसका सीधा असर समग्र आपूर्ति उपलब्धता और वैश्विक बाजार पर पड़ता है।
समूह ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचे पर हमलों या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार के व्यवधान से बाजार में अस्थिरता बढ़ती है। इस तरह की कार्रवाइयां उत्पादकों, उपभोक्ताओं और संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लाभ के लिए बाजार स्थिरता का समर्थन करने वाले सामूहिक प्रयासों को कमजोर करती हैं।
आगे का रास्ता और बाजार का दृष्टिकोण
सऊदी अरब, रूस और अन्य भागीदार देशों ने स्पष्ट किया है कि वे बाजार की स्थितियों का बारीकी से आकलन करना जारी रखेंगे। बाजार में स्थिरता बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत, उन्होंने एक सतर्क दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। तेल उत्पादक देशों ने अपनी नीति में पूरी तरह लचीलापन बनाए रखा है; अर्थात्, यदि परिस्थितियां बदलती हैं, तो स्वैच्छिक उत्पादन समायोजन के चरणबद्ध तरीके को रोका या वापस भी लिया जा सकता है। इसमें नवंबर 2023 में घोषित 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती के फैसले को पलटने का विकल्प भी शामिल है।
उत्पादन अनुशासन और 2024 की शुरुआत से दर्ज किए गए किसी भी अधिक उत्पादन के मुआवजे की निगरानी के लिए ये देश नियमित रूप से मासिक बैठकें करेंगे। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अगली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक 3 मई, 2026 को निर्धारित की गई है।