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NATO: ट्रंप का दबाव या रूस का खतरा? रक्षा बजट बढ़ाने पर नाटो का सख्त संदेश, कौन से देशों की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Tue, 07 Jul 2026 08:17 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 07 Jul 2026 08:17 AM IST
सार

नाटो प्रमुख मार्क रुटे ने सदस्य देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद योजना पेश करने को कहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी लगातार यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर अधिक खर्च करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर नाटो में रक्षा बजट को लेकर इतनी सख्ती क्यों दिखाई जा रही? कहीं, इसके पीछे ट्रंप का दबाव तो नहीं, या फिर रूस का खतरा। साथ ही ये भी जानेंगे कि अगर बजट बढ़ता है तो फिर कौन से देशों की मुश्किलें बढ़ेंगी? आइए, विस्तार से जानते हैं...

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NATO Chief Demands Credible Defence Spending Plans Ahead of Ankara Summit which countries oppose and support
नाटो। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दुनिया में बढ़ते सुरक्षा संकट और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच नाटो ने अपने सदस्य देशों को स्पष्ट संदेश दिया है। तुर्किये की राजधानी अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से पहले संगठन के महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि सभी सदस्य देश रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए स्पष्ट, ठोस और भरोसेमंद योजना पेश करें। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी लगातार यूरोपीय सहयोगियों से अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने और रक्षा बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
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नाटो का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन मंगलवार से अंकारा में शुरू होगा। इस बैठक में 32 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे। पिछले वर्ष सदस्य देशों ने रक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कुल पांच प्रतिशत खर्च करने के लक्ष्य पर सहमति जताई थी। इसमें 3.5 प्रतिशत राशि सीधे रक्षा बजट पर और 1.5 प्रतिशत सड़क, पुल, बंदरगाह जैसी सैन्य ढांचागत सुविधाओं के विकास पर खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि संकट के समय सेना और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
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ट्रंप का दबाव या रूस का खतरा?

नाटो देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव दो बड़े कारणों से बढ़ा है। पहला, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा खतरे पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गए हैं और नाटो को अपनी सैन्य तैयारियां मजबूत करनी पड़ रही हैं। दूसरा, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक खर्च करना चाहिए और अमेरिका पर निर्भरता कम करनी चाहिए। ट्रंप का मानना है कि सुरक्षा का पूरा बोझ अमेरिका अकेले नहीं उठा सकता। ऐसे में रूस से बढ़ते खतरे और ट्रंप के दबाव, दोनों ने नाटो सदस्य देशों को रक्षा खर्च बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।
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क्या सभी देश पांच प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य से सहमत?

हालांकि सभी सदस्य देश इस लक्ष्य तक नहीं पहुंचे हैं। स्पेन ने लक्ष्य का समर्थन तो किया है, लेकिन उसका कहना है कि वह पांच प्रतिशत खर्च किए बिना भी नाटो की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। वहीं कई देश अब तक पुराने 2 प्रतिशत जीडीपी रक्षा खर्च के लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाए हैं। ऐसे में नाटो नेतृत्व चाहता है कि हर सदस्य देश यह बताए कि वह तय लक्ष्य तक कब और कैसे पहुंचेगा।

अगर कोई देश लक्ष्य पूरा नहीं करेगा तो क्या होगा?

मार्क रुटे ने कहा कि जिन देशों के पास अभी तक स्पष्ट योजना नहीं है, उन्हें मनाने के तरीके नाटो के पास मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसे देशों के खिलाफ क्या कदम उठाए जा सकते हैं। दूसरी ओर, नाटो में अमेरिका के राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने हाल ही में कहा था कि ट्रंप चाहते हैं कि सभी सहयोगी देश तत्काल पांच प्रतिशत रक्षा खर्च की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले देशों के लिए अमेरिका के पास अलग रणनीति हो सकती है।

रक्षा खर्च बढ़ाने पर ट्रंप इतना जोर क्यों दे रहे?

ट्रंप लंबे समय से नाटो देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। उनका तर्क है कि यूरोप की सुरक्षा का सबसे बड़ा बोझ अमेरिका अकेले नहीं उठा सकता। उन्होंने पहले भी उन देशों की आलोचना की है, जो पर्याप्त रक्षा खर्च नहीं करते। हाल ही में उन्होंने नाटो सहयोगियों से अधिक निष्ठा की भी अपेक्षा जताई थी, खासकर ऐसे समय में जब कुछ देशों ने अमेरिका और इस्राइल से जुड़े सैन्य अभियानों में अपने सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति नहीं दी थी। नाटो का मानना है कि यूरोपीय देशों और कनाडा का संयुक्त रक्षा निवेश 2025 में पहले की तुलना में 258 अरब अमेरिकी डॉलर अधिक रहेगा, लेकिन यह बढ़ोतरी भी अमेरिका की अपेक्षाओं को पूरी तरह पूरा करेगी या नहीं, इस पर अभी सवाल बने हुए हैं।

कौन से देशों की बढ़ेंगी मुश्किलें?

कौन से देश जो अभी भी पांच प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य से काफी दूर?
  • स्पेन-   लक्ष्य का समर्थन किया, लेकिन कहा कि इतना खर्च किए बिना भी नाटो की जिम्मेदारियां निभा सकता है।
  • बेल्जियम- अब तक पुराने दो प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचने में भी संघर्ष कर रहा है।
  • इटली- रक्षा बजट बढ़ाने पर वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है।
  • कनाडा- रक्षा खर्च बढ़ा रहा है, लेकिन पांच प्रतिशत लक्ष्य से अभी काफी दूर है।
  • लक्जमबर्ग- छोटा रक्षा बजट होने के कारण बड़े लक्ष्य तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

कौन से देश पांच रक्षा खर्च बढ़ाने के पक्ष में हैं?
  • पोलैंड 
  • एस्टोनिया
  • लातविया
  • लिथुआनिया
  • फिनलैंड
  • ब्रिटेन
  • अमेरिका 

कौन से देश खुलकर सवाल उठा रहे या विरोध कर रहे?
  • स्पेन इसका सबसे प्रमुख विरोधी है। उसका कहना है कि पांच प्रतिशत खर्च किए बिना भी नाटो की सुरक्षा जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
  • कुछ अन्य यूरोपीय देशों ने भी आर्थिक बोझ और घरेलू बजट पर दबाव का हवाला देते हुए लक्ष्य हासिल करने में समय मांगा है, हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से लक्ष्य का विरोध नहीं किया है।

सबसे बड़ी चुनौती क्या?
  • कई देशों के लिए दो से सीधे पांच प्रतिशत जीडीपी तक रक्षा खर्च बढ़ाना आसान नहीं है।
  • बढ़ते रक्षा बजट का असर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर पड़ सकता है।
  • यही वजह है कि नाटो अब सभी देशों से केवल वादा नहीं, बल्कि स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप भी मांग रहा है।
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