{"_id":"62480951e819e570332a8c9b","slug":"sri-lanka-crisis-latest-update-payment-for-already-imported-food-containers-under-indian-credit-line-hampered-know-why","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sri Lanka Crisis: भारत की मदद के बावजूद नहीं सुधर रहे श्रीलंका के आर्थिक हालात, जानें क्यों रुपये में भुगतान से हो रही परेशानी?","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Sri Lanka Crisis: भारत की मदद के बावजूद नहीं सुधर रहे श्रीलंका के आर्थिक हालात, जानें क्यों रुपये में भुगतान से हो रही परेशानी?
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Sat, 02 Apr 2022 07:01 PM IST
विज्ञापन
सार
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदरगाह पर फंसे आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लगभग 1500 कंटेनरों के लिए एक अरब डॉलर की भारतीय क्रेडिट लाइन का उपयोग बाधित हुआ है, क्योंकि कुछ शिपर्स भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। वे अमेरिकी डॉलर में भुगतान किए जाने पर जोर दे रहे हैं।
Srilanka Crisis
- फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
विस्तार
श्रीलंका के हाल हर बीतते दिन के साथ बेहाल होते जा रहे हैं। चीनी कर्ज के जाल में फंसकर इस द्विपीय देश की अर्थव्यवस्था घ्वस्त हो गई है और लोग खाने-पीने के लिए भी मोहताज है। जरूरी सामानों का आयात बाधित होने के चलते महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई है और लोग दंगा-फसाद करते पर अमादा है। भारी आर्थिक समस्या से घिरे श्रीलंका को मदद के लिए भारत की ओर से एक अरब डॉलर कर क्रेडिट लाइन दी है, लेकिन इसके बावजूद वह आर्थिक संकट से नहीं उबर पा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार रुपये में भुगतान से संबंधित समस्या इस मदद में बाधा बन रही है।
Trending Videos
डॉलर में भुगतान पर दे रहे जोर
इस संबंध में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदरगाह पर फंसे आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लगभग 1500 कंटेनरों के लिए एक अरब डॉलर की भारतीय क्रेडिट लाइन का उपयोग बाधित हुआ है, क्योंकि कुछ शिपर्स भारतीय रुपये में भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। रिपोर्ट में एक प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि कुछ शिपर्स अमेरिकी डॉलर में ही भुगतान पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये चिंता का विषय है कि बंदरगाह पर पहले से ही अटकी हुई जरूरी वस्तुओं के फंसे होने से हमें भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, व्यापार मंत्री बंडुला गुणवर्धन ने कहा कि उन्होंने क्रेडिट लाइन का उपयोग करके इन कार्गो को जारी करने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉलर की मजबूती बनी मुसीबत
प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट के कारण आयातित खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कम से कम 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस भारी बढ़ोतरी के चलते इस तरह के जरूरी सामान भी लोगों की पहुंच से दूर हो रहे हैं और इसका बुरा असर देश में देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में वृद्धि के साथ थोक बाजार में दाल की कीमत बढ़कर 375 से 380 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं चीनी, चावल और सब्जी मसालों की कीमतों में भी इसी तरह से बड़ी वृद्धि हुई है। आयातित चावल की कीमतें 130 से 160 रुपये प्रति किलो के बीच बनी हुई हैं।
भारत ने 40 हजार मीट्रिक टन डीजल भेजा
श्रीलंका जहां एक ओर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तो दूसरी ओर भारी ऊर्जा सकंट से भी त्रस्त है। हालात ये हैं कि देश में रोजना 10 घंटे से ज्यादा की बिजली कटौती की जा रही है। इस समस्या से उबरने के लिए भारत उसका पूरा साथ दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका में बिजली संकट को कम करने में मदद करने के लिए नई दिल्ली ने शनिवार को 40,000 मीट्रिक टन डीजल की एक खेप कोलंबों भेजी है। भारत द्वारा श्रीलंका को दी गई 500 मिलियन यूएस ऑयल लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) के तहत दी गई ईंधन की यह चौथी खेप है।
खाने-पीने को मोहताज देशवासी
