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UPI Transactions: जून में यूपीआई से हर दिन 75 करोड़ से अधिक लेनदेन, जानें कितनी तेजी डिजिटल अर्थव्यवस्था

Wed, 01 Jul 2026 01:01 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 01 Jul 2026 01:01 PM IST
सार

जून 2026 में यूपीआई लेनदेन सालाना 23 फीसदी बढ़कर 22.72 अरब हो गया है। इसके साथ ही  मूल्य 20% बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। प्रतिदिन औसतन 75.7 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। 

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UPI: Over 75 crore UPI transactions daily how fast is the country's digital economy growing?
यूपीआई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन जून में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 22.72 अरब पर पहुंच गया है। इस दौरान इनकी वैल्यू 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई।  

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जून में प्रतिदिन कितने का हुए लेनदेन?
औसत आधार पर यूपीआई से जून में 75.7 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन हुए है। इस दौरान प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू 96,405 करोड़ रुपए रही है। मई में यूपीआई लेनदेन की संख्या 23.20 अरब थी और इनकी वैल्यू 29.90 लाख करोड़ रुपए रही थी। इस दौरान औसतन, यूपीआई ने मई में हर दिन लगभग 74.8 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए। वहीं, प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू लगभग 96,465 करोड़ रुपए रही।

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यूपीआई कितने देशों में  उपलब्ध है?
10 साल पहले आम आदमी को डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए शुरू हुआ यूपीआई अब पूरे भारत में रोजाना करोड़ों लेनदेन को आसान बनाता है। यूपीआई लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 2 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है। यूपीआई अब यूएई, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे ग्लोबल फिनटेक सेक्टर में भारत की मौजूदगी मजबूत हुई है।

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अमेरिकी सांसदों ने यूपीआई को लेकर क्या बोला?

हाल ही में ग्रीस में यूपीआई के शुरू होने के बाद ग्राहक तुरंत, सुरक्षित और आसानी से पैसे भेज सकते हैं और लेनदेन की लागत पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत कम हो गई है। पिछले महीने, अमेरिका के पेमेंट सिस्टम के भविष्य पर चर्चा करते हुए अमेरिकी सांसदों ने भारत के यूपीआई का उदाहरण दिया।

उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक पब्लिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान फिनटेक कंपनियों ने कांग्रेस से अमेरिका के पेमेंट नेटवर्क तक पहुंच से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करने की मांग की।

भारत के साथ यह तुलना 'हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी' की 'फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर बनी सब-कमेटी' की सुनवाई के दौरान की गई। इसमें सांसदों ने इस बात पर विचार किया कि क्या अमेरिका को अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आधुनिक बनाना चाहिए, ताकि योग्य नॉन-बैंक पेमेंट कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे फेडरल रिजर्व के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिल सके।

 

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