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चंडीगढ़ की नई आबकारी नीति को मंजूरी: शराब की कीमतों में बढ़ोतरी, अब डिपार्टमेंटल स्टोर्स में भी होगी बिक्री

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 07 Mar 2026 03:27 PM IST
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सार

प्रशासन के अनुसार देसी शराब, अंग्रेजी शराब, इंडियन बीयर और वाइन की एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (ईडीपी) में दो प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।

Chandigarh new excise policy approved Liquor prices hiked available for sale in departmental stores too
Liquor - फोटो : Freepik
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विस्तार

चंडीगढ़ प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत शहर में शराब की कीमतों में अधिकतम दो प्रतिशत तक की मामूली बढ़ोतरी की गई है जबकि कुल 97 शराब ठेकों की नीलामी के लिए रिजर्व प्राइस 454.35 करोड़ रुपये तय किया गया है। पिछली आबकारी नीति के मुकाबले रिजर्व प्राइस में करीब 10 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है।

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प्रशासन के अनुसार देसी शराब, अंग्रेजी शराब, इंडियन बीयर और वाइन की एक्स-डिस्टिलरी प्राइस (ईडीपी) में दो प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता एक हजार रुपये की शराब की बोतल खरीदता है तो उसे लगभग 20 रुपये अधिक चुकाने होंगे। प्रशासन का कहना है कि यह बढ़ोतरी महंगाई और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए की गई है।
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नई नीति के तहत इंपोर्टेड वाइन, इंपोर्टेड बीयर और इंपोर्टेड फॉरेन लिकर (आईएफएल) की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि नीति लागू होने के बाद पहले तीन महीनों तक कीमतों में कोई और बदलाव नहीं होगा। इसके बाद ही परिस्थितियों के आधार पर किसी संभावित संशोधन पर विचार किया जाएगा।

लाइसेंस फीस जमा करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

नई आबकारी नीति में शराब ठेकेदारों के लिए लाइसेंस फीस जमा करने की प्रक्रिया में अहम बदलाव किया गया है। पहले लाइसेंस फीस दो किस्तों में जमा करनी होती थी लेकिन अब ठेकेदारों को हर महीने की 15 तारीख तक एक बार में पूरी फीस जमा करनी होगी। प्रशासन के अनुसार यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब 19 से 20 ठेकों से हर महीने समय पर लाइसेंस फीस प्राप्त करने में दिक्कत आ रही थी। कई लाइसेंसधारी तय समय पर भुगतान नहीं कर रहे थे, जिससे राजस्व संग्रह प्रभावित हो रहा था। इसके साथ ही रिटेल शराब ठेकों के लाइसेंसधारकों के लिए सिक्योरिटी अमाउंट भी बढ़ाकर बोली राशि का 17 प्रतिशत कर दिया गया है।

बॉन्डेड वेयरहाउस नियमों में ढील

नई आबकारी नीति में शराब कारोबार को सुगम बनाने के लिए कस्टम अप्रूव्ड बॉन्डेड वेयरहाउस से जुड़ी शर्तों में भी बदलाव किया गया है। पहले एल-1एफ और एफ-1डीएफ लाइसेंस लेने के लिए यह अनिवार्य था कि संबंधित बॉन्डेड वेयरहाउस चंडीगढ़ के भीतर ही स्थित हो। अब प्रशासन ने यह शर्त हटा दी है और देश के किसी भी हिस्से में स्थित कस्टम अप्रूव्ड बॉन्डेड वेयरहाउस से कारोबार करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ एक वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन शर्तों में ढील से शराब तस्करी की आशंका भी बढ़ सकती है।

ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य

बॉन्डेड वेयरहाउस से जुड़े नए नियमों के तहत अब सभी कस्टम अप्रूव्ड वेयरहाउस संचालकों के लिए एक्साइज पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। उन्हें हर महीने आयात और निर्यात से जुड़ी पूरी जानकारी अगले महीने की सात तारीख तक पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। प्रशासन के मुताबिक इससे शराब की आवाजाही पर निगरानी और अधिक प्रभावी होगी।

रिटेल कोटा में कोई बदलाव नहीं

नई आबकारी नीति में कंट्री लिकर, आईएमएफएल और आईएफएल के रिटेल कोटा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रशासन ने पिछले वर्ष के कोटे को ही जारी रखा है। अधिकारियों के अनुसार इस बार नीति को राजस्व के लिहाज से रेवेन्यू न्यूट्रल रखा गया है ताकि बाजार संतुलन बना रहे और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।

डिपार्टमेंटल स्टोर्स में फिर से शराब बिक्री की अनुमति

नई नीति में एल-10 बी लाइसेंस को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत डिपार्टमेंटल स्टोर्स में भी शराब की बिक्री की अनुमति दी जा सकेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे खासकर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल में शराब खरीदने का विकल्प मिलेगा।

भुगतान न करने पर लाइसेंस होगा रद्द

नई आबकारी नीति में नियमों को सख्त करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि यदि कोई लाइसेंसधारी तय समय पर लाइसेंस फीस जमा नहीं करता है तो उसका एल-2 या एल-14ए लाइसेंस सहित अन्य सभी लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रशासन कानून के तहत बकाया राशि की वसूली की कार्रवाई भी करेगा। नीति के अनुसार बार संचालकों को शराब की खरीद अपने सबसे नजदीकी दो रिटेल ठेकों से करनी होगी। यदि दोनों ठेके एक ही व्यक्ति या कंपनी के पास हैं तो बार संचालक तीसरे नजदीकी ठेके से खरीद कर सकेंगे। इस पूरी खरीद का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।

निगरानी के लिए सीसीटीवी और जीपीएस

शराब के भंडारण और परिवहन पर निगरानी बढ़ाने के लिए प्रशासन ने तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया है। अब रिटेल ठेकों के अतिरिक्त गोदामों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा और इनका लाइव फीड विभाग को उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा शराब के आयात, निर्यात और स्थानीय सप्लाई में इस्तेमाल होने वाले सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। शराब के प्रचार-प्रसार को लेकर भी नियम कड़े किए गए हैं। विज्ञापन नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंसधारियों पर जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

अब छह दिन खुलेंगे बॉटलिंग प्लांट

नई नीति में बॉटलिंग प्लांट्स के संचालन को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब बॉटलिंग प्लांट्स सप्ताह में पांच दिन के बजाय छह दिन यानी सोमवार से शनिवार तक खुलेंगे। इन प्लांट्स में भी सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। जरूरत पड़ने पर गजेटेड अवकाश के दिनों में ओवरटाइम के साथ संचालन की अनुमति भी दी जा सकेगी।

शराब पर काउ सेस जारी

नई आबकारी नीति में शराब की बिक्री पर लगाया जाने वाला काउ सेस पहले की तरह जारी रहेगा। इसके तहत 750 मिलीलीटर कंट्री लिकर और 650 मिलीलीटर बीयर की प्रति बोतल पर 50 पैसे, जबकि 750 या 700 मिलीलीटर व्हिस्की पर एक रुपये का सेस लागू रहेगा। यदि किसी सरकारी या प्रशासनिक परिसर में शराब का ठेका खोला जाता है तो संबंधित लाइसेंसधारी को उस विभाग को सीधे किराया देना होगा और उससे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

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