बीते दिनों आई रिपोर्ट की मानें तो देश में कुकिंग गैस और बिजली की कमी के चलते करीब 1,000 बेकरी बंद हो चुकी हैं और जो बची हैं उनमें भी उत्पादन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। लोगों को एक ब्रेड का पैकेट भी 0.75 डॉलर (150) रुपये में खरीदना पड़ रहा है। यहीं नहीं मौजूदा समय में एक चाय के लिए लोगों के 100 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले साल 30 अगस्त को, श्रीलंका सरकार ने मुद्रा मूल्य में भारी गिरावट के बाद राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल की घोषणा की थी और उसके बाद खाद्य कीमतों में काफी तेज बढ़ोतरी हुई। देश में एक किलो मिर्च की कीमत 710 रुपये हो गई, एक ही महीने में मिर्च की कीमत में 287 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं बैंगन की कीमत में 51 फीसदी बढ़ी, तो प्याज के दाम 40 फीसदी तक बढ़ गए। एक किलो आलू के लिए 200 रुपये तक चुकाने पड़े।
महंगाई ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड
देश के विदेशी मुद्रा संकट के बीच पेट्रोलियम की कीमतें आसमान छू गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की सरकार के पार पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं बची है जिससे ये संकट और भी गहरा गया है। कुछ दिनों पहले श्रीलंका से ऐसी तस्वीरे आईं कि लोग पेट्रोल खरीदने के लिए पेट्रोल पंप पर टूट पड़े हैं और लोगों को नियंत्रित करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। हजारों लोग घंटों तक कतार में इंतजार करके तेल खरीद रहे हैं। देश में डॉलर की कमी ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। देश में फरवरी में महंगाई 17.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो कि पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है।
श्रीलंका की अर्थव्यवस्था बुरे दौर में
गौरतलब है कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है। श्रीलंका पर चीन, जापान, भारत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भारी कर्ज है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण वो अपने कर्जों की किस्त तक नहीं दे पा रहा है। भारत सरकार ने पड़ोसी मुल्क की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया और इसके तहत पिछले दिनों श्रीलंका को भोजन, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए एक अरब डॉलर का कर्ज देने पर सहमति बनी थी। इस क्रेडिट सुविधा के लिए एसबीआई और श्रीलंका सरकार के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे। गौरतलब है कि श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है और इसके कारण देश में भीषण आर्थिक संकट खड़ा हो चुका है। वर्तमान हालातों की बात करें तो पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं, बिजली कटौती हर रोज दस घंटे से ज्यादा हो रही है, स्ट्रीट लाइट्स को बंद करने का फैसला किया गया है।
आयात पर अधिक निर्भरता का असर
गौरतलब है कि श्रीलंका अपनी जरूरत ज्यादातर चीजें आयात करता है। इसमें दवा से लेकर तेल तक सब शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के कुल आयात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी पिछले साल दिसंबर में 20 फीसदी थी। लेकिन, विदेश मुद्रा भंडार में आई कमी के चलते श्रीलंका की सरकार ईंधन समेत जरूरी चीजों का आयात करने में विफल हो रही है। इससे देश में जरूरी सामनों की किल्लत होती जा रही है और इनके दाम दिन-ब-दिन आसमान छूते जा रहे हैं या फिर कहें तो देश के आम लोगों की पहुंच रोजमर्रा के जरूरत के सामनों से दूर होती जा रही है। श्रीलंका पेट्रोलियम, भोजन, कागज, चीनी, दाल, दवाएं और परिवहन उपकरण भी आयात करता है। फिलहाल की बात करें तो देश में कागज की सप्लाई प्रभावित होने की वजह से जहां न्यूजपेपर बंद हो गए तो दूसरी ओर विद्यालय परीक्षाओं का आयोजन नहीं हो पा रहा है।
कर्ज के बोझ से बेहाल इकोनॉमी
श्रीलंका पर कर्ज 45 अरब डॉलर (करीब 3 लाख 42 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) पर पहुंच गया है। इस तरह श्रीलंका की सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे विदेशी कर्ज का पेमेंट करना है तो दूसरी तरफ अपने लोगों को मुश्किल से उबारना है। सरकार के सामने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से आर्थिक मदद लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका की सरकार को विदेशी कर्ज को जुलाई तक रीस्ट्रक्चर करना होगा। इसकी वजह यह है कि जुलाई में एक अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। विश्व बैंक की ओर से बीते साल अनुमान जताया गया था कि कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से देश में 500,000 लोग गरीबी के जाल में फंस गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो परिवार पहले संपन्न माने जाते थे, उनके लिए भी दो जून की रोटी जुटानी मुश्किल पड़ रही है।
