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आरबीआई का बड़ा एक्शन: 150 एनबीएफसी कंपनियों के लाइसेंस रद्द, अब नहीं कर पाएंगी पैसों का लेन-देन

अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 15 May 2026 04:23 AM IST
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सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कड़ा कदम उठाते हुए 150 एनबीएफसी कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इनमें सबसे अधिक कंपनियां दिल्ली (67) और पश्चिम बंगाल (75) की हैं। आरबीआई के मुताबिक, ये कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रही थीं या निष्क्रिय हो चुकी थीं। वहीं, सात कंपनियों ने स्वेच्छा से अपना लाइसेंस लौटा दिया है।

RBI Takes Major Action Licenses of 150 NBFCs Cancelled They Can No Longer Conduct Financial Transactions
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : ANI
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विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश की वित्तीय व्यवस्था को सुधारने और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देशभर में काम कर रही 150 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का पंजीकरण तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि ये कंपनियां अब बाजार में लोन देने या निवेश करने जैसे कोई भी वित्तीय काम नहीं कर पाएंगी। आरबीआई की इस सख्ती से उन कंपनियों में हड़कंप मच गया है जो नियमों की अनदेखी कर रही थीं या जिनका कामकाज मानकों के अनुरूप नहीं था।
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किन शहरों की कंपनियों पर गिरी सबसे ज्यादा गाज?
आरबीआई द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस कार्रवाई की सबसे बड़ी मार दिल्ली और पश्चिम बंगाल की कंपनियों पर पड़ी है। रद्द किए गए 150 लाइसेंसों में से करीब 67 कंपनियां अकेले दिल्ली में पंजीकृत थीं, जिनमें अकिन विंकॉम, बृहस्पति फाइनेंसर्स और विराट फिनवेस्ट जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल की भी लगभग 75 कंपनियों के लाइसेंस छीन लिए गए हैं, जिनमें अबीर ट्रेडर्स और ब्लू डायमंड सिक्योरिटीज जैसी संस्थाएं आती हैं। इनमें से ज्यादातर ऐसी छोटी और मझोली कंपनियां थीं जो कर्ज देने और निवेश के धंधे से जुड़ी हुई थीं।
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आरबीआई ने इन कंपनियों का पंजीकरण क्यों रद्द किया?
रिजर्व बैंक की जांच में यह बात सामने आई कि इनमें से कई एनबीएफसी ने अपना कामकाज काफी समय पहले ही बंद कर दिया था। इसके अलावा, कुछ कंपनियां ऐसी थीं जो बिना उचित पंजीकरण के ही निवेश के काम कर रही थीं। आरबीआई का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र में केवल उन्हीं संस्थाओं को रहने का हक है जो सरकारी नियमों और अनुशासन का पूरी तरह पालन करती हैं। बैंकिंग लाइसेंस न होने के बावजूद ये कंपनियां वित्तीय सेवाएं देती हैं, इसलिए इनकी कड़ी निगरानी करना जरूरी है ताकि आम जनता का पैसा सुरक्षित रहे।

क्या कुछ कंपनियों ने खुद से ही अपना लाइसेंस वापस कर दिया?
इस बड़ी कार्रवाई के बीच एक खास बात यह भी रही कि सात कंपनियों ने अपनी मर्जी से आरबीआई को अपना लाइसेंस लौटा दिया है। इन कंपनियों में गुरु कृपा फिनवेस्ट और गजराज सिक्योरिटीज जैसे नाम शामिल हैं। स्वेच्छा से लाइसेंस लौटाने वाली इन सात कंपनियों में से दो-दो दिल्ली और पश्चिम बंगाल की हैं, जबकि एक-एक कंपनी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से है। इसके अलावा, एचडीएफसी होल्डिंग्स लिमिटेड का लाइसेंस इसलिए रद्द किया गया क्योंकि कंपनी का दूसरी संस्था में विलय हो गया था और अब उसका अपना कोई कानूनी वजूद नहीं बचा था।

इस फैसले का आम जनता और बाजार पर क्या असर होगा?
आरबीआई के इस कड़े फैसले का उद्देश्य एनबीएफसी सेक्टर में पारदर्शिता लाना और नियमों को सख्त बनाना है। बैंक अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बाजार में केवल वही कंपनियां सक्रिय रहें जो ईमानदार हों और ग्राहकों के हितों का ध्यान रखें। आने वाले समय में एनबीएफसी के लिए निगरानी और कागजी कार्यवाही को और अधिक कठिन किया जा सकता है। इससे धोखाधड़ी की गुंजाइश कम होगी और लोगों का भरोसा इन वित्तीय संस्थानों पर बढ़ेगा। जो कंपनियां केवल नाम के लिए चल रही थीं, उनका रास्ता अब पूरी तरह बंद हो चुका है।

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