US Stock Market: ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी बाजार बेहाल, निवेशक पूछ रहे- कब रुकेगी महंगाई?
पश्चिम एशिया में बीते एक महीने से जारी संघर्ष का बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर देखने को मिला है। इस संकट से खुद अमेरिका भी नहीं बच पाया। बात अगर अमेरिकी शेयर बाजार की करें तो सोमवार को तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान संघर्ष के चलते अमेरिकी शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहां एसएंडपी 500 गिर गया, डाउ हल्का बढ़ा और नैस्डैक घटा।
विस्तार
अमेरिका के शेयर बाजार सोमवार को बढ़ते तेल के दामों और ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर उतार-चढ़ाव भरे रहे। एसएंडपी 500 0.4% गिर गया और अब यह इस साल की अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से 9.1% नीचे है। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 49 अंक बढ़कर 0.1% ऊपर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोज़िट 0.7% गिर गया। हालांकि शुरुआत में एसएंडपी 500 0.9% ऊपर गया, लेकिन जल्दी ही यह बढ़त मिट गई और बाजार फिर नीचे आ गया। दूसरी ओर यूरोप के बाजारों में शेयर बढ़े, लेकिन एशियाई बाजारों में कई जगह भारी गिरावट देखी गई।
तेल की कीमतें भी बढ़कर 102.88 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। बाजार में अस्थिरता की वजह ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष माना जा रहा है। बड़ा कारण यह भी है कि अब इस संघर्ष में हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इसमें हिस्सा लिया। ऐसे में निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पर्सियन गल्फ से तेल और गैस की आपूर्ति कब पूरी तरह शुरू होगी और क्या समय रहते महंगाई को रोका जा सकेगा?
ट्रंप ने दोहराया पुराना राग
बाजार में जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि नई और अधिक तार्किक व्यवस्था के साथ ईरान में सैन्य अभियान खत्म करने में बड़ी प्रगति हुई है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर जल्दी कोई समझौता नहीं हुआ और हॉर्मुज की खाड़ी तुरंत नहीं खोली गई, तो वे ईरानी पावर प्लांट्स को पूरी तरह नष्ट कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें:- US-Iran War: 'पर्दे के पीछे अमेरिका-ईरान की बातचीत जारी', व्हाइट हाउस का बड़ा दावा; फिर भी तेहरान को चेताया
अमेरिकी बाजार में पिछले कुछ हफ्तों का हाल जानिए
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि अमेरिकी बाजारों में पिछले कुछ हफ्तों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। एसएंडपी 500 अब जनवरी में अपने रिकॉर्ड से 8.7% नीचे है। डाउ और नैस्डैक अपने रिकॉर्ड से 10% से अधिक नीचे हैं। विशेषज्ञ इसे करेक्शन मान रहे हैं, यानी बाजार की कीमतें थोड़ी गिर चुकी हैं। एसएंडपी 500 अब अनुमानित मुनाफे के हिसाब से लगभग 17% सस्ती दिख रही है, जो पिछली बार बाजार में बढ़ते डर के समय जैसी स्थिति थी।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था हो सकती है धीमी, कैसे?
विशेषज्ञों का कहना है कि करेक्शन अपने अंत के करीब पहुंच रहा है, बशर्ते मंदी न आए और फेडरल रिजर्व ब्याज दरें न बढ़ाए। दूसरी ओर फेडरल रिजर्व अगर तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊंची रहने के डर से ब्याज दरें बढ़ा देता है, तो महंगाई पर नियंत्रण तो रहेगा लेकिन अर्थव्यवस्था धीमी हो जाएगी और निवेश की कीमतें गिर सकती हैं। इतना ही नहीं बॉन्ड मार्केट में भी उतार-चढ़ाव देखा गया। 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 4.44% से गिरकर 4.35% हो गई।
ये भी पढ़ें:- Iran War: 'केवल ट्रंप ही इस युद्ध को रोक सकते हैं', फतह अल-सीसी ने की US के राष्ट्रपति से जंग रोकने की अपील
अब कंपनियों के आधार पर भी हाल को जानिए
कंपनी स्तर पर, सिस्को ने जेट्रो रेस्टोरेंट डिपो को 21.6 बिलियन डॉलर में खरीदने की घोषणा की, जिससे उसके शेयर 15.3% गिरे। वहीं, अल्कोआ के शेयर 8.2% बढ़े, क्योंकि पश्चिम एशिया में हमलों से प्रतिस्पर्धी एल्युमिनियम कंपनियों को नुकसान हुआ। अंततः, एसएंडपी 500 25.13 अंक गिरकर 6,343.72 पर बंद हुआ, डाउ 45,216.14 पर बढ़ा, और नैस्डैक 20,794.64 पर गिर गया। गौरतलब है कि विदेशी बाजारों में, जैसे कि लंदन का FTSE 100 1.6% ऊपर गया और पेरिस का CAC 40 0.9% बढ़ा। वहीं, सियोल का Kospi 3% गिरा, टोक्यो का Nikkei 225 2.8% नीचे गया और हांगकांग का Hang Seng 0.8% गिरा।