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Trade Deal: क्या अमेरिका-इंडोनेशिया की डील से बदलेगा एशिया में ऊर्जा और खनिज का समीकरण? जानिए सबकुछ

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Wed, 18 Mar 2026 12:29 PM IST
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सार

अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच नई व्यापार डील में खनिज और ऊर्जा सहयोग पर जोर है। इसके तहत इंडोनेशिया अमेरिकी निवेश और ऊर्जा खरीद बढ़ाएगा, जबकि अमेरिका टैरिफ में राहत देगा। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Will the US-Indonesia deal change the energy and mineral landscape in Asia?
अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुआ नया व्यापार समझौता - फोटो : Adobestock
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विस्तार

अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुआ नया व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देता है, जिसमें ऊर्जा, खनिज संसाधन और रणनीतिक सहयोग केंद्र में हैं। इस डील के तहत इंडोनेशिया ने अपने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र खासकर निकेल और रेयर अर्थ में अमेरिकी निवेश के लिए दरवाजे खोलने पर सहमति दी है। वहीं अमेरिका ने इंडोनेशियाई उत्पादों पर प्रस्तावित 32% टैरिफ घटाकर 19% कर दिया है और कई प्रमुख वस्तुओं को शून्य-शुल्क पहुंच भी दी है।

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खनिज और सप्लाई चेन पर फोकस

इंडोनेशिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा निकेल उत्पादक है, इलेक्ट्रिक वाहन और क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी संसाधनों का बड़ा स्रोत है। समझौते के तहत अमेरिका को खनन से लेकर प्रोसेसिंग और निर्यात तक व्यापक निवेश अवसर मिलेंगे। इससे अमेरिका की कोशिश है कि वह चीन पर निर्भरता कम कर सके, जो अभी इंडोनेशिया के खनिज सेक्टर में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।

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डील के तहत क्या होगा?

डील के तहत इंडोनेशिया करीब 15 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद जैसे कच्चा तेल, एलपीजी और गैसोलीन खरीदेगा। साथ ही, अमेरिकी कोयले के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट कोस्ट से एक्सपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने में भी निवेश करेगा। दोनों देश छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR) परियोजनाओं पर भी सहयोग करेंगे।

इंडोनेशिया किन देशों के बीच संतुलन साधने को कोशिश कर रहा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता इंडोनेशिया की उस रणनीति को दिखाता है, जिसमें वह अमेरिका और चीन दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। चीन पहले से ही इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और खनिज व कोयला क्षेत्र में उसकी मजबूत पकड़ है।

ऊर्जा ट्रांजिशन पर असर

डील से इंडोनेशिया की ऊर्जा नीति में बदलाव के संकेत मिलते हैं। जहां पहले स्वच्छ ऊर्जा और उत्सर्जन में कमी पर जोर था, अब फोकस फिर से जीवाश्म ईंधन की ओर झुकता दिख रहा है। 2023 में इंडोनेशिया की ऊर्जा खपत का करीब 78% हिस्सा कोयला, तेल और गैस से आया था, जबकि सौर ऊर्जा का विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा है।

टैरिफ विवाद से अनिश्चितता

हालांकि, इस समझौते के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों को चुनौती दिए जाने के बाद इसके लागू होने पर सवाल उठे हैं। साथ ही, इंडोनेशिया की संसद में भी इस पर मंजूरी आसान नहीं मानी जा रही, खासकर कुछ विवादित प्रावधानों को लेकर।

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