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कैसे मारे गए नेतन्याहू के भाई?: 102 बंधकों को छुड़ाने वाला सबसे बड़ा ऑपरेशन, 50 साल बाद पायलट ने सुनाई कहानी

Tue, 07 Jul 2026 09:20 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 07 Jul 2026 09:20 AM IST
सार

Operation Thunderbolt Story: 50 साल पहले इस्राइल ने युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर ऐसा सैन्य अभियान चलाया, जिसे दुनिया के सबसे साहसी बंधक बचाव अभियानों में गिना जाता है। इस ऑपरेशन में 102 बंधकों को छुड़ाया गया, लेकिन मौजूदा इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातान नेतन्याहू ने अपनी जान गंवा दी थी। आखिर यह ऑपरेशन कैसे हुआ, इसकी योजना किसने बनाई और आज भी इसे सैन्य इतिहास में मिसाल क्यों माना जाता है? आइए, सब विस्तार से जानते हैं...

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Operation Entebbe Explained The Daring Hostage Rescue That Changed Counter-Terrorism Forever
नेतन्याहू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दुनिया के सबसे चर्चित बंधक बचाव अभियानों में शामिल 'ऑपरेशन एंटेबे' या 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' को 50 साल पूरे हो गए हैं। वर्ष 1976 में इस्राइल ने युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर हजारों किलोमीटर दूर जाकर ऐसा सैन्य अभियान चलाया, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इस ऑपरेशन में 102 बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया था, लेकिन अभियान का नेतृत्व कर रहे विशेष बल के कमांडर और मौजूदा इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातान 'योनी' नेतन्याहू शहीद हो गए थे। अब इस अभियान के प्रमुख पायलट ब्रिगेडियर जनरल जोशुआ शानी ने 50 साल बाद इससे जुड़ी कई अहम बातें साझा की हैं।

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ऑपरेशन की 50वीं वर्षगांठ पर एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में जोशुआ शानी ने कहा कि उन्हें आज भी उस मिशन का हर पल याद है। उनके मुताबिक, सरकार की औपचारिक मंजूरी मिलने से पहले ही इस्राइली वायुसेना ने संभावित सैन्य अभियान की तैयारी शुरू कर दी थी। उनकी सी-130 हरक्यूलिस विमान स्क्वाड्रन ने करीब 4000 किलोमीटर लंबे मार्ग, ईंधन, रडार से बचने की रणनीति और उपलब्ध खुफिया जानकारियों का अध्ययन किया। इसी तैयारी की वजह से सरकार के सामने बातचीत के अलावा सैन्य कार्रवाई का विकल्प रखा जा सका।

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बंधक संकट की शुरुआत कैसे हुई?

यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ, जब तेल अवीव से पेरिस जा रहे एयर फ्रांस के एक विमान का फलस्तीनी और जर्मन आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया। विमान को युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां उस समय ईदी अमीन का शासन था। आतंकवादियों ने गैर-इस्राइली यात्रियों को छोड़ दिया, लेकिन 100 से अधिक इस्राइली और यहूदी बंधकों को अपने कब्जे में रखा। इससे इस्राइल के सामने दो विकल्प थे। पहला, आतंकवादियों की मांगें मान ली जाएं। दूसरा, सैन्य कार्रवाई कर बंधकों को छुड़ाया जाए।

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ऑपरेशन एंटेबे कैसे अंजाम दिया गया?

जोशुआ शानी के अनुसार, चार सी-130 हरक्यूलिस परिवहन विमान बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अफ्रीका के ऊपर से युगांडा पहुंचे, ताकि दुश्मन के रडार उन्हें पकड़ न सकें। रात के अंधेरे में विमानों की लैंडिंग कराई गई और विशेष बल के जवान सीधे टर्मिनल भवन तक पहुंचे। अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल योनातान 'योनी' नेतन्याहू कर रहे थे। जमीन पर कार्रवाई के दौरान सभी आतंकवादी मार गिराए गए और 102 बंधकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि इस अभियान में योनी नेतन्याहू, तीन बंधकों और कुछ युगांडाई सैनिकों की मौत हो गई।

योनी नेतन्याहू का नाम आज भी क्यों लिया जाता?

जोशुआ शानी ने बताया कि वह योनी नेतन्याहू को पहले से जानते थे और मिशन की योजना के दौरान कई बार उनसे मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि योनी बेहद साहसी और दृढ़ निश्चयी अधिकारी थे। उनका काम विशेष बलों का नेतृत्व करना था, जबकि शानी की जिम्मेदारी सैनिकों को सुरक्षित एंटेबे तक पहुंचाना थी। शानी ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा यहूदियों और इस्राइलियों को बाकी यात्रियों से अलग करना इस्राइल के लोगों को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ऑशविट्ज़ में हुई घटनाओं की याद दिलाता था। यही वजह थी कि इस्राइल ने आतंकवादियों के सामने झुकने के बजाय सैन्य कार्रवाई का फैसला किया।

50 साल बाद इस अभियान से क्या सीख मिलती?

जोशुआ शानी का कहना है कि ऑपरेशन एंटेबे की सबसे बड़ी सीख यह है कि लोकतांत्रिक देशों को आतंकवाद के सामने झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आज पूरी तरह बदल चुकी है। उस समय उनके दल को कई बार तारों के सहारे दिशा तय करनी पड़ती थी, जबकि आज उपग्रह और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम उपलब्ध हैं। इसके बावजूद मिशन की सफलता का सबसे बड़ा आधार तैयारी, साहस और स्पष्ट उद्देश्य होता है। उन्होंने भारत और इस्राइल के बढ़ते रक्षा तथा आतंकवाद-रोधी सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और भविष्य में भी दोनों कई क्षेत्रों में साथ काम करेंगे।

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