Tata Steel: 'भारत के लिए ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में विविधता लाने में कई चुनौतियां', बोले टाटा स्टील के सीईओ
भारत के ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स डायवर्सिफिकेशन की चुनौतियों के बारे में टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन चिंता जाहिर की है। उन्होंने अपने बयान में क्या कहा है, जानिए विस्तार से।
विस्तार
भारत अपनी अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए मजबूत करने के उद्देश्य से ऊर्जा के नए स्रोतों और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, एक तरफ जहां यह डायवर्सिफिकेशन देश के लिए बेहद जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ इसने कुछ नई चुनौतियों को भी जन्म दिया है। गुरुवार को ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) लीडरशिप कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने भारत के इस रणनीतिक कदम को बहुस्तरीय जोखिम करार दिया।
टीवी नरेंद्रन के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है, इसलिए सप्लाई चेन में पैदा होने वाले नए जोखिमों को भी समझना आवश्यक है। नरेंद्रन ने कहा कि ऊर्जा और क्रिटिकल खनिजों के स्रोतों में विविधता लाना भारत के लिए जरूरी है, लेकिन इसमें छिपी जटिलताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, "यह चुनौती बिल्कुल साफ है। हम ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के स्रोतों में विविधता ला रहे हैं, जो कि हमें करना ही चाहिए; लेकिन यह डायवर्सिफिकेशन एक बहुस्तरीय जोखिम भी है। यह केवल आयात पर निर्भरता जैसी चुनौती नहीं है, बल्कि यह उन रणनीतिक फैसलों पर भी जुड़ा निर्भर करती है जो इन आयातों को सुचारू रूप से हमारे देश तक पहुंचने देती है।"
वैश्विक संकट और भारत के लिए रणनीतिक अवसर
नरेंद्रन के अनुसार इस दशक की शुरुआत में कोरोना महामारी के रूप में एक बहुत बड़ा व्यवधान आया, जिसने सरकारों को तेजी से कदम उठाने पर मजबूर कर दिया और व्यवसायों व समाजों को नए तरीकों से काम करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद भी वैश्विक स्तर पर कई झटके लगे हैं। नरेंद्रन ने बताया कि टूटी हुई ग्लोबल सप्लाई चेन, रूस-यूक्रेन संघर्ष, ऊर्जा और कमोडिटी बाजार में भारी अस्थिरता, बढ़ते व्यापार अवरोध, सख्त तकनीकी नियंत्रण और हाल ही में पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रमुख शिपिंग मार्गों में आई बाधाओं ने दुनिया के व्यापारिक समीकरण बदल दिए हैं।
एआईएमए के अध्यक्ष के रूप में अपने विचार रखते हुए नरेंद्रन ने इस बात पर जोर दिया कि इन संकटों के बीच भारत के लिए एक बड़ा अवसर छिपा है। पूरी दुनिया इस समय एक भरोसेमंद साझेदार, विविध सप्लाई चेन और स्थिर विकास वाले बाजार की तलाश में है। उन्होंने कहा, "भारत के लिए अवसर न केवल अपनी जरूरतों के लिए निर्माण करने का है, बल्कि दुनिया को बेचने का भी है। असली परीक्षा यह है कि हम ऐसा करने में कितने सक्षम साबित होते हैं"।
भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए क्या कर रहा?
भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर सौर, पवन, जलविद्युत, परमाणु, जैव ईंधन, गैस और ग्रीन-हाइड्रोजन परियोजनाओं को शामिल कर रहा है। जैसे-
- खनिजों की पहचान: भारत ने लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे लगभग 30 खनिजों को 'क्रिटिकल' के रूप में चिह्नित किया है।
- राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन: घरेलू अन्वेषण को बढ़ावा देने, खनन नियमों को सरल बनाने और विदेशी अधिग्रहण व प्रोसेसिंग क्षमता को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार ने यह मिशन लॉन्च किया है।
- अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का आधार: ये क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा प्रणालियों और क्लीन-एनर्जी प्रौद्योगिकियों के लिए बेहद जरूरी हैं। लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्व (आरईई), निकल, तांबा, ग्रेफाइट, गैलियम, जर्मेनियम, टाइटेनियम और टंगस्टन जैसे धातु और गैर-धातु तत्वों का उपयोग बैटरी, सोलर पैनल, विंड टर्बाइन, सेमीकंडक्टर और हाई-परफॉरमेंस मैग्नेट बनाने में किया जाता है।
जैसे-जैसे विभिन्न देश एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटलाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, विश्व स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स की मांग में भारी उछाल आ रहा है। टाटा स्टील के सीईओ का यह बयान बताता है कि भारत के लिए अपनी ऊर्जा और खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक परीक्षा होगी। विश्व बाजार में सफल होने के लिए भारत को न केवल अपने घरेलू उत्पादन ढांचे को मजबूत करना होगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति के बीच अपनी राजनीतिक सद्भावना को भी चतुराई से साधना होगा।