Sri Lanka Crisis: कर्ज राहत की उलझी प्रक्रियाओं की श्रीलंका ने की आलोचना, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने कही यह बात
Sri Lanka Crisis: पेरिस सम्मेलन में विक्रमसिंघे ने कहा- ‘श्रीलंका ने जापान, भारत और चीन के साथ अलग-अलग वार्ता की, जिससे उसे लाभ हुआ है। इन वार्ताओं से व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और भविष्य में विकास कार्यों पर अमल के बारे में बात आगे बढ़ी है।’
विस्तार
श्रीलंका कर्ज रियायत पाने के लिए तय प्रक्रियाओं से हट अलग कर विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता को आगे बढ़ा रहा है। यह जानकारी श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने दी है। विक्रमसिंघे उन नेताओं में शामिल हैं, जो पेरिस में कर्ज संकट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वहां गए। नया वैश्विक वित्तीय समझौता- शीर्षक के तहत यह सम्मेलन 22-23 जून को पेरिस में हुआ। इस सम्मेलन का मकसद कर्ज संकट में फंसे देशों को राहत देने के उपायों पर विचार करना था, ताकि ये देश गरीबी हटाने और जलवायु परिवर्तन रोकने जैसे मकसदों के लिए रखे गए बजट से कर्ज चुकाने को मजबूर ना हों।
पेरिस सम्मेलन में श्रीलंका पर खास नजर थी। इसका कारण यह है कि मौजूद कर्ज संकट में डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम होने) वाला वह पहला देश बना था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज मिल जाने के कारण अब श्रीलंका अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में जुटा हुआ है। लेकिन आईएमएफ ने शर्त लगाई है कि श्रीलंका को अगली सहायता तभी मिलेगी, जब अपने कर्जदाता देशों को ऋण राहत देने पर राजी कर लेगा।
पेरिस सम्मेलन में विक्रमसिंघे ने कहा- ‘श्रीलंका ने जापान, भारत और चीन के साथ अलग-अलग वार्ता की, जिससे उसे लाभ हुआ है। इन वार्ताओं से व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और भविष्य में विकास कार्यों पर अमल के बारे में बात आगे बढ़ी है।’
श्रीलंका का आर्थिक संकट विदेशी मुद्रा की कमी हो जाने के कारण गहराया। 2022 के आरंभ में उसके डिफॉल्ट करने के हालात बनने लगे थे। आर्थिक संकट के कारण देश में राजनीतिक उथल-पुथल भी शुरू हो गई थी। अप्रैल 2022 में श्रीलंका डिफॉल्ट करने पर मजबूर हो गया था। इस कारण देश की मुद्रा की कीमत में असाधारण गिरावट आई। पिछले डेढ़ साल से श्रीलंका में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 360 रुपये के आसपास बनी रही है।
पेरिस सम्मेलन में आईएमएफ आलोचना के केंद्र में रहा। कई विकासशील देशों के नेताओं ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की वजह से पैदा हुए कर्ज संकट का ठीकरा आईएमएफ ने संकट में फंसे देशों के लोगों के सिर पर फोड़ा है। ऋण देने के बदले उसने ऐसी कड़ी शर्तें लगाई हैं, जिनसे इन देशों के आम जन की मुसीबत बढ़ी है।
विक्रमसिंघे आरोप लगाया कि कर्ज कार्यक्रम के लिए कोई सुपरिभाषित ढांचा मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्यम आय वाले देशों के लिए एक सामान्य ढांचा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा- ‘कोई तय प्रक्रिया ना होने के कारण हमें बहुत मुश्किल पेश आई है।’
विक्रमसिंघे ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव से ऐसे हालात बने हैं, जिनका हल निकाना कर्जदार देशों के वश में नहीं है। उन्होंने कहा- ‘अमेरिका और चीन में मौजूद अविश्वास और उनके बीच बढ़ रहे तनाव का हल सबको मिल कर निकाना होगा। यह सिर्फ कर्ज संकट में फंसे श्रीलंका जैसे देश के वश में नहीं है।’ सम्मेलन में मौजूद नेताओं को संबोधित करते हुए विक्रमसिंघे ने कहा- ‘अगर आप सब मिल कर हल नहीं निकालते, तो एशिया और अफ्रीका ऐसी एक अन्य स्थिति में फंस जाएंगे, जिसे पैदा करने में उनका कोई हाथ नहीं है।’
नकदी संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयासों के तहत घरेलू ऋण पुनर्गठन (डीडीआर) प्रक्रिया पर सरकार की घोषणा के बाद श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने सोमवार को 30 जून को विशेष बैंक अवकाश की घोषणा की ताकि घरेलू ऋण पुनर्गठन (डीडीआर) प्रक्रिया पर सरकार की घोषणा के बाद लगातार पांच दिन की अवकाश अवधि सुनिश्चित की जा सके। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डीडीआर योजना की घोषणा बुधवार या गुरुवार को की जाएगी, संसद की ओर से इसे सप्ताहांत में उठाए जाने की उम्मीद है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने कहा कि 29 जून से तीन जुलाई तक लगातार बैंकों की छुट्टियां रहेंगी और कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज में भी 30 जून को अवकाश रहेगा।
30 जून को श्रीलंका में विशेष बैंक अवकाश की घोषणा
नकदी संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयासों के तहत घरेलू ऋण पुनर्गठन (डीडीआर) प्रक्रिया पर सरकार की घोषणा के बाद श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने सोमवार को 30 जून को विशेष बैंक अवकाश की घोषणा की ताकि घरेलू ऋण पुनर्गठन (डीडीआर) प्रक्रिया पर सरकार की घोषणा के बाद लगातार पांच दिन की अवकाश अवधि सुनिश्चित की जा सके। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डीडीआर योजना की घोषणा बुधवार या गुरुवार को की जाएगी, संसद की ओर से इसे सप्ताहांत में उठाए जाने की उम्मीद है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने कहा कि 29 जून से तीन जुलाई तक लगातार बैंकों की छुट्टियां रहेंगी और कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज में भी 30 जून को अवकाश रहेगा।
