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Explainer: कैसे ट्रंप के एक फोन ने खत्म कराया अमेरिकी खिलाड़ी पर लगा एक मैच का प्रतिबंध, क्यों खड़ा हुआ विवाद?
Tue, 07 Jul 2026 09:48 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 07 Jul 2026 09:48 AM IST
सार
ट्रंप ने अमेरिका के बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 16 के मुकाबले से पहले अमेरिकी टीम के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच की पाबंदी को खत्म कराने की कोशिश की। फीफा ने भी अमेरिकी खिलाड़ी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन की निष्पक्षता और नियमितता पर सवाल उठने लगे हैं।
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अमेरिका के दबाव में झुका फीफा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, इस बार मामला ईरान युद्ध या नाटो के आगामी सम्मेलन से जुड़ा नहीं है। इस बार मुद्दा है फीफा विश्व कप 2026 का, जिसका आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको मिलकर कर रहे हैं। चूंकि अमेरिका इस पूरे टूर्नामेंट का प्रमुख आयोजक है, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति और उनका प्रशासन भी इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। इस बीच ट्रंप से जुड़ा एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने फीफा की निष्पक्ष और न्यायपूर्ण संघ की छवि को ही खतरे में डाल दिया है।
यह घटनाक्रम है अमेरिका के एक खिलाड़ी को मिले रेड कार्ड और उससे जुड़ी पाबंदी को हटवाने के लिए ट्रंप की तरफ से की गई कोशिशों का। दरअसल, ट्रंप ने अमेरिका के बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 16 के मुकाबले से पहले अमेरिकी टीम के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच की पाबंदी को खत्म कराने की कोशिश की। चौंकाने वाली बात यह है कि फीफा ने भी अमेरिकी खिलाड़ी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन की निष्पक्षता और नियमितता पर सवाल उठने लगे हैं।
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यह घटनाक्रम है अमेरिका के एक खिलाड़ी को मिले रेड कार्ड और उससे जुड़ी पाबंदी को हटवाने के लिए ट्रंप की तरफ से की गई कोशिशों का। दरअसल, ट्रंप ने अमेरिका के बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 16 के मुकाबले से पहले अमेरिकी टीम के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच की पाबंदी को खत्म कराने की कोशिश की। चौंकाने वाली बात यह है कि फीफा ने भी अमेरिकी खिलाड़ी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन की निष्पक्षता और नियमितता पर सवाल उठने लगे हैं।
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आइये जानते हैं कि अमेरिका के स्ट्राइकर पर बेल्जियम के खिलाफ मैच से पहले पाबंदी लगी क्यों थी? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टीम के खिलाड़ी पर लगी पाबंदी हटवाने के लिए किस तरह की कोशिशें कीं? उनकी पूरी कोशिशों का घटनाक्रम क्या रहा? फीफा ने किस तरह अमेरिकी खिलाड़ी पर लगे प्रतिबंध के फैसले को वापस ले लिया? इसके पीछे क्या तर्क और नियम अपनाया गया? आइये जानते हैं...
अमेरिका के स्ट्राइकर बालोगुन पर क्यों लगी थी पाबंदी?
अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को राउंड ऑफ 32 में बॉस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मैच में सीधा रेड कार्ड मिला था। मैच के दौरान, बालोगुन ने बॉस्नियाई डिफेंडर तारिक मुहरेमोविच पर एक फाउल किया था। शुरुआत में रेफरी ने कोई फ्री-किक भी नहीं दी थी, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) की समीक्षा के बाद स्लो-मोशन रीप्ले में देखा गया कि बालोगुन का पैर मुहरेमोविच के टखने के ऊपरी हिस्से पर पड़ा था।
रेड कार्ड पर नियम।
- फोटो : अमर उजाला
इस गंभीर फाउल के कारण उन्हें सीधा रेड कार्ड दिखाया गया। फीफा के नियमों के तहत रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी पर खुद-ब-खुद एक मैच का प्रतिबंध लग जाता है, जिसके खिलाफ अपील भी नहीं की जा सकती। इसी नियम के कारण बालोगुन पर बेल्जियम के खिलाफ होने वाले अगले मैच के लिए पाबंदी लगाई गई थी। हालांकि, अब फीफा ने एक अप्रत्याशित फैसले में इस पाबंदी को निलंबित कर दिया, जिसके चलते विवाद गहरा गया है।
अमेरिकी खिलाड़ी पर लगी पाबंदी हटवाने में ट्रंप की क्या भूमिका?
अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच के प्रतिबंध को हटवाने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की एक बहुत बड़ी और अप्रत्याशित भूमिका रही। ट्रंप ने इस फैसले को पलटवाने के लिए व्हाइट हाउस के अधिकारियों के साथ मिलकर पर्दे के पीछे से एक पूरा अभियान चलाया।
1. फीफा अध्यक्ष को सीधा फोन
ट्रंप ने सीधे फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन किया और उनसे बालोगुन के निलंबन की समीक्षा करने की अपील की। द गार्डियन ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस फैसले को बदलवाने के लिए ट्रंप ने कम से कम तीन बार फीफा अध्यक्ष और उसके अधिकारियों से बात की।
2. व्हाइट हाउस में टास्क फोर्स ने संभाला मोर्चा
ट्रंप ने अपने सहयोगियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे किसी भी तरह से इस बैन को हटाने का रास्ता खो, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इस फैसले से अमेरिका के टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। व्हाइट हाउस के वर्ल्ड कप टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गिउलिआनी और वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्होंने भी फीफा से संवाद किया। लुटनिक तो मैच के दौरान इन्फेंटिनो के ठीक बगल में भी बैठे थे और उन्होंने इन्फेंटिनो के साथ हाल ही में मुलाकातें भी की थीं।
ट्रंप ने सीधे फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन किया और उनसे बालोगुन के निलंबन की समीक्षा करने की अपील की। द गार्डियन ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस फैसले को बदलवाने के लिए ट्रंप ने कम से कम तीन बार फीफा अध्यक्ष और उसके अधिकारियों से बात की।
2. व्हाइट हाउस में टास्क फोर्स ने संभाला मोर्चा
ट्रंप ने अपने सहयोगियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे किसी भी तरह से इस बैन को हटाने का रास्ता खो, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इस फैसले से अमेरिका के टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। व्हाइट हाउस के वर्ल्ड कप टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गिउलिआनी और वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्होंने भी फीफा से संवाद किया। लुटनिक तो मैच के दौरान इन्फेंटिनो के ठीक बगल में भी बैठे थे और उन्होंने इन्फेंटिनो के साथ हाल ही में मुलाकातें भी की थीं।
रेड कार्ड पर नियम।
- फोटो : अमर उजाला
3. कानूनी और राजनीतिक दबाव
अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, प्रशासन की ओर वकीलों की भी मदद ली गई और कानूनी दस्तावेजों को अमेरिकी फुटबॉल महासंघ को भेजा गया, ताकि उनके खिलाड़ी को मिले रेड कार्ड को चुनौती दी जा सके। इस कानूनी चुनौती में विशेष रूप से वीएआर की ओर से स्लो-मोशन रिप्ले और फ्रीज-फ्रेम के ज्यादा इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि अमेरिका के साथ रेड कार्ड देकर नाइंसाफी की गई है और उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
फीफा ने आधिकारिक तौर पर फोलारिन बालोगुन का निलंबन वापस लेने का कोई ठोस कारण या स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इस फैसले ने बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि फीफा के नियमों के तहत सीधे रेड कार्ड के खिलाफ अपील करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, निलंबन वापस लेने के लिए फीफा ने जिन नियमों और वजहों का सहारा लिया, उनमें फीफा के अनुशासनात्मक कोड और अंतरिम छूट जैसी बातें शामिल हैं।
अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, प्रशासन की ओर वकीलों की भी मदद ली गई और कानूनी दस्तावेजों को अमेरिकी फुटबॉल महासंघ को भेजा गया, ताकि उनके खिलाड़ी को मिले रेड कार्ड को चुनौती दी जा सके। इस कानूनी चुनौती में विशेष रूप से वीएआर की ओर से स्लो-मोशन रिप्ले और फ्रीज-फ्रेम के ज्यादा इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि अमेरिका के साथ रेड कार्ड देकर नाइंसाफी की गई है और उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
फीफा ने क्यों अमेरिकी खिलाड़ी का निलंबन वापस लिया?
