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Iran War: भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा ने होर्मुज किया पार, तनाव के बीच अब तक आठ जहाज आ चुके भारत

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Mon, 06 Apr 2026 12:17 PM IST
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सार

खाड़ी में तनाव के बीच भारतीय एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सफलतापूर्वक पार किया। 28 फरवरी के बाद यह इस मार्ग से गुजरने वाला नौवां भारतीय जहाज है, जो जोखिमों के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति बनाए रहने का संकेत देता है।

A major relief for India, the ninth ship, Green Asha, safely crosses the Strait of Hormuz amid tensions
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PIB
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विस्तार

एलपीजी आपूर्ति के मोर्चे पर भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला जहाज ग्रीन आशा ईरान के समीप स्थित अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर चुका है।

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खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद यह इस मार्ग से गुजरने वाला भारत का नौवां जहाज है। अमेरिका और इस्राइल के साथ बढ़े संघर्ष के बाद ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की खबरों के बीच यह ट्रांजिट खास महत्व रखता है।

होर्मुज क्यों है इतना अहम?

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित करता है।

ग्रीन आशा से पहले आठ जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं

रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रीन आशा एक एलपीजी टैंकर है और मौजूदा जोखिमों के बावजूद इसका सुरक्षित पार होना इस क्षेत्र पर भारत की लगातार निर्भरता को दर्शाता है। तनाव के चलते वैश्विक ईंधन आपूर्ति शृंखला पर दबाव बना हुआ है और ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। समुद्री आंकड़ों के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले करीब 60 प्रतिशत जहाजों का संबंध ईरान से है या तो वे वहां से आते हैं या वहां के लिए जाते हैं। इन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही बनी हुई है। ग्रीन आशा से पहले भी आठ भारतीय जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं। इनमें एलपीजी वाहक बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिन्होंने संघर्ष क्षेत्र से लगभग 94,000 टन कार्गो ढोया।

मार्च के अंत में पाइन गैस और जग वसंत समेत चार भारतीय एलपीजी टैंकरों ने तीन दिनों में 92,600 टन से अधिक एलपीजी की आपूर्ति की। वहीं, इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों तक करीब 92,700 टन एलपीजी पहुंचाई थी।

अन्य शिपमेंट में कच्चे तेल और ईंधन का परिवहन भी शामिल रहा। तेल टैंकर जग लाडकी ने संयुक्त अरब अमीरात से मुंद्रा तक 80,000 टन से ज्यादा कच्चा तेल पहुंचाया, जबकि जग प्रकाश ओमान से अफ्रीकी बाजारों के लिए गैसोलीन लेकर इसी मार्ग से गुजरा।

इसके अलावा, एलपीजी टैंकर ग्रीन सानवी ने भी हाल ही में लगभग 46,650 मीट्रिक टन कार्गो के साथ अपनी यात्रा पूरी की, जो इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिशों को दर्शाता है।

(इनपुट आईएनएस से)

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