Biz Updates: बंदरगाहों ने 91.5 करोड़ टन कार्गो का परिवहन कर रचा इतिहास, पीएम मोदी ने सराहा; जानें अपडेट
देश के बंदरगाहों ने समुद्री परिवहन क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पत्तन, पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय के तहत आने वाले प्रमुख बंदरगाहों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 91.517 करोड़ टन कार्गो हैंडल कर 90.4 करोड़ टन के लक्ष्य को पार कर लिया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.06 फीसदी अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर देश की समुद्री विरासत से जुड़े लोगों के अमूल्य योगदान की सराहना की। दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण 16.011 करोड़ टन कार्गो के साथ सबसे आगे रहा है जबकि पारादीप पोर्ट अथॉरिटी 15.645 करोड़ टन के साथ दूसरे और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण 10.201 करोड़ टन के साथ तीसरे नंबर पर रहा है। इसके अलावा, विशाखापत्तनम बंदरगाह प्राधिकरण, मुंबई पोर्ट अथॉरिटी, चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और नूतन मंगलूरु पत्तन प्राधिकरण ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। इससे कुल कार्गो हैंडलिंग में बड़ा योगदान मिला। वृद्धि दर में भी प्रमुख बंदरगाहों ने बेहतर प्रदर्शन किया। पीएम ने सोशल मीडिया में लिखा, समुद्री क्षेत्र में कार्यरत लोगों का समर्पण देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और संपर्क को मजबूत करता है।
विदेशी निवेशकों ने दो सत्र में बेच दिए 19,837 करोड़ रुपये के शेयर
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की पूंजी निकासी का सिलसिला अप्रैल में भी जारी है। अप्रैल के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही एफपीआई ने 19,837 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इस ताजा बिकवाली के साथ एफपीआई 2026 में अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। एफपीआई ने इससे पहले मार्च में घरेलू शेयर बाजार से करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी की थी। यह एफपीआई की निकासी के लिहाज से सबसे खराब महीना था। हालांकि, फरवरी ने इन्होंने बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 महीने में सबसे ज्यादा था। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, अमेरिका में बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ने की वजह से निश्चित आय वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है। ऐसे में निवेशक अपने निवेश को शेयरों से अन्य संपत्तियों की ओर संतुलित कर रहे हैं।
हवाई यात्रियों के लिए बने अधिकार चार्टर, संसदीय समिति की सिफारिश
भारत में हर साल 35 करोड़ से ज्यादा लोग हवाई यात्रा करते हैं, लेकिन यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं है। इसे देखते हुए संसदीय समिति ने सरकार से एक औपचारिक यात्री अधिकार चार्टर बनाने की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि अगर उड़ान तय समय से ज्यादा देर हो या रद्द हो जाए, तो यात्रियों को मुआवजा मिलना चाहिए। उड़ान में खराब सेवा मिलने पर रिफंड अनिवार्य होना चाहिए और सामान खोने या खराब होने पर तय नियम के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए। शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय हो और नियमों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी हो। समिति ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक स्वतंत्र विमानन लोकपाल बनाने पर भी जोर दिया है, ताकि यात्रियों की शिकायतों का निष्पक्ष समाधान हो सके। देश में पायलटों है कमी, 10 साल में 30 हजार की जरूरत पड़ेगी : रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में तेजी से बढ़ती उड़ानों के कारण पायलटों की कमी हो रही है। 2020 से 2024 के बीच करीब 5,700 पायलट लाइसेंस जारी किए गए।