फीफा ने आधिकारिक तौर पर फोलारिन बालोगुन का निलंबन वापस लेने का कोई ठोस कारण या स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इस फैसले ने बहुत से सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि फीफा के नियमों के तहत सीधे रेड कार्ड के खिलाफ अपील करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, निलंबन वापस लेने के लिए फीफा ने जिन नियमों और वजहों का सहारा लिया, उनमें फीफा के अनुशासनात्मक कोड और अंतरिम छूट जैसी बातें शामिल हैं।
आर्टिकल 27 का इस्तेमाल: फीफा ने एक संक्षिप्त बयान में अपने अनुशासनात्मक कोड के आर्टिकल 27 का हवाला देते हुए इस बालोगुन पर लगे बैन को निलंबित कर दिया। यह नियम फीफा की न्यायिक समिति को किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे कि निलंबन) को पूरी तरह या आंशिक रूप से निलंबित करने का असाधारण अधिकार देता है।
प्रोबेशन की शर्त: फीफा ने बालोगुन को पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं किया है। रेड कार्ड उनके रिकॉर्ड में एक साल की प्रोबेशनरी अवधि तक दर्ज रहेगा। अगर वह इस एक साल के अंदर फिर से वैसी ही कोई गलती करते हैं, तो उन्हें यह एक मैच का बैन झेलना होगा।
अमेरिकी फुटबॉल संघ की दलील: बैन हटाने के पीछे अमेरिकी फुटबॉल महासंघ की कानूनी दलील का भी हाथ रहा। उन्होंने फीफा के सामने तर्क पेश किया था कि मैदान पर मौजूद रेफरी को- वीडियो असिस्टेंट रेफरी से मिले फाउल दिखाते समय बहुत ज्यादा फ्रीज-फ्रेम और स्लो-मोशन तस्वीरों का सहारा लिया गया था, जिससे एक दुर्घटना जैसी चुनौती जानबूझकर की गई गलती लग रही थी।
प्रोबेशन की शर्त: फीफा ने बालोगुन को पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं किया है। रेड कार्ड उनके रिकॉर्ड में एक साल की प्रोबेशनरी अवधि तक दर्ज रहेगा। अगर वह इस एक साल के अंदर फिर से वैसी ही कोई गलती करते हैं, तो उन्हें यह एक मैच का बैन झेलना होगा।
अमेरिकी फुटबॉल संघ की दलील: बैन हटाने के पीछे अमेरिकी फुटबॉल महासंघ की कानूनी दलील का भी हाथ रहा। उन्होंने फीफा के सामने तर्क पेश किया था कि मैदान पर मौजूद रेफरी को- वीडियो असिस्टेंट रेफरी से मिले फाउल दिखाते समय बहुत ज्यादा फ्रीज-फ्रेम और स्लो-मोशन तस्वीरों का सहारा लिया गया था, जिससे एक दुर्घटना जैसी चुनौती जानबूझकर की गई गलती लग रही थी।
फीफा का रहस्यमयी आर्टिकल 27।
- फोटो : अमर उजाला
फीफा के इस फैसले के बाद खेल जगत में भूचाल क्यों?
