{"_id":"697f5cf74d8c98347d05615b","slug":"a-massive-crowd-of-devotees-gathered-at-shri-khuralgarh-sahib-the-sacred-place-of-penance-of-shri-guru-ravidas-ji-chandigarh-news-c-70-1-spkl1012-104551-2026-02-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: श्री गुरु रविदास जी की तपोस्थली श्री खुरालगढ़ साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: श्री गुरु रविदास जी की तपोस्थली श्री खुरालगढ़ साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
विज्ञापन
विज्ञापन
गढ़शंकर (होशियारपुर)। श्री गुरु रविदास जी की 649वीं प्रकाशोत्सव के अवसर पर श्री खुरालगढ़ साहिब में भव्य समागम का आयोजन किया गया। समागम में हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु जी के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया और गुरु रविदास जी की बाणी का श्रवण किया।
समागम में मुख्य सेवादार बाबा केवल सिंह ने गुरु जी के जीवन दर्शन और उपदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु रविदास जी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश आंतरिक शुद्धता था। उनका मानना था कि यदि मन पवित्र हो, तो ईश्वर वहीं मौजूद होते हैं। बाहरी आडंबरों की बजाय गुरु जी ने भीतर की शुद्धता और हृदय की सफाई पर जोर दिया।
बाबा केवल सिंह ने कहा कि गुरु जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और छुआछूत के खिलाफ कड़ा विरोध किया। उनका सपना था एक ऐसा समाज, जिसे उन्होंने बेगमपुरा (दुःख रहित शहर) कहा। गुरु जी का मानना था कि सभी लोग एक ही ईश्वर की संतान हैं और सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके विचार आज भी आपसी भाईचारे, शांति और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाते हैं।
समागम में श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न स्थानों से आए शख्सियतों का सम्मान भी किया गया। इस दौरान गुरु घर में चल रहे माता कलशा यात्री भवन के निर्माण कार्य के लिए विभिन्न दान दिए गए। समागम के अंत में गुरु का अटूट लंगर भी वितरित किया गया। संवाद
Trending Videos
समागम में मुख्य सेवादार बाबा केवल सिंह ने गुरु जी के जीवन दर्शन और उपदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु रविदास जी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश आंतरिक शुद्धता था। उनका मानना था कि यदि मन पवित्र हो, तो ईश्वर वहीं मौजूद होते हैं। बाहरी आडंबरों की बजाय गुरु जी ने भीतर की शुद्धता और हृदय की सफाई पर जोर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबा केवल सिंह ने कहा कि गुरु जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और छुआछूत के खिलाफ कड़ा विरोध किया। उनका सपना था एक ऐसा समाज, जिसे उन्होंने बेगमपुरा (दुःख रहित शहर) कहा। गुरु जी का मानना था कि सभी लोग एक ही ईश्वर की संतान हैं और सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके विचार आज भी आपसी भाईचारे, शांति और निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाते हैं।
समागम में श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न स्थानों से आए शख्सियतों का सम्मान भी किया गया। इस दौरान गुरु घर में चल रहे माता कलशा यात्री भवन के निर्माण कार्य के लिए विभिन्न दान दिए गए। समागम के अंत में गुरु का अटूट लंगर भी वितरित किया गया। संवाद
