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19 अप्रैल को अक्षय तृतीया: 75 साल बाद बन रहा शुभ देव महा अधियोग, हर कार्य होगा सफल
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:21 PM IST
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सार
19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे पर द्वितीया तिथि समाप्त होकर 10:50 बजे तृतीया तिथि शुरू हो रही है। यह 20 अप्रैल को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी। इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।
Akshay Tritiya 2026
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को है। इस बार 75 वर्षों के बाद शुभ देव महा अधियोग बन रहा है। ऐसे में हर कार्य सफल होगा। यह बहुत शुभ और फलदायी है। गौरी विनायकपेता ग्रंथ के अनुसार यदि गौरी पुत्र गणेश की तिथि तृतीया और चतुर्थी का संयोग हो व कृतिका और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन जाए, तब ऐसा योग बनता है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया का व्रत स्वयं सिद्ध अभिजीत मुहूर्त है।
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि अक्षय तृतीया का पर्व वैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मध्याह्न काल में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के देवता भगवान विष्णु हैं। पितरों का श्राद्ध करना और तर्पण का विशेष महत्व है। इसमें पिंडदान का निषेध है। अक्षय तृतीया पर सोना चांदी खरीदने, गंगा स्नान और पूजा पाठ व दान का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे पर द्वितीया तिथि समाप्त होकर 10:50 बजे तृतीया तिथि शुरू हो रही है। यह 20 अप्रैल को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी। इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन कोई भी धार्मिक कार्य करने पर कर्मों का फल अक्षय होता है। इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। इसी दिन भगवान सूर्य मेष राशि में कृतिका नक्षत्र में प्रवेश किए थे, जब सृष्टि प्रारंभ हुई थी।
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सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि अक्षय तृतीया का पर्व वैसाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मध्याह्न काल में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के देवता भगवान विष्णु हैं। पितरों का श्राद्ध करना और तर्पण का विशेष महत्व है। इसमें पिंडदान का निषेध है। अक्षय तृतीया पर सोना चांदी खरीदने, गंगा स्नान और पूजा पाठ व दान का विशेष महत्व है।
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उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे पर द्वितीया तिथि समाप्त होकर 10:50 बजे तृतीया तिथि शुरू हो रही है। यह 20 अप्रैल को सुबह 7:28 बजे समाप्त होगी। इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन कोई भी धार्मिक कार्य करने पर कर्मों का फल अक्षय होता है। इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। इसी दिन भगवान सूर्य मेष राशि में कृतिका नक्षत्र में प्रवेश किए थे, जब सृष्टि प्रारंभ हुई थी।