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Aviation: छुट्टियों पर लगा महंगाई का ग्रहण, पश्चिम एशिया संकट से विमानन क्षेत्र को ₹18000 करोड़ का नुकसान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 16 Apr 2026 05:45 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया युद्ध का भारतीय एविएशन और टूरिज्म सेक्टर पर गहरा और नकारात्मक असर। आसान भाषा में समझिए कैसे महंगे हवाई किराये और ईंधन संकट ने विमानन और होटल सेक्टर पर प्रतिकूल असर डाला है। 

West Asia Crisis Impact on Aviation and Tourism, Aviation Sector 18000 Crore Loss West Asia Conflict
पश्चिम एशिया संकट के कारण विमानन क्षेत्र पर असर। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

क्या आप गर्मियों की छुट्टियां मनाने विदेश जाने की सोच रहे हैं? या हाल ही में आपने हवाई टिकट बुक करते समय अचानक बढ़े हुए किरायों पर गौर किया है? इसकी वजह सिर्फ घरेलू महंगाई नहीं है, बल्कि आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर चल रहा पश्चिम एशिया का तनाव है। इस अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक संकट ने न सिर्फ वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है, बल्कि भारतीय विमानन और पर्यटन क्षेत्र को भी सीधे तौर पर लगभग 18,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया है।

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आइए आसान भाषा में समझते हैं कि विदेशी जमीन पर हो रहा यह तनाव आपकी जेब और देश के पर्यटन कारोबार पर कैसे भरी पड़ रहा है।

सवाल : पश्चिम एशिया के तनाव से भारतीय एविएशन को कितना और कैसे नुकसान हुआ है?

जवाब: पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से भारत के एविएशन सेक्टर को करीब ₹18,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। दरअसल, पश्चिम एशिया के प्रमुख हवाई रास्ते (कॉरिडोर) दुनिया के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक हैं, लेकिन युद्ध के कारण वहां उड़ान भरना सुरक्षित नहीं रह गया है। इसके चलते एयरलाइंस को उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं या अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है, जिससे उड़ान के समय में 2 से 4 घंटे तक की बढ़ोतरी हुई है।

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PHDCCI की हालिया रिपोर्ट में क्या-क्या?

मद आंकड़े
एविएशन/टूरिज्म सेक्टर को कुल नेट नुकसान ₹18,000 करोड़
रेस्टोरेंट कारोबार को मासिक नुकसान ₹79,000 करोड़ प्रति माह
विदेशी पर्यटकों में गिरावट 10% से 15%
महानगरों के होटलों के कारोबार में गिरावट 10% से 15%
सुपर-लग्जरी होटलों के कारोबार में गिरावट लगभग 20%
देश भर में बंद हुए रेस्टोरेंट लगभग 10%
एयरलाइन की नौकरियों में कटौती का उदाहरण 6,800 में से 500 कर्मचारियों की छंटनी (लगभग 8%)
अर्थव्यवस्था/सेक्टर पर कुल असर लगभग 2%
घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी  
गोवा में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि (अपवाद) लगभग 5%
जापान द्वारा जारी किए जा रहे दैनिक वीज़ा (दिल्ली-मुंबई से) 600 वीजा प्रतिदिन
घरेलू पर्यटकों की कुल संख्या 27 से 28 करोड़ (270-280 मिलियन)
विदेशी पर्यटकों की कुल संख्या 1 करोड़ से कम (<10 मिलियन)
हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म सेक्टर में कुल रोजगार 4 से 4.5 करोड़ (40-45 मिलियन)
सिर्फ रेस्टोरेंट सेक्टर में कुल रोजगार 85 लाख (8.5 मिलियन)

सवाल: उड़ान का समय बढ़ने का आम आदमी की जेब पर क्या असर पड़ रहा है?

जवाब: इसका सीधा असर आपकी जेब पर हवाई किराये के रूप में पड़ रहा है। एयरलाइन कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग (संचालन) खर्च में 35-40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ विमानन ईंधन (एटीएफ) का होता है। जब फ्लाइट्स को लंबे रास्ते से जाना पड़ता है, तो ईंधन की खपत काफी बढ़ जाती है। इस बढ़ी हुई लागत का बोझ एयरलाइंस आखिर में यात्रियों पर ही डालती हैं, जिससे फ्लाइट के टिकट महंगे हो गए हैं।

सवाल: क्या विदेशी और भारतीय पर्यटकों के घूमने-फिरने के प्लान में भी कोई बदलाव आया है?

जवाब: बिल्कुल। वैश्विक अनिश्चितता के डर से विदेशी पर्यटकों के भारत आने में 15 से 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, विदेश घूमने जाने वाले भारतीय भी अब सतर्क हो गए हैं। अब भारतीय पर्यटक यूरोप या अमेरिका जैसे लंबी दूरी वाले देशों के बजाय थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम जैसे कम दूरी वाले देशों की छोटी छुट्टियां मनाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

सवाल: विदेशी पर्यटक घटने से होटल और रेस्तरां कारोबार की स्थिति कैसी है?

जवाब: होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर भारी दबाव से गुजर रहे हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के आंकड़ों के मुताबिक, आयातित सामग्री, लॉजिस्टिक और ऊर्जा के महंगे होने से रेस्तरां वालों की लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है। विदेशी पर्यटकों की कमी से प्रीमियम होटलों और डाइनिंग की कमाई घटी है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि घरेलू लोग अभी भी खूब यात्राएं कर रहे हैं और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इस सेक्टर को एक बड़ा सहारा मिला हुआ है।

सवाल: इस संकट के असर को कम करने के लिए क्या उपाय सुझाए गए हैं?

जवाब: रिपोर्ट में सरकार और उद्योग जगत को कुछ अहम सुझाव दिए गए हैं:

  • विवादित क्षेत्रों से हटकर नए सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग खोजे जाएं।
  • विमानन ईंधन (एटीएफ), होटल और फूड सर्विस पर लगने वाले टैक्स को तर्कसंगत किया जाए।
  • टूरिज्म से जुड़े छोटे उद्योगों (एमएसएमई) को आसान शर्तों पर लोन दिया जाए।
  • वीजा प्रक्रिया को तेज करने के साथ-साथ घरेलू पर्यटन (घरेलू पर्यटन) के बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जाए।

अब आगे क्या?

पश्चिम एशिया के इस भू-राजनीतिक संकट ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में हो रही घटना का असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू मांग ने भारतीय बाजार को संभाला हुआ है, लेकिन लंबी अवधि में भारत को अपने टूरिज्म इकोसिस्टम को और अधिक लचीला और विविध बनाने की जरूरत है।

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