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US Fed Rates Update: फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, तीन अधिकारी वृद्धि के खिलाफ; ट्रंप क्या करेंगे?

Thu, 30 Jul 2026 04:42 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 30 Jul 2026 04:42 AM IST
सार

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें स्थिर रखने का फैसला लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक तीन अधिकारियों ने वृद्धि का विरोध किया था, लेकिन बैठक के बाद जो अंतिम फैसला हुआ इसके मुताबिक नीतिगत दरों को फिलहाल नहीं बदला जाएगा। हाल ही में फेड अध्यक्ष नियुक्त किए गए केविन वॉर्श ट्रंप के विश्वासपात्र माने जाते हैं, ऐसे में उनके नेतृत्व में फेड की मौद्रिक नीति में क्या बदलाव हो सकते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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US Fed Rates Update July Monerary policy meeting Federal Reserve interest rates officials opposed Trump react
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिका के केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को स्थिर रखने का फैसला लिया है। फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श की मौजूदगी में हुई बैठक के दौरान मौजूदा मुद्रास्फीति पर चिंता भी जताई गई। अपनी चिंता व्यक्त करते हुए फेड के तीन अधिकारियों ने दरों में वृद्धि का विरोध किया। फेड ने बैठक के बाद कहा, समिति मूल्य स्थिरता प्रदान करेगी। अमेरिका में महंगाई का कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क / टैरिफ और ईरान में संघर्ष के कारण 'उच्च ऊर्जा लागत', दोनों हैं। समिति ने जून में 2026 के अंत तक एक चौथाई प्रतिशत अंक की वृद्धि का अनुमान लगाया था। हालांकि, फिलहाल ब्याज दरें स्थिर रखी गई हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में ट्रंप क्या फैसले लेते हैं।

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फेड की बैठक के दौरान क्या हुआ?
अमेरिका में ब्याज दरों की समीक्षा के दौरान फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने संघीय कोष दर को 3.5 फीसदी से 3.75 फीसदी के दायरे में रखने के लिए प्रस्ताव पर 9-3 के बहुमत से मतदान किया। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी दरों में वृद्धि पर जोर दे रहे थे। हालांकि, बुधवार को (स्थानीय समय) बैठक के बाद जारी बयान के मुताबिक वॉर्श ने तर्क दिया कि फेड को बाजारों को यह बताने में कम समय खर्च करना चाहिए कि वह क्या करेगा। इसके बजाय, उसे उन स्थितियों पर जोर देना चाहिए जिनके तहत कार्रवाई की जाएगी।
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विरोध करने वाले तीन वोट किसके?
फेड की तीन क्षेत्रीय अध्यक्षों का मानना है कि मुद्रास्फीति यानी महंगाई को नियंत्रण में रखने के लिए बैंक को उच्च दरों की जरूरत है। जिन लोगों ने विरोध किया उनमें क्लीवलैंड की बेथ हैमैक, मिनियापोलिस के नील कशकारी और डलास की लोरी लोगन शामिल हैं। इन अधिकारियों ने कहा कि फेड ने दो फीसदी लक्ष्य तय किया है, लेकिन पांच साल से अधिक समय से मुद्रास्फीति इससे ऊपर रही। ऐसे में फेडरल रिजर्व को ब्याज की उच्च दरों की आवश्यकता पर जोर देना चाहिए। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि इन तीनों असंतुष्टों ने संघीय कोष दर के लक्ष्य दायरे को एक चौथाई प्रतिशत अंक बढ़ाने को प्राथमिकता दिए जाने की बात भी कही। 
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कितने दिनों बाद असहमति के स्वर?
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2016 के बाद पहली बार है कि तीन नीति निर्माताओं ने फेड की ब्याज दरों की दिशा पर एकीकृत दृष्टिकोण के साथ असहमति व्यक्त की है। विरोध के ये स्वरों ने फेड अध्यक्ष केविन वॉर्श के लिए शुरुआती चुनौती भी बनकर उभरे। वॉर्श ट्रंप के विश्वासपात्र माने जाते हैं।

अध्यक्ष केविन वॉर्श के लिए कितनी चुनौती
खबरों के मुताबिक वॉर्श ने मौद्रिक नीति की दिशा पर स्पष्ट संकेत देने से इन्कार कर दिया था। इस कारण फेड की बैठक से पहले अनिश्चितता का स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया था। शेयर बाजारों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता ब्याज दरों को फिर से स्थिर रखने का फैसला करेंगे । सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल ने दरों में वृद्धि के लिए हुए तीन क्षेत्रीय अध्यक्षों के रूख को आश्चर्यजनक बताया। 

महंगाई पर फेड का नीतिगत रुख क्या?
सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी शेयर बाजार के जानकार और निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि सितंबर में फेड ब्याज दरों को बढ़ाएगा। हालांकि, 29 जुलाई को हुई बैठक के बाद जारी बयान 17 जून के निर्णय के बाद वाले बयान के लगभग समान पाया गया। अधिकारियों ने दोहराया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण बढ़ी हुई अनिश्चितता के बावजूद आर्थिक गतिविधि ठोस गति से बढ़ रही है। नौकरी के अवसर बढ़े हैं। इससे कार्यबल के साथ तालमेल बनाए रखने में मदद मिली है। बेरोजगारी दर में भी थोड़ा बदलाव आया है। ऐसा तब हुआ है जब अमेरिकी श्रम बल में कमी आई है।


आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजना
फेड की बैठक के बाद गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट की अधिकारी- के हैग ने कहा, मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर है। फेड धैर्य खोता दिख रहा है। समिति की बढ़ती आक्रामक भावना की एक वजह पश्चिम एशिया में बढ़े हालिया टकराव भी हैं। सख्त नीति के पक्षधर अधिकारियों ने तर्क दिया कि मुद्रास्फीति परिवारों पर बोझ रही है, लेकिन महंगाई में कमी के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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