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WPI: फरवरी में थोक महंगाई दर बढ़कर 2.13 फीसदी हुई, खाद्य और विनिर्माण वस्तुओं के दाम बढ़े

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Mon, 16 Mar 2026 12:21 PM IST
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सार

फरवरी 2026 में थोक महंगाई बढ़कर 2.13 फीसदी हो गई, जो लगातार चौथा महीना है जब इसमें बढ़ोतरी दर्ज हुई। खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं, विनिर्माण और धातु उत्पादों की कीमतें बढ़ने से महंगाई ऊपर गई। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Wholesale inflation rose to 2.13% in February, with prices of food and manufactured goods rising
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

देश में थोक महंगाई दर फरवरी 2026 में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। यह लगातार चौथा महीना है जब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई में इजाफा दर्ज किया गया है। इससे पहले जनवरी में यह दर 1.81 प्रतिशत थी, जबकि फरवरी 2025 में यह 2.45 प्रतिशत रही थी। सरकार द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही।

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महंगाई बढ़ने की वजह

उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि फरवरी 2026 में महंगाई की सकारात्मक दर मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, बेसिक मेटल, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और वस्त्रों की कीमतों में वृद्धि की वजह से रही। यानी थोक बाजार में कई जरूरी श्रेणियों में कीमतों का दबाव बना रहा, जिससे महंगाई दर ऊपर गई।

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क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य वस्तुओं में महंगाई जनवरी के 1.55 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 2.19 प्रतिशत हो गई। हालांकि सब्जियों की महंगाई में कुछ राहत देखने को मिली। फरवरी में सब्जियों की महंगाई 4.73 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 6.78 प्रतिशत थी। इसके बावजूद दाल, आलू और अंडा, मांस व मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले अधिक तेजी दर्ज की गई।


विनिर्मित उत्पादों के मोर्चे पर भी महंगाई में हल्की बढ़ोतरी हुई। फरवरी में इस श्रेणी की थोक महंगाई 2.92 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.86 प्रतिशत थी। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 7.58 प्रतिशत से बढ़कर 8.80 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इस बात का संकेत है कि कच्चे माल और अन्य जरूरी औद्योगिक वस्तुओं की कीमतों में दबाव बना हुआ है।

दूसरी ओर, ईंधन और बिजली श्रेणी में गिरावट यानी डिफ्लेशन का दौर जारी रहा। फरवरी में इस श्रेणी में महंगाई दर माइनस 3.78 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह माइनस 4.01 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले नीचे बनी हुई हैं, हालांकि गिरावट की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।

खुदरा महंगाई भी बढ़कर 3.2% हुई 

इस बीच, खुदरा महंगाई भी फरवरी में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी। खुदरा महंगाई के ये आंकड़े पिछले सप्ताह जारी किए गए थे। भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों पर फैसला लेते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को आधार मानता है। चालू वित्त वर्ष में महंगाई के अपेक्षाकृत निचले स्तर पर बने रहने के बीच RBI अब तक 1.25 प्रतिशत अंक की कटौती कर चुका है।

थोक महंगाई में लगातार चौथे महीने आई तेजी यह संकेत देती है कि बाजार में कीमतों का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सब्जियों में राहत मिली है, लेकिन खाद्य और गैर-खाद्य दोनों श्रेणियों में बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई के रुख पर असर डाल सकती हैं।

 



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