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PMI: देश के सेवा क्षेत्र की रफ्तार मार्च में धीमी; पीएमआई घटकर 57.5 पर पहुंचा, 14 महीनों में सबसे कमजोर वृद्धि

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Mon, 06 Apr 2026 11:15 AM IST
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सार

भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि मार्च में धीमी होकर पीएमआई 57.5 पर आ गई, जो 14 महीनों का सबसे कमजोर स्तर है, हालांकि यह अब भी विस्तार दर्शाता है। नए कारोबार की रफ्तार घटी, जबकि निर्यात मांग मजबूत रही। आइए विस्तार से जानते हैं।

India's services sector slows in March; PMI falls, weakest growth in 14 months
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार

भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे धीमा विस्तार है। हालांकि, सूचकांक अब भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि जारी है।

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पीएमआई (Purchasing Managers' Index) एक आर्थिक सूचकांक है, जो बताता है कि किसी देश के उद्योग या सेवा क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे कंपनियों के खरीद प्रबंधकों (Purchasing Managers) से सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है।

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कैसे समझें?

  • 50 से ऊपर- आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है 
  • 50 से नीचे- गतिविधि घट रही है
  • 50 के आसपास- स्थिर स्थिति

क्या है ये सुस्ती की वजह?

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की इस सुस्ती की प्रमुख वजह नए कारोबार की रफ्तार में कमी रही। मार्च में नए ऑर्डर जनवरी 2025 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। वित्त, रियल एस्टेट और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही।


हालांकि, निर्यात मांग ने राहत दी। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी ऑर्डर लगभग रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए, जिनमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका से मजबूत मांग देखने को मिली।

सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का नकारात्मक असर बाजार स्थितियों, मांग और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा, जिससे कुल कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ।

निर्यात आधारित मांग से सेक्टर को सहारा मिला

एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मार्च में सेवा क्षेत्र विस्तार में बना रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने वृद्धि की रफ्तार कमजोर हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात आधारित मांग मजबूत रही, जिससे सेक्टर को सहारा मिला।

महंगाई को लेकर चिंता

रिपोर्ट में महंगाई के दबाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनपुट लागत लगभग चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका कारण ईंधन, परिवहन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी है।

इसके बावजूद, कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। करीब 12 वर्षों में पहली बार कारोबारियों ने उत्पादन को लेकर इतनी सकारात्मक उम्मीद जताई है, जो आने वाले समय में मांग और बाजार परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद पर आधारित है।

कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जो आगे के महीनों में चुनौती बन सकता है।
 

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