श्रमिकों की कमी और मौसम का असर: हरियाणा में सिमट रही गन्ने की खेती, पांच साल में 83 हजार एकड़ रकबा घटा
गन्ने की पैदावार प्रति एकड़ निरंतर कम हो रही है। इससे चीनी मिलों की कार्यक्षमता कार्य दिवस भी कम हो रहे हैं जो चीनी उद्योग के लिए खतरे की घंटी है। इससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विस्तार
हरियाणा में गन्ने की खेती सिमटती जा रही है। राज्य में पिछले कुछ साल में गन्ने के रकबे व उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हरियाणा विधानसभा में शुक्रवार को पेश आंकड़ों के मुताबिक साल 2020-21 की तुलना में 2025-26 में गन्ने के रकबे में लगभग 83,658 एकड़ की कमी का अनुमान जताया गया है।
औसत पैदावार (क्विंटल प्रति एकड़) में 18.09 क्विंटल व उत्पादन में 322.54 क्विंटल की कमी दर्ज की गई है। गन्ने की कमी का असर चीनी मिल पर भी पड़ा है। गन्ना पिराई के औसत कार्य दिवस में लगभग 40 फीसदी की कमी आंकी गई है।
भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा की ओर से लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सहकारिता मंत्री डाॅ. अरविंद शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए इस साल के बजट में कई योजनाएं लेकर आई है। उन्होंने बताया कि गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन योजना के तहत किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक में प्रति एकड़ 3000 रुपये के बजाय अब 5000 सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने गन्ने के गिरते रकबा व उत्पादन के कारणों का भी विस्तार से उल्लेख किया है। अरोड़ा ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रति एकड़ निरंतर कम हो रही है। इससे चीनी मिलों की कार्यक्षमता कार्य दिवस भी कम हो रहे हैं जो चीनी उद्योग के लिए खतरे की घंटी है। इससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंत्री ने गिनाए गन्ने के रकबे व उत्पादन में कमी का कारण
डाॅ. शर्मा ने बताया कि गन्ने की फसल में बिजाई से लेकर कटाई तक अधिक श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है। समय व आवश्यकतानुसार श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित न होने व श्रमिकों के मेहनताने में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण किसान गन्ने के बजाए अन्य फसलों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। गन्ने की कटाई के लिए कृषि यन्त्रों की उपलब्धता में कमी भी गन्ने के क्षेत्रफल में कमी आई थी। हरियाणा में लगभग 50 प्रतिशत गन्ने की बिजाई गेहूं कटाई के बाद की जाती है।
पिछले कुछ वर्षों से मौसम में अचानक बदलाव दर्ज किये गये हैं, हरियाणा में मानसून लगभग जुलाई के प्रथम सप्ताह से प्रभावी होते हैं मगर पिछले साल के दौरान मौसम में बदलाव की वजह से अप्रैल माह की शुरुआत से ही बारिश होती रही है। इससे गन्ने के जमाव व फुटाव प्रभावित हुए और नतीजन गन्ने की औसत पैदावार व कुल उत्पादन में गिरावट आई है। जलवायु में बदलाव के कारण गन्ने की अगेती मुख्य किस्म सीओ-0238 व सीओ-0118 में चोटी व जड़ बेधक कीड़ों व उखेड़ा बीमारी के कारण भी औसत पैदावार व कुल उत्पादन में कमी आई है।
हरियाणा सरकार उठा रही कदम
गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ाने व गन्ने की फसल को अधिक लाभकारी बनाने के लिए हर साल राज्य सुझावित मूल्य (एसएपी) जारी किया जाता है। विभाग की तरफ से गन्ने की नवीनतम तकनीकों के बारे में बिजाई से लेकर कटाई तक समय-समय पर किसान गोष्ठियां, किसान मेले व किसान वैज्ञानिक संवादों के माध्यम से जानकारी दी जाती है। किसानों को स्वस्थ और रोग मुक्त बीज उपलब्ध करवाने के लिए प्रति एकड़ 5000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। किसानों को गन्ने की नवीनतम किस्मों जैसे सीओ-15023 का बीज खरीदने व बीज बनाकर किसी अन्य किसान को बेचने, दोनों ही अवस्था में 5000 प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाता है। इस वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार गन्ने की खेती के लिए टिशू कल्चर विधि अपनाने वाले किसानों को गन्ने की पौध निःशुल्क प्रदान किए जाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने सहकारी चीनी मिलें किसानों को उनकी उपज की कटाई के लिए गन्ना हार्वेस्टर प्रदान करेंगी जिससे गन्ना की कटाई की लागत में कमी आएगी।
वर्ष क्षेत्रफल औसत पैदावार उत्पादन गन्ना पिराई मात्रा औसत कार्य दिवस
2020-21 246357 347.68 858.78 751.78 180
2021-22 263499 332.09 875.07 754.50 179
2022-23 266142 334.92 891.38 770.73 168
2023-24 217903 330.54 720.26 625.52 133
2024-25 176950 329.48 583.02 557.73 113
2025-26 162699 329.59 536.24 509.47 108
(अनुमानित)
क्षेत्रफल में कमी = 83658 एकड़
औसत पैदावार में कमी = 18.09 क्विंटल प्रति एकड़
उत्पादन में कमी = 322.54 लाख क्विंटल
गन्ना पिराई मात्रा में कमी = 242.31 लाख क्विंटल
औसत कार्य दिवस में कमी =72 दिन