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Saudi Arabia: 26 साल की सबसे बड़ी कटौती, सऊदी अरब ने सस्ता किया कच्चा तेल; भारत को कितना होगा फायदा?
Tue, 07 Jul 2026 09:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, रियाद
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, रियाद
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 07 Jul 2026 09:35 AM IST
सार
सऊदी अरब ने अगस्त के लिए कच्चे तेल की कीमत में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है। इससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है। लेकिन आखिर सऊदी अरब ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? क्या इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा और महंगाई पर कितना असर पड़ेगा? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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सऊदी अरब
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमत में 26 वर्षों की सबसे बड़ी कटौती कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को चौंका दिया है। अगस्त के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की गई है। इससे पहले जुलाई के लिए भी 6 डॉलर प्रति बैरल की कटौती की गई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से सामान्य होने के बाद तेल की आपूर्ति बढ़ गई है और बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है, जो अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करते हैं।
सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत ओमान-दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है। वहीं ओपेक+ और उसके सहयोगी देशों, जिनमें रूस भी शामिल है, ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे पहले जून और जुलाई में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। बढ़ती आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 71.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बाजार का मानना है कि अधिक आपूर्ति के चलते तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
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सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत ओमान-दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है। वहीं ओपेक+ और उसके सहयोगी देशों, जिनमें रूस भी शामिल है, ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। इससे पहले जून और जुलाई में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। बढ़ती आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 71.7 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। बाजार का मानना है कि अधिक आपूर्ति के चलते तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
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सऊदी अरब ने इतनी बड़ी कटौती क्यों की?
- वैश्विक तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
- फारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ा दिया है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर सामान्य हो गई है।
- सऊदी अरब का कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गया है।
- संयुक्त अरब अमीरात ने भी तेल की आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी है।
- ओपेक+ देशों ने अगस्त से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
- अधिक आपूर्ति के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
- एशियाई ग्राहकों को आकर्षित करने और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए कीमतें घटाई गई हैं।
- उद्देश्य दूसरे तेल उत्पादक देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बने रहना है।
भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से भारतीय रिफाइनरियों की लागत घट सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर पड़ने वाला वित्तीय दबाव कम होगा। तेल विपणन कंपनियों को पिछले कुछ समय से बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बेचने और एलपीजी पर नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब सस्ता कच्चा तेल इन कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है। साथ ही सरकार पर एलपीजी सब्सिडी का बोझ भी घटने की संभावना है।
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