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'दखल दीजिए': नाटो बैठक से पहले नेतन्याहू की ट्रंप से अपील- कम कराएं एर्दोगन की इस्राइल विरोधी तीखी बयानबाजी
Tue, 07 Jul 2026 06:49 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 07 Jul 2026 06:49 AM IST
सार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की इस्राइल विरोधी बयानबाजी पर लगाम लगाने का आग्रह किया। उन्होंने तुर्किये के लिए प्रस्तावित एफ-35 और सैन्य सौदों पर भी चिंता जताई।
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इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निजी तौर पर एक अपील की है। उन्होंने ट्रंप से कहा है कि वह इस सप्ताह होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से इस्राइल के खिलाफ अपनी तीखी बयानबाजी कम करने को कहें।
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एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप से यह भी आग्रह किया कि वह तुर्किये की वायुसेना को मजबूत करने वाले नए सैन्य सौदों को मंजूरी न दें। इनमें लड़ाकू विमानों के इंजनों से जुड़ा करीब 70 करोड़ डॉलर का प्रस्तावित समझौता और तुर्किये को फिर से एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल करने की संभावित प्रक्रिया शामिल है।
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बता दें कि, पिछले दो वर्षों में इस्राइल और तुर्किये के संबंध लगातार खराब हुए हैं। गाजा और ईरान से जुड़े युद्धों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। एर्दोगन लगातार गाजा में इस्राइली सैन्य अभियान की आलोचना करते रहे हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने यहूदी राष्ट्रवाद को नरसंहार की विचारधारा बताया और कहा कि यह तुर्किये के लिए भी खतरा बन चुका है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी इस्राइली सरकार को पूरी दुनिया के लिए समस्या बताते हुए इस्राइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने शुक्रवार को ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा कि वह एर्दोगन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल कर उन्हें इस्राइल के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी कम करने के लिए राजी करें। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति एर्दोगन से नरमी बरतने को कह सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उन्हीं का होगा।
इस्राइल की एक बड़ी चिंता तुर्किये की एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में संभावित वापसी भी है। रूस से एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के बाद वर्ष 2019 में तुर्किये को इस कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था। अब ट्रंप प्रशासन यह जांच कर रहा है कि तुर्किये को दोबारा इस कार्यक्रम में शामिल करने का कोई कानूनी रास्ता है या नहीं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि रक्षा मंत्रालय इस मामले की समीक्षा कर रहा है।
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यह मामला ट्रंप के लिए आसान नहीं है। उनके नेतन्याहू और एर्दोगन दोनों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। इस्राइल पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी है, वहीं तुर्किये नाटो का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य सदस्य है। नेतन्याहू ने एक साक्षात्कार में भी एर्दोगन की आलोचना करते हुए तुर्किये को आधुनिक लड़ाकू विमान देने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार को एफ-35 लड़ाकू विमान या उनके इंजन नहीं दिए जाने चाहिए। इससे पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ेगा।