DGCA: मई में भारतीय विमानन कंपनियों के जहाजों पर 1.53 करोड़ घरेलू यात्रियों ने भरी उड़ान, जानें लेखा-जोखा
मई 2026 में भारतीय विमानन कंपनियों के विमानों से 1.53 करोड़ घरेलू यात्रियों ने उड़ान भरी। यह आंकड़ा अप्रैल से 11 फीसदी अधिक है। डीजीसीए की रिपोर्ट में इंडिागो की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट और एअर इंडिया समूह की वृद्धि का खुलासा हुआ। उड़ान रद्द होने और देरी से यात्रियों को हुई असुविधाओं और एयरलाइंस द्वारा दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण जानें।
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विस्तार
भारतीय एयरलाइंस ने मई में 1.53 करोड़ घरेलू यात्रियों को उड़ान भरी। यह आंकड़ा अप्रैल में उड़ान भरने वाले 1.38 करोड़ लोगों से 11 फीसदी अधिक है। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 की तुलना में घरेलू हवाई यातायात में 9.49 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की मई की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। जनवरी से मई 2026 के दौरान घरेलू एयरलाइंस द्वारा कुल 729.40 लाख यात्रियों को ले जाया गया। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह संख्या 715.70 लाख थी। इस प्रकार, वार्षिक वृद्धि 1.91 फीसदी और मासिक वृद्धि 9.49 फीसदी रही।
एयरलाइंस के बाजार हिस्सेदारी में क्या बदलाव आया?
मई में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी घटकर 64.9 फीसदी हो गई। वहीं, एअर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 25.6 फीसदी पर पहुंच गई। अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी 5.8 फीसदी पर अपरिवर्तित रही। वहीं, स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी इस महीने घटकर 2.5 फीसदी रह गई। यह आंकड़े एयरलाइंस के प्रदर्शन और यात्रियों की पसंद को दर्शाते हैं।
ओटीपी के मामले में कौन सी एयरलाइन आगे रही?
मई में 10 प्रमुख हवाई अड्डों पर समय पर प्रदर्शन (ओटीपी) के मामले में इंडिगो सबसे आगे रही। इंडिगो का ओटीपी 82.8 फीसदी दर्ज किया गया। अकासा एयर 78.3 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रही। एअर इंडिया समूह का ओटीपी 74.5 फीसदी रहा। एलायंस एअर का ओटीपी 70.5 फीसदी था, जबकि स्पाइसजेट का ओटीपी 26.5 फीसदी रहा।
यात्रियों को हुई असुविधाओं और मुआवजे का क्या रहा हाल?
मई में निर्धारित घरेलू एयरलाइंस की कुल रद्दीकरण दर 0.55 फीसदी रही। डीजीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान रद्द होने से 63,723 यात्री प्रभावित हुए। एयरलाइंस ने मुआवजे और सुविधाओं के लिए 70.32 लाख रुपये खर्च किए। उड़ान में देरी से 1.77 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। एयरलाइंस ने इस मद में 4.24 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। इस महीने 900 यात्रियों को उड़ान भरने से रोका गया। वाहकों ने मुआवजे और सुविधाओं के लिए 98.60 लाख रुपये का भुगतान किया।