फीफा की ओर से फोलारिन बालोगुन का निलंबन वापस लेने के फैसले ने पूरे खेल जगत में भारी विवाद खड़ा कर दिया है। ब्रिटिश मीडिया समूह बीबीसी और अखबार द गार्डियन ने इस कदम का विश्लेषण किया है और ट्रंप से लेकर इन्फेंटिनो तक पर सवाल उठाए हैं।फीफा में राजनीतिक दखल और निष्पक्षता के उल्लंघन का आरोप
फीफा के नियमों के मुताबिक, फुटबॉल की प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप की सख्त मनाही है। इसके बावजूद, यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस टास्क फोर्स और अमेरिकी प्रशासन के सीधे दबाव के बाद आया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और ट्रंप के करीबी संबंधों, जैसे ट्रंप टावर में फीफा का कार्यालय होना और इन्फेंटिनो द्वारा ट्रंप को 'शांति पुरस्कार' देना, ने इस शक को और पुख्ता कर दिया है कि यह फैसला खेल के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में लिया गया है।
पहले से तय नियमों की अनदेखी का आरोप
फुटबॉल में यह एक स्थापित और कठोर नियम है कि सीधे रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी पर खुद ही अगले मैच का प्रतिबंध लग जाता है, जिसके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह फैसला विश्व कप 2026 के प्रतियोगिता नियमों और 'सर्कुलर नंबर 16' का सीधा उल्लंघन है, जो सभी टीमों पर समान रूप से लागू होता है।
आर्टिकल 27 का मनमाना इस्तेमाल
फीफा ने बैन हटाने के लिए अपने आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया, जिसका विश्व कप के इतिहास में पहले कभी उपयोग नहीं हुआ था। विवाद का एक बड़ा कारण दोहरे मापदंड भी हैं; इस विश्व कप में रेड कार्ड पाने वाले अन्य 11 खिलाड़ियों को अपना प्रतिबंध झेलना पड़ा, जैसे कतर के असीम मदीबो को पांच मैचों का बैन मिला। लेकिन सह-मेजबान अमेरिका के स्टार खिलाड़ी के लिए रातों-रात नियम बदल दिए गए।
फुटबॉल में यह एक स्थापित और कठोर नियम है कि सीधे रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी पर खुद ही अगले मैच का प्रतिबंध लग जाता है, जिसके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह फैसला विश्व कप 2026 के प्रतियोगिता नियमों और 'सर्कुलर नंबर 16' का सीधा उल्लंघन है, जो सभी टीमों पर समान रूप से लागू होता है।
आर्टिकल 27 का मनमाना इस्तेमाल
फीफा ने बैन हटाने के लिए अपने आर्टिकल 27 का इस्तेमाल किया, जिसका विश्व कप के इतिहास में पहले कभी उपयोग नहीं हुआ था। विवाद का एक बड़ा कारण दोहरे मापदंड भी हैं; इस विश्व कप में रेड कार्ड पाने वाले अन्य 11 खिलाड़ियों को अपना प्रतिबंध झेलना पड़ा, जैसे कतर के असीम मदीबो को पांच मैचों का बैन मिला। लेकिन सह-मेजबान अमेरिका के स्टार खिलाड़ी के लिए रातों-रात नियम बदल दिए गए।
पारदर्शिता की कमी के भी लगे आरोप
फीफा ने प्रतिबंध को निलंबित करने का कोई ठोस कारण, तर्क या आधिकारिक स्पष्टीकरण दुनिया के सामने पेश नहीं किया। बिना किसी कारण बताए लिए गए इस अप्रत्याशित फैसले ने खेल जगत में भारी अविश्वास और अटकलों को जन्म दिया है।
विश्व कप के इतिहास में अब तक कुल 189 बार खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिए जा चुके हैं और लाल कार्ड मिलने के बाद निलंबन से बचने वाले बालोगुन केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले फुटबॉल इतिहास में इस तरह की घटनाओं या नियमों के इस्तेमाल के कुछ ही गिने-चुने उदाहरण ही हैं।
1962 विश्व कप में बदला गया था रेड कार्ड
विश्व कप में इससे पहले केवल 1962 में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गैरिंचा को ऐसी राहत मिली थी। उन्हें चिली के खिलाफ सेमीफाइनल में रेड कार्ड मिला था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें चेकोस्लोवाकिया के खिलाफ फाइनल मैच खेलने की अनुमति मिल गई थी। इसमें ब्राजील 3-1 से जीता था। हालांकि, उस दौर में रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी के खुद-ब-खुद अगले मैच से निलंबन का कोई नियम नहीं था और यह फैसला अधिकारियों की गवाही के आधार पर एक समिति की ओर से लिया गया था। इस पर उस समय भी राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगे थे।
फीफा ने प्रतिबंध को निलंबित करने का कोई ठोस कारण, तर्क या आधिकारिक स्पष्टीकरण दुनिया के सामने पेश नहीं किया। बिना किसी कारण बताए लिए गए इस अप्रत्याशित फैसले ने खेल जगत में भारी अविश्वास और अटकलों को जन्म दिया है।
क्या पहले कभी ऐसा फैसला हुआ है?
