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Explainer: आर्थिक कमजोरी या एआई की लहर? MSCI इंडेक्स में क्यों पिछड़ गईं भारतीय कंपनियां; 26 साल बाद हुआ बदलाव

बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 11 Jun 2026 06:00 AM IST
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सार

एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारतीय कंपनियों की रैंकिंग में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी वजह आर्थिक कमजोरी नहीं बल्कि वैश्विक एआई बूम और बदलते निवेश पैटर्न हैं।

Why Have Indian Companies Lost Ground in Global Markets? AI Wave Reshapes Emerging Market Rankings
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के शीर्ष-10  सबसे मूल्यवान शेयरों की सूची में अब एक भी भारतीय कंपनी नहीं है। शीर्ष-100 कंपनियों में भी कोई भारतीय नहीं है। 100 अरब डॉलर से बड़े मार्केट कैप वाले क्लब में सिर्फ तीन कंपनियां (रिलायंस, एचडीएफसी, एयरटेल) बची हैं, जिनकी संख्या पहले 6 थी। इसका कारण भारत की आर्थिक कमजोरी नहीं है, बल्कि दुनिया में आई एआई की लहर है। इसने उभरते बाजारों का नक्शा ही बदल दिया है और भारत अब इसके असर को महसूस करने लगा है।



एमएससीआई इंडेक्स की आखिर क्या है अहमियत? 
एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स दुनिया के बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए बेंचमार्क की तरह है। दुनियाभर का 700 अरब डॉलर का पैसिव फंड इस इंडेक्स पर नजर रखता है और इसी के आधार पर अलग-अलग देशों के शेयर बाजारों में निवेश करता है। जब इंडेक्स में किसी देश का वजन बढ़ता है, तो विदेशी पूंजी अपने आप उस देश के बाजारों में खिंची चली आती है। इसका प्रभाव जब घटता है, तो विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालने लगते हैं। इस समय भारत का प्रभाव इस इंडेक्स में लगातार नीचे खिसक रहा है।  
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कहां थे हम और कहां आ गए
 कुछ महीने पहले यानी मार्च तक इस इंडेक्स के शीर्ष-10 में भारत के दो सबसे बड़े दिग्गज एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज क्रमशः 7वें एवं 8वें स्थान पर काबिज थे। अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। एचडीएफसी बैंक खिसककर 11वें और रिलायंस 12वें स्थान पर आ गई है। सिर्फ कंपनियों की रैंकिंग ही नहीं गिरी है, बल्कि इंडेक्स में भारत का कुल वेटेज घटकर 6 साल के निचले स्तर 10.87 फीसदी पर आ गया है। यह 2024 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड स्तर से करीब आधा है।
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किसने मारी बाजी?
यह बुनियादी ढांचा भारत में नहीं, बल्कि ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन में मौजूद है। टीएसएमसी, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी कंपनियां इस एआई युग की सबसे बड़ी विजेता बनकर उभरी हैं। जैसे ही इन कंपनियों का बाजार मूल्यांकन आसमान पर पहुंचा, एमएससीआई इंडेक्स में ऊपर छलांग लगा दी और भारत की दिग्गज कंपनियों को नीचे धकेल दिया। स्थिति यह है कि इस इंडेक्स के 70 फीसदी हिस्से पर अभी सिर्फ ताइवान, द. कोरिया और चीन का कब्जा है।

कैसे पलटा पासा?
यह कहानी वैश्विक निवेशकों की बदलती पसंद की है। दुनियाभर के निवेशक एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर फिदा हैं। ताइवान की टीएसएमसी, दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनेक्स के शेयरों में 48 से लेकर 194 फीसदी तक का तगड़ा उछाल आया है। भारतीय आईटी कंपनियां पारंपरिक सॉफ्टवेयर सर्विसेज में ही उलझी रहीं, जिससे वे इस तेजी का लाभ नहीं उठा सकीं। 2025 के शुरू में भारतीय आईटी शेयरों में विदेशी निवेशकों का 81 अरब डॉलर लगा था, जो अब मई में घटकर 40 अरब डॉलर रह गया है।

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