{"_id":"69a9c754ffe809b42806c012","slug":"bikram-majithia-gets-relief-from-appearance-in-five-year-old-case-chandigarh-news-c-16-pkl1079-963661-2026-03-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पांच साल पुराने केस में बिक्रम मजीठिया को पेशी से राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पांच साल पुराने केस में बिक्रम मजीठिया को पेशी से राहत
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। सरकारी काम में बाधा और पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की के पांच वर्ष पुराने मामले में शिअद नेता विक्रम सिंह मजीठिया को गुरुवार को जिला अदालत से पेशी में छूट मिल गई। मामले में आरोप तय होने थे, लेकिन बचाव पक्ष की ओर से दायर डिस्चार्ज (आरोप मुक्त) अर्जी पर सुनवाई के लिए अदालत ने 12 मार्च की तारीख निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील राजेश कुमार राय ने अदालत को बताया कि इसी मामले से संबंधित क्वैशिंग याचिका पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है और उस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। इसी आधार पर डिस्चार्ज अर्जी पर विचार करने की मांग की गई।
अर्जी में यह भी कहा गया कि इसी प्रकरण में पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा और महेशइंद्र ग्रेवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। बचाव पक्ष का दावा है कि पुलिस रिपोर्ट का समर्थन करने वाला कोई ठोस सबूत या स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं है।
2021 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2021 का है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने उस समय 23 अकाली नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि सेक्टर-3 स्थित एमएलए हॉस्टल के पास प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई। बताया जाता है कि अकाली नेता मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर किसानों की मांगों के समर्थन में ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड्स लगा दिए थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी पर हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। फिलहाल केस की सुनवाई जारी है।
Trending Videos
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील राजेश कुमार राय ने अदालत को बताया कि इसी मामले से संबंधित क्वैशिंग याचिका पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित है और उस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। इसी आधार पर डिस्चार्ज अर्जी पर विचार करने की मांग की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
अर्जी में यह भी कहा गया कि इसी प्रकरण में पूर्व कैबिनेट मंत्री दलजीत सिंह चीमा और महेशइंद्र ग्रेवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। बचाव पक्ष का दावा है कि पुलिस रिपोर्ट का समर्थन करने वाला कोई ठोस सबूत या स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं है।
2021 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2021 का है। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने उस समय 23 अकाली नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि सेक्टर-3 स्थित एमएलए हॉस्टल के पास प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई। बताया जाता है कि अकाली नेता मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर किसानों की मांगों के समर्थन में ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड्स लगा दिए थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी पर हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। फिलहाल केस की सुनवाई जारी है।