Canada: अमेरिका को टक्कर देने के लिए कनाडा कौन सा गठबंधन बना रहा? जेपी मॉर्गन CEO हो गए नाराज, सुनाई खरी-खोटी
Canada On SuperPower Countries: कनाडा आखिर क्यों अमेरिका जैसी महाशक्तियों के मुकाबले मध्यम ताकत वाले देशों का नया गठबंधन बनाना चाहता है। पीएम कार्नी का यही प्रस्ताव अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अमेरिका के सबसे बड़े बैंक जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी ने इसे अव्यावहारिक बता दिया। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या सिर्फ देशों का साथ आना काफी है या मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेश का माहौल ही असली ताकत है। विस्तार से जानिए...
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दुनिया की बदलती राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच अब हर देश खुद को ताकतवर बनाने में लगा है। इसी कड़ी में अब कनाडा भी आ गया है। हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री ने अमेरिका से टक्कर ने लेने के लिए एक नया मोर्चा बनाने की तैयारी शुरू की है। अमेरिका जैसी बड़ी ताकतों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए वो मध्यम ताकत यानी मिडिल पावर वाले देशों के बीच मजबूत साझेदारी का विचार रखा है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का मानना है कि ऐसे देशों को व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहिए। हालांकि अमेरिका के सबसे बड़े बैंक जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन ने इस सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल गठबंधन बनाने से कोई देश मजबूत नहीं बन जाता। खैर, आइए अब विस्तार से जानते कि डिमन ने क्या कहा है, साथ ही ये भी समझेंगे कि क्या कार्नी का प्लान सिर्फ एक कोरी कल्पना है?
मार्क कार्नी ने कहां कही थी ये बात?
मार्क कार्नी ने यह विचार इस साल दावोस में रखा था। उनका कहना था कि दुनिया में बढ़ते व्यापारिक तनाव, टैरिफ, सप्लाई चेन में रुकावट और बड़ी शक्तियों के आर्थिक दबाव से निपटने के लिए मध्यम ताकत वाले देशों को एकजुट होना होगा। उनका मानना है कि इससे छोटे और मध्यम देशों की आवाज मजबूत होगी और वे वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे। लेकिन जेमी डिमन ने इस सोच को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि केवल सहयोग की बात करना काफी नहीं है।
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जेमी डिमन ने क्यों खारिज किया कार्नी का प्लान?
जेमी डिमन ने कहा कि अगर केवल देशों का साथ आना ही समाधान होता तो यूरोप आज दुनिया की सबसे मजबूत आर्थिक ताकतों में शामिल होता। उन्होंने कहा कि यूरोप पहले से ही कई देशों का बड़ा समूह है, लेकिन इसके बावजूद उसकी प्रतिस्पर्धा क्षमता लगातार कमजोर हुई है। डिमन के अनुसार पहले यूरोप की अर्थव्यवस्था अमेरिका की लगभग 90 प्रतिशत थी, जो अब घटकर करीब 70 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसके लिए अधिक टैक्स, कड़े नियम और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों की कमी को जिम्मेदार बताया।
क्या कुछ बोले जेपी मॉर्गन के सीईओ?
जेपी मॉर्गन के सीईओ का कहना है कि किसी भी देश या क्षेत्र की सफलता केवल राजनीतिक सहयोग से तय नहीं होती। सरकारों को ऐसा माहौल तैयार करना पड़ता है जहां उद्योग, निवेशक और कंपनियां आसानी से निवेश कर सकें। उन्होंने कहा कि अमेरिका का शेयर बाजार यूरोप की तुलना में कहीं बड़ा है क्योंकि वहां ऐसी नीतियां बनाई गई हैं जो निवेश और कारोबार को बढ़ावा देती हैं। उनका सुझाव था कि यूरोप को नए राजनीतिक समूह बनाने के बजाय सेवाओं में खुला व्यापार और साझा बाजार को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
कनाडा आखिर ऐसा गठबंधन क्यों बनाना चाहता है?
मार्क कार्नी का मानना है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। बड़े देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर छोटे और मध्यम देशों पर भी पड़ रहा है। ऐसे में अगर समान सोच वाले देश एक साथ आएंगे तो वे टैरिफ, सप्लाई चेन संकट और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों का बेहतर सामना कर पाएंगे। उनका कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर संतुलन भी बनेगा और किसी एक महाशक्ति पर निर्भरता कम होगी।
चीन और अमेरिका को लेकर डिमन ने क्या संदेश दिया?
हाल ही में जेमी डिमन ने निवेशकों से कहा कि अमेरिका अब भी निवेश के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। उन्होंने माना कि चीन ने हाल के वर्षों में दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों में अधिक स्थिरता दिखाई है और इस बदलाव पर दुनिया के कारोबारी नेताओं की नजर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक व्यापार में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच कई देशों के नेता चीन के साथ व्यापार और सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में कनाडा का नया सहयोग मॉडल और उस पर अमेरिका के प्रमुख कारोबारी नेता की आलोचना वैश्विक आर्थिक बहस को और तेज कर रही है।