Crude: होर्मुज तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, ट्रंप की धमकी से ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर पर पहुंचा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की चेतावनी के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट और अमेरिकी कच्चा तेल दोनों में बढ़ोतरी दर्ज हुई। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।
वहीं रवीवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% बढ़कर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) में 1.8% की तेजी आई और यह 113.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज को तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठा सकता है।
इस बयान के जवाब में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। उनका कहना था कि जब तक युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा।
कूटनीतिक कोशिशें जारी
तनाव के बीच ओमान ने मध्यस्थता की पहल की है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधियों ने रविवार को ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के संभावित विकल्पों पर चर्चा हुई।
ओपेक+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला
इस बीच, वैश्विक आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए ओपेक+ और सहयोगी देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान सहित आठ देशों ने मई 2026 से प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल (kbd) उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है।
इस योजना के तहत:
- सऊदी अरब और रूस: 62-62 kbd
- इराक: 26 kbd
- यूएई: 18 kbd
- कुवैत: 16 kbd
- कजाखस्तान: 10 kbd
- अल्जीरिया: 6 kbd
- ओमान: 5 kbd
ओपेक+ ने कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है और उत्पादन में बदलाव परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, ओपेक+ की उत्पादन वृद्धि इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है।