विश्व कप के इतिहास में अब तक कुल 189 बार खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिए जा चुके हैं और लाल कार्ड मिलने के बाद निलंबन से बचने वाले बालोगुन केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले फुटबॉल इतिहास में इस तरह की घटनाओं या नियमों के इस्तेमाल के कुछ ही गिने-चुने उदाहरण ही हैं।
1962 विश्व कप में बदला गया था रेड कार्ड
विश्व कप में इससे पहले केवल 1962 में ब्राजील के दिग्गज खिलाड़ी गैरिंचा को ऐसी राहत मिली थी। उन्हें चिली के खिलाफ सेमीफाइनल में रेड कार्ड मिला था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें चेकोस्लोवाकिया के खिलाफ फाइनल मैच खेलने की अनुमति मिल गई थी। इसमें ब्राजील 3-1 से जीता था। हालांकि, उस दौर में रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी के खुद-ब-खुद अगले मैच से निलंबन का कोई नियम नहीं था और यह फैसला अधिकारियों की गवाही के आधार पर एक समिति की ओर से लिया गया था। इस पर उस समय भी राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगे थे।
फीफा का रहस्यमयी आर्टिकल 27।
- फोटो : अमर उजाला
विश्व कप से पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी बचे
फीफा के जिस आर्टिकल 27 के तहत बालोगुन का बैन हटाया गया है, उसका विश्व कप टूर्नामेंट के बीच में पहले कभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि, इसी विश्व कप से ठीक पहले पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो के मामले में इस नियम का इस्तेमाल हुआ था। रोनाल्डो को विश्व कप क्वालीफायर मैच में रेड कार्ड मिलने के कारण तीन मैचों का बैन मिला था। फीफा ने आर्टिकल 27 का उपयोग करते हुए उनके दो मैचों के बैन को निलंबित कर दिया था, जिससे वे विश्व कप के शुरुआती मैच खेल सके थे। दिलचस्प बात यह है कि अपना यह बैन हटने से ठीक एक हफ्ते पहले रोनाल्डो भी व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के मेहमान बनकर गए थे।
टूर्नामेंट से पहले कुछ और खिलाड़ियों को मिली हैं रियायतें
विश्व कप शुरू होने से पहले लॉरेंट कोसील्नी (2014), मोइसेस कैसिडो और निकोलस ओटामेंडी जैसे खिलाड़ियों को भी पूर्व-टूर्नामेंट के दौरान निलंबन में कुछ रियायतें दी गई हैं। हालांकि, इन अपवादों, जो विश्व कप टूर्नामेंट के बाहर क्वालीफायर मैचों में हुए, को छोड़ दें तो मौजूदा विश्व कप नियमों के तहत सीधे रेड कार्ड के खिलाफ अपील करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। इसलिए टूर्नामेंट के ठीक बीच में आर्टिकल 27 का इस्तेमाल करके किसी सह-मेजबान देश के खिलाड़ी का स्वतः निलंबन रद्द करना पूरी तरह से अभूतपूर्व और ऐतिहासिक घटना है।
फीफा के जिस आर्टिकल 27 के तहत बालोगुन का बैन हटाया गया है, उसका विश्व कप टूर्नामेंट के बीच में पहले कभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया। हालांकि, इसी विश्व कप से ठीक पहले पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो के मामले में इस नियम का इस्तेमाल हुआ था। रोनाल्डो को विश्व कप क्वालीफायर मैच में रेड कार्ड मिलने के कारण तीन मैचों का बैन मिला था। फीफा ने आर्टिकल 27 का उपयोग करते हुए उनके दो मैचों के बैन को निलंबित कर दिया था, जिससे वे विश्व कप के शुरुआती मैच खेल सके थे। दिलचस्प बात यह है कि अपना यह बैन हटने से ठीक एक हफ्ते पहले रोनाल्डो भी व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के मेहमान बनकर गए थे।
टूर्नामेंट से पहले कुछ और खिलाड़ियों को मिली हैं रियायतें
विश्व कप शुरू होने से पहले लॉरेंट कोसील्नी (2014), मोइसेस कैसिडो और निकोलस ओटामेंडी जैसे खिलाड़ियों को भी पूर्व-टूर्नामेंट के दौरान निलंबन में कुछ रियायतें दी गई हैं। हालांकि, इन अपवादों, जो विश्व कप टूर्नामेंट के बाहर क्वालीफायर मैचों में हुए, को छोड़ दें तो मौजूदा विश्व कप नियमों के तहत सीधे रेड कार्ड के खिलाफ अपील करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। इसलिए टूर्नामेंट के ठीक बीच में आर्टिकल 27 का इस्तेमाल करके किसी सह-मेजबान देश के खिलाड़ी का स्वतः निलंबन रद्द करना पूरी तरह से अभूतपूर्व और ऐतिहासिक घटना है।
फीफा के इस कदम पर क्या है विरोधी टीमों और दिग्गजों का पक्ष?
