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World Bank: विश्व बैंक ने FY27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.6% किया, पश्चिम एशिया संकट की गई यह टिप्पणी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 09 Apr 2026 01:47 PM IST
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सार

विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.6% कर दिया है। जानिए कैसे जीएसटी कटौती से मिलेगी राहत और मध्य पूर्व संकट व अमेरिका-ईरान विवाद का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर। पूरी बिजनेस न्यूज पढ़ें।

World Bank forecast for India GDP Growth FY27 West Asia Crisis Impact US Israel Iran Conflict
विश्व बैंक - फोटो : एएनआई
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विस्तार

विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। 'साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट' रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों में हालिया कटौती से वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को मजबूती मिलेगी। हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा बाजारों में व्यवधान विकास की राह में चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।

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विकास दर के अनुमान और तुलना

विश्व बैंक ने जनवरी की अपनी 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स' रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। अन्य प्रमुख एजेंसियों के अनुमानों की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 6.9 प्रतिशत, ओईसीडी (ओईसीडी) ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज ने विकास दर 6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

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इससे पहले, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की विकास दर 7.1 प्रतिशत (FY25) से बढ़कर 7.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में लचीलापन रहा है।

जीएसटी और घरेलू खपत पर प्रभाव

  • निजी खपत: कम मुद्रास्फीति और जीएसटी के युक्तिकरण के कारण देश में निजी खपत वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही है।
  • मांग को समर्थन: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जीएसटी दरों में कमी से उपभोक्ता मांग को लगातार समर्थन मिलने की उम्मीद है।

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक चुनौतियां

28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद से मध्य पूर्व में अनिश्चितता बढ़ गई है। 8 अप्रैल को इन देशों के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमति बनी है, लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह बाधित कर दिया है। विश्व बैंक के अन्य पूर्वानुमानकर्ताओं ने भी इस अनिश्चितता के कारण FY27 के लिए विकास दर के अनुमानों को घटाकर 5.9 से 6.7 प्रतिशत के दायरे में कर दिया है। विश्व बैंक के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का दबाव बनेगा, जिससे परिवारों की खर्च करने योग्य आय सीमित हो जाएगी। 

सरकारी खर्च, निवेश और निर्यात आउटलुक

  • सब्सिडी का बोझ: खाना पकाने के ईंधन और उर्वरकों के लिए उच्च सब्सिडी परिव्यय तय करने के कारण सरकारी खपत वृद्धि के नरम पड़ने  की उम्मीद है।
  • निवेश में सुस्ती: बढ़ती अनिश्चितता और उच्च इनपुट लागत के कारण निवेश वृद्धि के मध्यम रहने की संभावना है।
  • निर्यात व्यापार: हालांकि भारत के निर्यात के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) तक पहुंच में सुधार हुआ है, लेकिन प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की धीमी आर्थिक वृद्धि दर इसका सकारात्मक असर कम कर सकती है।

विश्व बैंक के ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और मांग बुनियादी रूप से मजबूत बनी हुई है। जीएसटी में कटौती जैसे कदम विकास को गति दे रहे हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण ऊर्जा कीमतों में आया उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर सामने आ रहा है। आगामी तिमाहियों में आर्थिक विकास की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक बाजार इस ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव से कैसे निपटते हैं।

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