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The Bonus Market Update: सेंसेक्स 550 अंक टूटा? निफ्टी 24250 से नीचे, क्या कच्चे तेल की उछाल से सहमा बाजार?

Wed, 08 Jul 2026 09:44 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 08 Jul 2026 09:44 AM IST
सार

ईरान-यूएस संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट का रुख दिखा। सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा टूटा। इस दौरान बीपीसीएल और इंडिगो के शेयर फिसल गए। पूरी खबर विस्तार से पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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सेंसेक्स ओपनिंग बेल - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी ने घरेलू बाजार का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया है। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में ही चौतरफा बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक और निफ्टी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आई गिरावट ने घरेलू निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। आइए समझते हैं कि इस गिरावट के पीछे की पूरी कहानी क्या है और आगे बाजार का क्या रुख रहेगा।

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बाजार में इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?

शेयर बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच नए सिरे से बढ़ा तनाव है। इस भू-राजनीतिक संघर्ष के बढ़ने से वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरी हो गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में अचानक जोरदार उछाल आया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए नकारात्मक संकेत मानी जाती है।

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आंकड़ों के आइने में कैसा रहा सेंसेक्स और निफ्टी का हाल?

बुधवार सुबह 09:32 बजे के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार के दोनों बेंचमार्क इंडेक्स भारी बिकवाली के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे:

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  • सेंसेक्स: 549.79 अंक यानी 0.70% की बड़ी गिरावट के साथ 77,630.93 के स्तर पर आ गया।
  • निफ्टी: 173.71 अंक यानी 0.71% टूटकर 24,225.00 के स्तर पर आ गया, जो 24,250 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है।
  • रुपया: शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 95.17 पर आ गया।

किन सेक्टर्स और शेयरों पर पड़ा कच्चे तेल की कीमतों का सबसे बुरा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी का सबसे पहला और सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ा है जिनके कामकाज में ईंधन या कच्चे तेल का सीधा इस्तेमाल होता है:

  • बीपीसीएल: ऑयल मार्केटिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का शेयर सबसे अधिक प्रभावित हुआ और इसमें 4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
  • इंडिगो: एविएशन सेक्टर की प्रमुख कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में भी 2% की कमजोरी देखी गई। तेल की बढ़ी कीमतों से एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) महंगा होने की आशंका ने इस शेयर पर दबाव बनाया।

इस उठापटक के बीच वैश्विक बाजारों का क्या रुख रहा?

पश्चिम एशिया के इस संकट के बीच दुनिया भर के अन्य शेयर बाजारों में मिला-जुला और उतार-चढ़ाव भरा रुख देखा गया:

  • एशियाई बाजार: जापान के टोपिक्स इंडेक्स में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 इंडेक्स भी 1.1% टूट गया। हालांकि, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स इन विपरीत परिस्थितियों में भी 1.5% की तेजी दिखाने में सफल रहा। वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स लगभग सपाट (बिना किसी बदलाव के) रहा।
  • अमेरिकी और यूरोपीय बाजार: अमेरिकी बाजारों में S&P 500 फ्यूचर्स और यूरोपीय बाजारों में यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में बहुत मामूली हलचल देखी गई और ये दोनों लगभग स्थिर स्तरों पर कारोबार कर रहे थे।

आगे बाजार की दिशा क्या होगी और विश्लेषकों की क्या राय है?

भले ही मौजूदा वैश्विक तनाव के कारण बाजार में अल्पकालिक गिरावट आई है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार अपनी बुनियादी मजबूती के कारण धीरे-धीरे सकारात्मक रुख बनाए रखेंगे। आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से इन तीन बड़े कारकों पर निर्भर करेगी:

  1. तिमाही नतीजे: जून तिमाही के लिए कंपनियों द्वारा पेश किए जाने वाले नए बिजनेस अपडेट्स।
  2. व्यापार समझौता: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर होने वाली प्रगति।
  3. मानसून की रफ्तार: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की गति और इसका कवरेज।

ईरान-यूएस संघर्ष ने भले ही कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाकर भारतीय शेयर बाजार को अस्थायी झटका दिया है, लेकिन घरेलू बाजार की नजरें अब मानसून की प्रगति और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसी घरेलू और द्विपक्षीय सकारात्मक खबरों पर टिकी हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए घबराहट में कोई फैसला न लें और कंपनियों के जून तिमाही के नतीजों पर नजर बनाए रखें।

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