फीफा की ओर से बालोगुन का निलंबन खत्म करने के फैसले की विरोधी टीमों और फुटबॉल दिग्गजों ने तीखी आलोचना की है। इसे खेल की निष्पक्षता, नियमों और ईमानदारी पर एक बड़ा हमला माना जा रहा है।1. विरोधी टीमों और कोचों का पक्ष
बेल्जियम का भारी आक्रोश: बेल्जियम फुटबॉल संघ (आरबीएफए) ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि वे इससे हैरान हैं और फीफा ने अपने ही नियमों को तोड़ा है। उन्होंने बताया कि यह फैसला विश्व कप 2026 के प्रतियोगिता नियमों और 'सर्कुलर नंबर 16' का सीधा उल्लंघन है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी का अगले मैच से खुद ही निलंबन हो जाता है।बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि फीफा वर्ल्ड कप में 5 जुलाई को 1 अप्रैल (अप्रैल फूल) मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ अपनी टीम का बचाव नहीं कर रहे हैं, बल्कि समग्र रूप से फुटबॉल, उसकी अखंडता और नैतिकता की रक्षा कर रहे हैं।
नॉर्वे के कोच ने भी कसा तंज: नॉर्वे के कोच स्टेल सोलबकेन ने इसे फुटबॉल के लिए एक बहुत ही खराब फैसला बताया और कहा कि यह विश्व कप को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर अमेरिका टूर्नामेंट जीतता है, तो भी यह विवादित फैसला हमेशा उनकी जीत पर सवाल बनकर खड़ा रहेगा।
2. फुटबॉल दिग्गजों की तीखी प्रतिक्रिया
वेन रूनी: इंग्लैंड के पूर्व कप्तान वेन रूनी ने इस फैसले को पूरी तरह से शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो को इस पर शर्म आनी चाहिए और इस फैसले ने खेल की खेल-भावना को खतरे में डाल दिया है।मीका रिचर्ड्स: इंग्लैंड के पूर्व डिफेंडर ने इस फैसले को पूरे टूर्नामेंट का मजाक बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ बड़े सितारों को प्रतियोगिता में बनाए रखने के लिए लिया गया है, जिसने बहुत से लोगों में अविश्वास पैदा कर दिया है।
गैरी नेविल और इयान राइट: पूर्व दिग्गज गैरी नेविल ने कहा कि यह फैसला बिल्कुल बकवास है और अगर वह बेल्जियम टीम का हिस्सा होते तो बहुत ज्यादा गुस्से में होते। इयान राइट ने खेल की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाते हुए इस विश्व कप में हो रही ऐसी घटनाओं को शर्मनाक कहा।
इन प्रतिक्रियाओं के अलावा, यूरोपीय फुटबॉल संस्था यूएफा ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए फीफा पर बालोगुन का बैन हटाकर सीमा पार का आरोप लगाया है। कुल मिलाकर, विरोधी टीमों और खेल दिग्गजों का मानना है कि फीफा का यह अप्रत्याशित कदम एक खतरनाक मिसाल पेश कर रहा है, जिससे भविष्य में रेड कार्ड के निर्णयों के खिलाफ बेजा अपीलों की बाढ़ आ सकती है और फुटबॉल की नियम-प्रणाली खतरे में पड़ सकती है।