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US Politics: ग्रीनलैंड पर कब्जे की ताक में अमेरिका? ट्रंप 57 हजार लोगों पर लाखों लुटा सकते हैं, बढ़ रही हलचल

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 09 Jan 2026 11:01 AM IST
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सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए अहम मानते हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने ग्रीनलैंड के 57 हजार नागरिकों को आर्थिक प्रस्ताव देकर डेनमार्क से अलग होने के विकल्प पर विचार किया है। आइए विस्तार से जानते हैं।

US looking to annex Greenland? Trump could spend millions on 57,000 people, and the growing
ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर ट्रंप की नई योजना - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक बहस के केंद्र में हैं। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा और भविष्य की रणनीति के लिए बेहद अहम है और वॉशिंगटन को इसकी 'हर हाल में जरूरत' है। इसी सोच के तहत अमेरिका ने ग्रीनलैंड की करीब 57 हजार आबादी को आर्थिक प्रस्ताव देकर डेनमार्क से अलग होने और अमेरिका में शामिल होने के लिए मनाने की संभावनाओं पर विचार शुरू किया है।

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस बात पर चर्चा हुई है कि ग्रीनलैंड के नागरिकों को एकमुश्त रकम दी जाए। प्रस्तावित राशि प्रति व्यक्ति 10 हजार डॉलर से 1 लाख डॉलर तक हो सकती है। अगर यह योजना अमल में आती है, तो अमेरिका को इसके लिए करीब 6 अरब डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे पहले भी अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि ग्रीनलैंड को अमेरिका से जोड़ने के लिए सभी विकल्प खुले हैं और जरूरत पड़ने पर कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। एक प्रेस ब्रीफिंग में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी कहा था कि ट्रंप और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगी यह आकलन कर रहे हैं कि 'ग्रीनलैंड की संभावित खरीद' व्यावहारिक रूप से कैसी दिख सकती है।
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यूरोप की सख्त प्रतिक्रिया

ट्रंप के इन बयानों के बाद यूरोप में चिंता तेज हो गई है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क समेत कई देशों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका को चेताया है। बयान में साफ कहा गया कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है और उसके भविष्य का फैसला वही करेंगे। डेनमार्क ने यहां तक चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर हमला हुआ, तो इसका असर सीधे नाटो जैसे गठबंधन पर पड़ सकता है।

अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

अमेरिका की दिलचस्पी के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्रीनलैंड की खनिज संपदा है। यह इलाका रेयर अर्थ मिनरल्स से भरपूर माना जाता है, जो मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और अन्य हाईटेक उपकरणों के लिए बेहद जरूरी हैं। फिलहाल इन अहम खनिजों की वैश्विक सप्लाई पर चीन का लगभग एकाधिकार है। ऐसे में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत ग्रीनलैंड के खनिज अमेरिका के लिए बड़ा आकर्षण बन गए हैं।



हालांकि, ग्रीनलैंड में खनन करना आसान नहीं है। यहां की कठोर जलवायु, लंबा ठंडा मौसम और बेहद सख्त पर्यावरणीय नियम निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। बुनियादी ढांचे की कमी और ऊंची लागत के कारण अब तक इन संसाधनों का बड़े पैमाने पर दोहन नहीं हो पाया है।

रणनीतिक महत्व भी कम नहीं

खनिजों के अलावा ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति भी अमेरिका के लिए बेहद अहम है। इसका करीब 80 फीसदी हिस्सा आर्कटिक सर्कल के भीतर आता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने यहां सैन्य मौजूदगी इसलिए बढ़ाई थी, ताकि यह क्षेत्र नाजी जर्मनी के हाथ न लगे और उत्तरी अटलांटिक के समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें। अब जलवायु परिवर्तन के चलते आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे नए समुद्री मार्ग खुलने की संभावना बढ़ गई है। इससे रूस, चीन और पश्चिमी देशों के बीच इस क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

कुल मिलाकर, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रुख सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि खनिज, सुरक्षा और आर्कटिक राजनीति से जुड़ी उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

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