Report: जीएसटी सुधार के बाद स्थिर व्यापार, FY2026 की चौथी तिमाही से FMCG मांग में आ सकती है मजबूती
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी कटौती के बाद व्यापारिक स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं और सरकार के कई उपायों के चलते उपभोक्ता स्टेपल कंपनियों में वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही से मांग में क्रमिक सुधार की उम्मीद है। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों के लिए मांग में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी कटौती के बाद व्यापारिक परिस्थितियां अब स्थिर हो रही हैं और सरकार के कई कदमों के चलते वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही से मांग में निरंतर सुधार देखने को मिल सकता है।
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जीएसटी सुधारों क्या असर हुआ?
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद व्यापार में आई बाधाएं अक्तूबर और आंशिक रूप से नवंबर तक बनी रहीं, जिससे करीब 40 से 45 दिनों तक कारोबारी गतिविधियां प्रभावित रहीं। इस दौरान सप्लाई चेन और ट्रेड एडजस्टमेंट से जुड़ी चुनौतियों का असर मांग पर पड़ा। हालांकि, इसके बाद हालात में सुधार शुरू हुआ और आंशिक री-स्टॉकिंग से प्राथमिक ग्रोथ को सहारा मिला।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनियां अब राजस्व वृद्धि में क्रमिक सुधार दर्ज कर सकती हैं, क्योंकि व्यापारिक व्यवधान धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई कंपनियों ने कम कीमत वाले पैक्स में ग्रामेज (उत्पाद की मात्रा) बढ़ाकर जीएसटी दरों में कटौती का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया है। इससे बिना कीमत बढ़ाए बेहतर वैल्यू मिलने के कारण खासतौर पर पैकेज्ड फूड सेगमेंट में वॉल्यूम ग्रोथ को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, अनुकूल सर्दियों का मौसम भी खपत बढ़ाने में मददगार माना जा रहा है। हेल्थ सप्लीमेंट्स, पर्सनल केयर उत्पाद, हॉट बेवरेजेज और अन्य सर्दी-संवेदनशील श्रेणियों में मांग मजबूत रहने की संभावना जताई गई है।
ग्रामीण मांग में मजबूती बनी रहने की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण मांग में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है, जो रिकवरी ट्रेंड्स से समर्थित है, वहीं शहरी बाजारों में भी उपभोक्ता भावना में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। चौथी तिमाही से आगे की वृद्धि वास्तविक मांग स्थितियों को बेहतर ढंग से दर्शाएगी, क्योंकि तब तक व्यापारिक व्यवधान पूरी तरह सामान्य हो चुके होंगे।
कुल मिलाकर, स्थिर होता व्यापार, सरकार के सहायक उपाय, मौसमी मांग और कंपनियों की प्राइसिंग रणनीतियों के चलते उपभोक्ता स्टेपल कंपनियां से मांग में धीरे लेकिन टिकाऊ सुधार के चरण में प्रवेश कर सकती हैं।